- Friday World Oct 22,2026
भावनगर: दुनिया के सबसे बड़े शिप ब्रेकिंग यार्ड अलंग से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को दांव पर लगाने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिसे बांग्लादेश ने जहरीला कहकर अपने शिपयार्ड में घुसने तक नहीं दिया, उसी 'कोरियन फ्लैग LNG' जहाज को भावनगर के अलंग में लाकर तोड़ने की मंजूरी दे दी गई।
इस पूरे मामले का पर्दाफाश बावला के सामाजिक कार्यकर्ता प्रफुल्ल मेहता की RTI से हुआ है, जिसमें गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) की गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं।
बांग्लादेश ने क्यों भगाया था?
प्रफुल्ल मेहता के मुताबिक, इस LNG जहाज के अंदर जहरीले पाउडर होने की आशंका के चलते बांग्लादेश की शिपिंग अथॉरिटी ने लिखित में इस जहाज को अपनी सीमा में प्रवेश देने से मना कर दिया था। लेकिन उसी जहाज को भारत में अलंग के प्लॉट नंबर 88, मैसर्स आत्म मनोहर शिप ब्रेकर्स यार्ड में लाया गया।
जांच के दौरान खुलासा हुआ कि इस जहाज से लगभग 567 मेट्रिक टन अत्यंत जहरीला पर्लाइट (Perlite) पाउडर, ग्लास वूल और ऑयली वेस्ट करीब 3 किलोमीटर तक समुद्र किनारे और पानी में फैल गया।
क्या है पर्लाइट पाउडर? कितना खतरनाक है?
सामाजिक कार्यकर्ता ने रिसर्च कर बताया कि पर्लाइट एक सफेद ज्वालामुखी कांच जैसा पाउडर होता है, जो LNG जहाजों में इंसुलेशन के लिए इस्तेमाल होता है।
- अगर यह आंख में चला जाए तो तेज जलन, खरोंच और लाली आती है।
- सांस के जरिए फेफड़ों में जाने पर फाइब्रोसिस, अस्थमा और फेफड़ों की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
- लंबे समय तक संपर्क में रहने वाले मजदूरों को कैंसर तक का खतरा बताया जाता है।
अलंग में बिना किसी सेफ्टी मास्क के काम करने वाले सैकड़ों मजदूर इस जहर की चपेट में आए हैं।
GPCB ने नोटिस दिया, पर कचरा कहां गया? पता नहीं!
मामला सामने आने के बाद GPCB ने माना कि SOP का उल्लंघन हुआ है और जल प्रदूषण निवारण अधिनियम की धारा 33(A) के तहत शिप ब्रेकर को नोटिस भी दिया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल आज भी बिना जवाब के है - लगभग 28 ट्रक भरकर जो जहरीला कचरा हटाया गया, वो आखिर कहां डंप किया गया?
RTI में GPCB ने गोल-मोल जवाब दिए। अपील करने पर ही अंतिम लाइन में 567 टन पर्लाइट होने की बात स्वीकारी गई, लेकिन उसके निपटान का कोई रिकॉर्ड नहीं दिखाया गया।
प्रफुल्ल मेहता का कहना है, "मैंने GPCB अधिकारियों को मौखिक रूप से कहा था कि जब जांच रिपोर्ट बनाओ तो ध्यान रखना। लेकिन पूरी जांच के बिना ही जहाज को तोड़ने की मंजूरी दे दी गई। यह सीधे-सीधे पर्यावरण और मानव जीवन के साथ खिलवाड़ है।"
अब सवाल उठ रहा है कि क्या अलंग दुनिया के कबाड़ जहाजों का डंपिंग ग्राउंड बन गया है, जहां बांग्लादेश जैसे देश भी मना कर देते हैं, उसे भारत में लाकर पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं?
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Oct 22,2026
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