2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में BJP ने कांग्रेस को बुरी तरह हराकर बहुमत हासिल किया। BJP का अगला शिकार क्षेत्रीय पार्टियां बनने लगीं। BJP ने अपनी ताकत बढ़ाने के लिए कई राज्यों में सहयोगी पार्टियों पर भी नए पैंतरे आजमाए। नतीजतन कई सहयोगी दलों ने BJP का साथ छोड़ दिया। ओर कई सहयगी दल का अस्तित्व खतरे मे पड गया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में मुख्यमंत्रियों और उप मुख्यमंत्रियों के साथ 6 घंटे की बैठक की। मोदी ने पार्टी नेताओं से कहा कि वह NDA में शामिल सहयोगी दलों को भरोसा दिलाएं कि भाजपा अपने साथियों को पूरा मौका और सम्मान देती है। BJP का ध्यान हमेशा से ही क्षेत्रीय आकांक्षाओं पर केंद्रित रहा है और यह धारणा बिल्कुल नहीं होनी चाहिए कि वह क्षेत्रीय दलों के साथ सहज नहीं है।
तीन दल ओर तीन राज्य मे भाजप को साफ साफ कमसे कम 100 से अधिक सीटो का नुकसान हो रहा है तो दूसरी ओर एंटी इन्कमबसी के तहत बहुत-से राज्य मे भाजप को भारी विरोध का सामना करना पड सकता है ओर उस विरोध से अगर 50=75 सीट पर बदलाव हुआ तो मानो भाजप को सत्ता से बहार होना संभव है क्युकी पिछले सहयोगी अब समर्थन देने से खुद सत्ता मे आने का रास्ता ढुढेंगी