-Friday World September 13,2026
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान का भारत दौरा सिर्फ एक राजनयिक यात्रा नहीं, बल्कि एक स्पष्ट और बेबाक संदेश बन गया है। नई दिल्ली में खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस कर, बिना किसी सवाल से बचे, उन्होंने वह कहा जो तेहरान लंबे समय से कहना चाहता था। आजतक से खास बातचीत में उन्होंने दो टूक कहा - 'हमें UAE या खाड़ी के किसी भी क्षेत्रीय देश से कोई समस्या नहीं है, समस्या अमेरिकी सैन्य ठिकानों से है।'
यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर है, सऊदी पाइपलाइनों पर ड्रोन हमले हो रहे हैं और खाड़ी देशों में अमेरिकी मौजूदगी को लेकर बहस तेज है।
भारत की जमीन से खाड़ी को पैगाम
पेजेश्कियान का भारत को मंच बनाना सोचा-समझा कदम है। भारत, ईरान का ऐतिहासिक दोस्त है और साथ ही सऊदी अरब, UAE का भी करीबी साझेदार है। दिल्ली से दिया गया उनका संदेश इसलिए ज्यादा वजन रखता है।
उन्होंने कहा, "हम सऊदी अरब और UAE को अपना दुश्मन नहीं मानते। वे हमारे मुस्लिम भाई हैं, हमारे पड़ोसी हैं। हमारा झगड़ा उनके साथ नहीं है।" इसके बाद उन्होंने अपनी बात को और स्पष्ट किया, "हमारा कहना सिर्फ इतना है कि खाड़ी और पड़ोसी देश अपनी जमीन को ईरान पर हमले के लिए अमेरिका को इस्तेमाल न करने दें।"
उनका इशारा साफ था - ईरान का टकराव क्षेत्रीय देशों से नहीं, बल्कि इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उसकी नीतियों से है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में वो बेबाकी जो अक्सर नहीं दिखती
दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेजेश्कियान का अंदाज बिल्कुल अलग था। न सवालों से बचना, न घुमा-फिरा कर जवाब देना। पत्रकारों ने परमाणु कार्यक्रम, इजरायल-ईरान तनाव, तेल प्रतिबंधों और भारत के साथ चाबहार पोर्ट जैसे तीखे सवाल पूछे और उन्होंने हर सवाल का खुलकर जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपनी संप्रभुता पर कोई समझौता भी नहीं करेगा। अगर अमेरिका या इजरायल ईरान पर हमला करता है, तो ईरान को जवाब देने का पूरा हक है। लेकिन वह जवाब खाड़ी देशों की जनता के खिलाफ नहीं, बल्कि उन ठिकानों के खिलाफ होगा जहां से हमला होगा।
यह बयान एक तरह से खाड़ी देशों को आश्वासन भी है और चेतावनी भी। आश्वासन कि ईरान उन्हें दुश्मन नहीं मानता, और चेतावनी कि अगर उनकी जमीन से हमला हुआ तो वह जमीन जवाबी कार्रवाई के दायरे में आ सकती है।
इस बयान के मायने क्या हैं?
1. क्षेत्रीय एकता की कोशिश: ईरान पिछले दो साल से सऊदी अरब और UAE के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश में है। चीन की मध्यस्थता से सऊदी-ईरान समझौता इसका सबूत है। पेजेश्कियान उसी कूटनीति को आगे बढ़ा रहे हैं।
2. अमेरिका पर दबाव: ईरान अमेरिका को यह बताना चाहता है कि उसकी खाड़ी में मौजूदगी ही पूरे क्षेत्र में अस्थिरता की जड़ है। अगर अमेरिकी अड्डे हट जाएं, तो क्षेत्र के देश आपस में बातचीत से मसले हल कर सकते हैं।
3. भारत की भूमिका: भारत के लिए यह स्थिति संतुलन साधने वाली है। भारत ईरान से सस्ता तेल चाहता है, चाबहार पोर्ट के जरिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच चाहता है, और साथ ही खाड़ी देशों में बसे 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा भी चाहता है। पेजेश्कियान का यह नरम रुख भारत की कूटनीति के लिए राहत की बात है।
तेल, चाबहार और भविष्य
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेजेश्कियान ने भारत-ईरान संबंधों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों के बावजूद भारत और ईरान का व्यापार बढ़ सकता है। चाबहार पोर्ट दोनों देशों का साझा भविष्य है और इसे किसी तीसरे देश के दबाव में नहीं रोका जाना चाहिए।
भारत ने हमेशा यही नीति रखी है कि वह किसी एक गुट का हिस्सा नहीं है। ईरानी राष्ट्रपति का यह दौरा और उनका यह बयान भारत की उसी स्वतंत्र विदेश नीति को और मजबूत करता है।
साफ है, मसूद पेजेश्कियान सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं कर रहे थे, वह एक नया नैरेटिव गढ़ रहे थे - जिसमें दुश्मन पड़ोसी नहीं, बल्कि बाहर की ताकतें हैं। अब देखना यह है कि UAE, सऊदी अरब और अमेरिका इस सीधे संदेश का क्या जवाब देते हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World September 13,2026
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