- Friday World Oct 10,2026
अमेरिका ने ईरान के साथ प्रतिबंधित तेल व्यापार को लेकर भारत पर बड़ी कार्रवाई की है। ट्रंप प्रशासन ने अपने नए अभियान 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत मुंबई की दो कंपनियों और पांच भारतीय नागरिकों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। यह कार्रवाई 8-9 अक्टूबर 2025 को की गई है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय और वित्त मंत्रालय (OFAC) का आरोप है कि इन भारतीय कंपनियों ने प्रतिबंधों के बावजूद फरवरी से जुलाई 2025 के बीच करीब 20 लाख डॉलर (लगभग 16 करोड़ रुपये) के ईरानी पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स का आयात किया और ईरानी तंत्र तक लाखों डॉलर पहुंचाए।
किन पर गिरी गाज?
अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक:
1. SSPL सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई:
यह एक पेट्रोकेमिकल ट्रेडिंग कंपनी है। इसके दो डायरेक्टर -
- ध्वनि वोरा
- निसर्ग वोरा
इन पर Executive Order 13846 के तहत प्रतिबंध लगाया गया है।
2. समुद्र मरीन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई:
यह एक कस्टम ब्रोकरेज फर्म है, जो जहाजों की क्लीयरेंस का काम करती है। अमेरिका का आरोप है कि इसने ईरानी माल की कई शिपमेंट को भारत में लाने में मदद की। इसके तीन डायरेक्टर -
केतन मनोहर कोचिकर
भूपेन्द्रसिंह साहू
हरिश्याम हरिहरन चुंडाकट्टिल
इन तीनों को भी ब्लॉक लिस्ट में डाला गया है।
अमेरिका ने इन सभी के वित्तीय लेन-देन पर तुरंत रोक लगा दी है। हालांकि समुद्र मरीन सर्विसेज को अपने पुराने चालू कारोबार समेटने के लिए 23 अक्टूबर तक का विंड-डाउन पीरियड दिया गया है।
इसके अलावा अमेरिका ने ईरान के शैडो फ्लीट के 17 बड़े जहाजों पर भी प्रतिबंध लगाया है जो ईरानी कच्चा तेल ढो रहे थे।
क्या है ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट?
ट्रंप प्रशासन ने ईरान की कमर तोड़ने के लिए इस ऑपरेशन का नाम दिया है। अमेरिका का कहना है कि ईरान प्रतिबंधित तेल बेचकर जो करोड़ों डॉलर कमाता है, उसका इस्तेमाल वह मध्य-पूर्व में अपने सैन्य अभियानों और प्रॉक्सी संगठनों को फंडिंग के लिए करता है। इसलिए उसकी तेल से होने वाली कमाई को पूरी तरह रोकना जरूरी है।
इस ऑपरेशन के तहत सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि UAE की Horizon Ship Management, Hessonite Ship Management, तुर्की की Noorzad Petrokimya जैसी 10 कंपनियों, 6 व्यक्तियों और 5 जहाजों को भी बैन किया गया है।
दोहरा मापदंड? अमेरिका ने रूस से डीजल मांगा!
और यही पर कहानी में बड़ा ट्विस्ट आता है, जिस पर पूरी दुनिया में सवाल उठ रहे हैं।
एक तरफ अमेरिका ईरान के साथ व्यापार करने पर भारतीय कंपनियों को बैन कर रहा है, तो दूसरी तरफ खुद अमेरिका ने रूस से डीजल की मांग की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी ईस्ट कोस्ट पर डीजल की कमी के कारण अमेरिका रूस से सप्लाई पर विचार कर रहा है।
अब सवाल उठता है कि जब भारत रूस से सस्ता तेल खरीदता है तो उस पर टैरिफ और बैन की धमकी दी जाती है, लेकिन जब अमेरिका खुद रूस से डीजल लेगा तो उस पर टैरिफ या बैन कौन लगाएगा?
यह अमेरिका की 'नियम सबके लिए, अपवाद खुद के लिए' वाली नीति को उजागर करता है। भारत ने हमेशा कहा है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए स्वतंत्र फैसले लेता है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत व्यापार करता है।
अमेरिका ने चेतावनी दी है कि जो भी वित्तीय संस्थान ईरान के तेल व्यापार में मदद करेगा, उसे सेकेंडरी सैंक्शन का सामना करना पड़ेगा और उसे अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से काट दिया जाएगा।
भारत पर असर क्या होगा?
यह पहली बार नहीं है जब भारतीय कंपनियों पर ईरान से जुड़े मामले में बैन लगा है। लेकिन मुंबई जैसे बड़े बंदरगाह शहर की कंपनियों पर कार्रवाई से भारतीय शिपिंग और कस्टम सेक्टर में हड़कंप है। कंपनियों को अब अमेरिकी बैंकों में मौजूद संपत्ति फ्रीज होने और डॉलर में लेन-देन बंद होने का खतरा है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Oct 10,2026
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