-Friday World September 27,2026
अमेरिकी सेंक्शन्स के दबाव में इराक ने एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है। इराक सरकार ने ईरान से आने-जाने वाली सभी फ्लाइट्स पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। इस फैसले के तहत आज नजफ अल-अशरफ इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भी बंद कर दिया गया, जो हजरत अली (अ.स.) के रोज़े पर जियारत के लिए जाने वाले लाखों आशिकों का मुख्य दरवाजा माना जाता है।
इस फैसले के बाद इराक के अंदर भारी गुस्सा और उबाल देखा जा रहा है और ईरान में भी इस पर सख्त प्रतिक्रिया आई है।
विलायती का सख्त बयान - पीएम को सीधी चेतावनी
ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई के सलाहकार डॉ. अली अकबर विलायती ने इस पर सख्त बयान दिया है। उन्होंने इराक के पीएम अली अल-ज़ैदी को मुखातिब करते हुए कहा:
"आज नजफ में एयरपोर्ट बंद कर दिया गया जो अमीरुल मोमिनीन हजरत अली अ.स. के आशिकों की ज़ियारत का दरवाज़ा था। वफादारी वॉशिंगटन से नहीं, बल्कि नजफ की मिट्टी और शहीदों के खून से होनी चाहिए।"
विलायती यहीं नहीं रुके। उन्होंने इराकी शिया मिलिशिया की खामोशी पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, "जिन ग्रुप्स को रेजिस्टेंस के अकीदे और शहीदों के खून ने मजबूत किया था, आज उसकी खामोशी सरकार की दीवार पर एक खाली फ्रेम बनकर रह गई है।"
उन्होंने साफ कहा कि खून से जुड़े मोर्चे किसी साजिश के जरिए अलग नहीं किए जा सकते। "यमन से लेकर इराक तक रेजिस्टेंस का मोर्चा एक है और इसे अलग करने की कोई भी कोशिश कामयाब नहीं होगी।"
हरकत-उल-नुजबा की बड़ी धमकी - सारे एयरपोर्ट जाम कर देंगे
विलायती के बयान के फौरन बाद इराक के ताकतवर शिया एंटी-टेरर ग्रुप हरकत उल नुजबा ने भी मोर्चा खोल दिया है। ग्रुप ने बयान जारी कर कहा कि अगर ईरान से आने-जाने वाली उड़ानों पर लगी पाबंदी वापस नहीं ली गई तो इराक के तमाम एयरपोर्ट्स पर काम ठप कर दिया जाएगा।
ग्रुप ने कहा है कि वो सभी एयरपोर्ट्स पर प्रोटेस्ट शुरू करेंगे और तब तक जारी रखेंगे जब तक सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेती। नजफ एयरपोर्ट के बाहर पहले से ही बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं जैसा कि तस्वीर में देखा जा सकता है।
इराकी आवाम में भारी उबाल
इराकी जनता भी अपनी सरकार के इस फैसले से खुश नहीं है। नजफ और कर्बला में जियारत का सीजन चल रहा है और ईरान से हर रोज हजारों जायरीन आते हैं। फ्लाइट बंद होने से हजारों लोग फंस गए हैं। सोशल मीडिया पर #OpenNajafAirport ट्रेंड कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका इराक पर लगातार दबाव बना रहा है कि वो ईरान से अपने सारे संबंध खत्म कर दे, लेकिन इराक की शिया बहुल आबादी और धार्मिक संबंधों के कारण यह फैसला सरकार के लिए बहुत महंगा साबित हो सकता है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World September 27,2026
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