- Friday World Oct 26,2026
भारत गुजरात में समुद्र के सीने पर दुनिया का सबसे बड़ा अजूबा खड़ा करने की तैयारी में है। इसका नाम है - #काल्पसर प्रोजेक्ट। खंभात की खाड़ी में 30 किलोमीटर लंबा विशाल कंक्रीट का बांध, जो समुद्र के खारे पानी को रोककर मीठे पानी का समंदर बना देगा।
ये सिर्फ एक बांध नहीं, भारत के इंजीनियरिंग इतिहास का सबसे साहसी सपना है। 'काल्पसर' का मतलब ही है - जो कल्पना को साकार कर दे, इच्छाओं को पूरा करने वाली झील।
क्या है ये प्रोजेक्ट?
गुजरात सरकार की योजना के मुताबिक, भावनगर जिले के घोघा से भरूच जिले के हांसोट तक खंभात की खाड़ी पर लगभग 60.13 किलोमीटर का डाइक बनाया जाएगा, जिसमें से करीब 26.7 से 30 किलोमीटर हिस्सा सीधे समंदर के बीच में होगा।
ये बांध नर्मदा, साबरमती, माही, ढाढर सहित 12 नदियों के पानी को समंदर में बर्बाद होने से रोकेगा। इससे समंदर के बीच 7,807 मिलियन क्यूबिक मीटर क्षमता वाली दुनिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की तटीय झील बनेगी, जो लगभग 2,000 वर्ग किलोमीटर में फैली होगी।
तीन बड़े फायदे, जो गुजरात की #किस्मत बदल देंगे:
1. #सौराष्ट्र का प्यासा हलक तर होगा: इस झील से सौराष्ट्र के 9 जिलों के 42 तालुका की करीब 10 लाख हेक्टेयर (9.99 लाख हेक्टेयर) बंजर जमीन पर सिंचाई होगी। पीने और इंडस्ट्री के लिए भी पानी मिलेगा और करीब 1 लाख हेक्टेयर खारी जमीन सुधर जाएगी।
2. 8 #घंटे का सफर 3 घंटे में: बांध की छत पर एक 130 मीटर चौड़ा कॉरिडोर बनेगा, जिसमें 16 लेन की सड़क और 4 लेन की रेलवे लाइन होगी। अभी भावनगर से सूरत जाने के लिए 356 किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है, जो इस बांध से घटकर सिर्फ 177 किलोमीटर रह जाएगा, यानी 179 किलोमीटर की सीधी बचत। सफर 8 घंटे से घटकर 3-4 घंटे का हो जाएगा। सोशल मीडिया पर 20 मिनट का दावा वायरल है, लेकिन सरकारी DPR में दूरी घटने की बात है, समय की नहीं।
3. #समंदर की लहरों से बिजली: खाड़ी की तेज ज्वारीय लहरों से लगभग 2,470 मेगावाट ग्रीन एनर्जी- 1500 MW विंड और 1000 MW सोलर - पैदा होगी। इसी बिजली से झील का पानी सौराष्ट्र तक पंप किया जाएगा।
#हकीकत क्या है? बन रहा है या सिर्फ कागजों पर?
यहां आपको सच्चाई जानना जरूरी है। वायरल वीडियो में इसे बनता हुआ दिखाया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि अभी बांध का निर्माण शुरू नहीं हुआ है।
- #प्रोजेक्ट का आइडिया 1980 में आया था। 1998 में सरकार ने मंजूरी दी थी।
- #जुलाई 2026 में केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया कि इसका #DPR (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) अभी फाइनल स्टेज में है।
- 21 मई 2026 को गुजरात के काल्पसर विभाग ने पर्यावरण मंत्रालय से EIA स्टडी के लिए आवेदन किया है।
- #मुख्य बांध का निर्माण अभी शुरू नहीं हुआ है।
- #मई 2026 में भारत और नीदरलैंड ने तकनीकी सहयोग के लिए करार किया है, क्योंकि नीदरलैंड समंदर में बांध बनाने में दुनिया का सबसे अनुभवी देश है।
- #अगर सब मंजूरियां समय पर मिलीं तो #निर्माण मई 2028 से शुरू होकर 2035-38 तक पूरा होने की उम्मीद है, और लागत लगभग 1.33 लाख करोड़ रुपये आएगी। गुजरात सरकार अब तक सिर्फ स्टडी पर 216 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है।
#सरकार का ही एक हिस्सा - भादभूत बैराज - जो इसी योजना का छोटा रूप है, 2020 से बनना शुरू हुआ है।
सबसे बड़ी #चुनौतियाँ क्या हैं?
#खंभात की खाड़ी में 10 मीटर ऊंची ज्वारीय लहरें, समंदर के खारे और मीठे पानी को अलग रखना, मछुआरों और समुद्री जीवन पर असर, और सिल्ट यानी गाद का जमाव - ये सब बड़ी तकनीकी चुनौतियां हैं। पर्यावरण मंजूरी मिलना भी आसान नहीं होगा।
लेकिन अगर यह बन गया, तो यह सरदार सरोवर से भी बड़ा गेम-चेंजर होगा। यह भारत का अपना #अफ्सलुइजकडाइक (नीदरलैंड का 32 KM लंबा समंदर का बांध) होगा, जो #गुजरात को पानी, बिजली और रफ्तार - तीनों देगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Oct 26,2026
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