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April 28, 2026
रूस-यूक्रेन युद्ध में 10 भारतीय युवकों की मौत: “मरजी से गए थे” – सुप्रीम कोर्ट में सरकार का बड़ा खुलासा
रूस-यूक्रेन युद्ध में 10 भारतीय युवकों की मौत: “मरजी से गए थे” – सुप्रीम कोर्ट में सरकार का बड़ा खुलासा-Friday World-April 29,2026
रूस-यूक्रेन युद्ध की आग में फंसे भारतीय युवकों की दर्दनाक कहानी एक बार फिर सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि रूसी सेना की ओर से लड़ते हुए 10 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है। इनमें ज्यादातर युवा थे, जिनकी 25-26 वर्षीय पत्नियां अब विधवा हो गई हैं। परिवारों का आरोप है कि उन्हें नौकरी का झांसा देकर ठगा गया और जबरन युद्ध में धकेल दिया गया, जबकि सरकार का कहना है कि अधिकांश लोग **अपनी मरजी से** ऐसे कॉन्ट्रैक्ट पर साइन करके गए थे।
यह मामला न सिर्फ विदेश मंत्रालय (MEA) की सक्रियता पर सवाल उठा रहा है, बल्कि विदेश में नौकरी के नाम पर युवाओं के शोषण और मानव तस्करी जैसे गंभीर मुद्दों को भी उजागर कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
शुक्रवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ (जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली के साथ) ने 26 भारतीयों के परिवारों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि फंसे हुए भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जाए और मृतकों के पार्थिव शरीर स्वदेश भेजे जाएं।
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सरकार की ओर से पेश होते हुए बताया कि याचिका में उल्लिखित 26 व्यक्तियों में से 10 की मौत हो चुकी है। एक व्यक्ति पर आपराधिक मामला दर्ज है और वह जेल में है, जबकि एक व्यक्ति स्वेच्छा से वहां रुकना चाहता है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि कई भारतीय नागरिकों ने स्वेच्छा से रूसी पक्ष के साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन किए थे, जिसके तहत वे युद्ध क्षेत्र में पहुंच गए। हालांकि, कुछ एजेंटों और दलालों ने युवाओं को नौकरी या अच्छी तनख्वाह का लालच देकर फंसाया भी हो सकता है।
सरकार का पक्ष: “मरजी से गए, लेकिन सलाह दी जा रही है”
विदेश मंत्रालय की ओर से कोर्ट को बताया गया कि:
- प्रभावित परिवारों से लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है।
- MEA एक बहुआयामी रणनीति पर काम कर रहा है, जिसमें युद्ध क्षेत्र में फंसे भारतीयों की पहचान, उनकी सुरक्षा और वापसी शामिल है।
- सरकार बार-बार चेतावनी जारी कर रही है कि नागरिक ऐसे किसी भी संदिग्ध कॉन्ट्रैक्ट पर साइन न करें।
- मृतकों के पार्थिव शरीर वापस लाने के प्रयास जारी हैं, लेकिन युद्ध क्षेत्र में यह प्रक्रिया बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण है।
ASG ने यह भी कहा कि कुछ परिवारों की ओर से पूरा सहयोग नहीं मिल रहा है। एक उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि परिवारों ने कहा – “आप पार्थिव शरीर अपने पास रख लीजिए, हम अदालत जा रहे हैं।” सरकार का तर्क है कि ऐसे मुद्दों पर पारदर्शी सहयोग जरूरी है।
परिवारों का आरोप: धोखा और बेध्यानी
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील ऋत्विक भनोट ने विदेश मंत्रालय पर बेध्यानी और निष्क्रियता का आरोप लगाया। उनका कहना था:
- युवाओं को रूस में अच्छी नौकरी का झांसा देकर लाया गया।
- वहां पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए और उन्हें युद्ध में लड़ने के लिए मजबूर किया गया।
- परिवारों ने MEA को कई बार शिकायत की, लेकिन कोई त्वरित कार्रवाई नहीं हुई।
- कई मामलों में बिना सरकारी मदद के निजी लोग ही परिवारों की मदद कर रहे हैं।
परिवारों ने कोर्ट से मांग की कि मृतकों की सही पहचान के लिए **DNA सैंपल** लेने के निर्देश दिए जाएं और पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत लाए जाएं। उन्होंने 25-26 वर्ष की युवा विधवाओं और बच्चों की दयनीय स्थिति की भी ओर ध्यान दिलाया।
कोर्ट का निर्देश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने विदेश मंत्रालय को **विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट** दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें अब तक उठाए गए कदमों, संपर्क किए गए परिवारों और वापसी की प्रक्रिया की पूरी जानकारी होनी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई में इस रिपोर्ट पर आगे विचार होगा।
पृष्ठभूमि: कैसे फंसे युवा?
पिछले कुछ वर्षों में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान कई भारतीय युवा बेहतर नौकरी या शिक्षा के नाम पर रूस गए। कुछ को सेना में सहायक भूमिका (जैसे कुक, ड्राइवर आदि) बताकर भर्ती किया गया, लेकिन बाद में उन्हें फ्रंटलाइन पर लड़ने के लिए मजबूर किया गया।
सरकार ने संसद में भी स्वीकार किया था कि रूसी सेना में भर्ती हुए भारतीयों की संख्या में कुछ मौतें हुई हैं। MEA ने समय-समय पर एडवाइजरी जारी की है कि नागरिक विदेशी सेनाओं में भर्ती न हों।
क्यों है यह मुद्दा गंभीर?
1. युवाओं का शोषण: बेरोजगारी और अच्छी तनख्वाह के लालच में युवा दलालों के जाल में फंस रहे हैं।
2. राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीति: विदेशी युद्ध में भारतीयों की भागीदारी भारत की तटस्थ छवि और रूस-यूक्रेन दोनों देशों के साथ संबंधों को प्रभावित कर सकती है।
3. परिवारों की पीड़ा: 10 मौतों के साथ कई युवा परिवार बिना सहारे के छूट गए हैं। विधवाएं और बच्चे आर्थिक व भावनात्मक संकट से जूझ रहे हैं।
4. कानूनी जटिलताएं: युद्ध क्षेत्र में पार्थिव शरीर वापस लाना, DNA सत्यापन और मुआवजे जैसे मुद्दे जटिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप केंद्र सरकार को अधिक सक्रिय होने के लिए मजबूर कर सकता है। अदालत ने पहले भी MEA को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
आगे क्या?
अगली सुनवाई में MEA की स्टेटस रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। यदि रिपोर्ट में ठोस प्रगति नहीं दिखी तो कोर्ट कड़े निर्देश दे सकता है। साथ ही, सरकार को अवैध भर्ती एजेंटों पर सख्त कार्रवाई करने और युवाओं को जागरूक करने की जरूरत है।
रूस-यूक्रेन युद्ध ने एक बार फिर साबित किया है कि विदेश में नौकरी के नाम पर盲 विश्वास घातक साबित हो सकता है। “मरजी से गए” और “धोखा हुआ” – दोनों पक्षों की दलीलों के बीच सच्चाई कहीं बीच में है। लेकिन सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि 10 भारतीय परिवारों ने अपने जवान बेटों को हमेशा के लिए खो दिया है।
सरकार, अदालत और समाज को मिलकर ऐसे शोषण को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे, ताकि कोई और युवा अपनी जान गंवाने से पहले सावधान हो सके।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 29,2026