-Friday World January 22,2026
बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक बेहद गंभीर और शर्मनाक घटना सामने आई है, जहां एक विदेशी महिला यात्री के साथ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज हुआ है। यह घटना 19 जनवरी को हुई, जब एक 32 वर्षीय दक्षिण कोरियाई महिला व्यवसायी कोरिया जाने वाली उड़ान के लिए एयरपोर्ट पर पहुंची थी। एयरलाइन के ग्राउंड हैंडलिंग स्टाफ ने सुरक्षा जांच और सामान की तलाशी के बहाने उसे अलग-थलग जगह पर ले जाकर अनुचित तरीके से छुआ और उत्पीड़न किया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी स्टाफ को तुरंत गिरफ्तार कर लिया है और कंपनी ने उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया है।
घटना कैसे हुई? महिला ने अपनी शिकायत में बताया कि इमिग्रेशन और सामान्य सुरक्षा जांच पूरी करने के बाद वह टर्मिनल की ओर जा रही थी। तभी एक पुरुष कर्मचारी ने उससे संपर्क किया और बोर्डिंग पास दिखाने को कहा। इसके बाद उसने दावा किया कि चेक-इन सामान में कोई समस्या है, बीप की आवाज आ रही है और नियमित काउंटर पर वापस जाना समय लेगा, जिससे उड़ान छूट सकती है।
उसने महिला को डराने के लिए कहा कि अलग से त्वरित जांच होनी चाहिए, जिसे "मैनुअल फ्रिस्किंग" बताया। महिला को पुरुषों के वॉशरूम के पास वाली जगह पर ले जाया गया। वहां पहुंचकर आरोपी ने कथित तौर पर उसके स्तन को कई बार छुआ, पीछे मुड़ने को कहा और निजी अंगों को अनुचित तरीके से स्पर्श किया। जब महिला ने विरोध किया, तो आरोपी ने उसे गले लगाया और "थैंक यू" कहकर चला गया।
महिला ने तुरंत एयरपोर्ट सिक्योरिटी को सूचित किया। सुरक्षा कर्मियों ने आरोपी को हिरासत में लिया और केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की, जिसमें पूरी घटना दर्ज थी। फुटेज के आधार पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 75 (यौन उत्पीड़न) के तहत मामला दर्ज किया गया। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
कंपनी की प्रतिक्रिया और कार्रवाई घटना की जानकारी मिलते ही एयर इंडिया एसएटीएस (ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसी) ने इसे "अक्षम्य" बताते हुए आरोपी को तत्काल प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त कर दिया। कंपनी ने बयान जारी कर कहा कि इस तरह की हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही पीड़िता को मानसिक आघात के लिए खेद व्यक्त किया और उसे हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया।
एयरपोर्ट अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कोई भी फ्रिस्किंग या तलाशी केवल अधिकृत सुरक्षा कर्मी (खासकर महिला यात्री के मामले में महिला कर्मी) द्वारा ही की जा सकती है। ग्राउंड स्टाफ को ऐसी कोई अधिकार नहीं है। इस घटना ने एयरपोर्ट सुरक्षा प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि आरोपी ने अपनी स्थिति का दुरुपयोग कर महिला को डराया और अलग-थलग जगह पर ले गया।
घटना का व्यापक प्रभाव यह मामला न केवल एयरपोर्ट सुरक्षा की कमियों को उजागर करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की सुरक्षा और सम्मान के प्रति जिम्मेदारी की याद दिलाता है। विदेशी यात्री, खासकर महिलाएं, जब भारत आती हैं या यहां से जाती हैं, तो उन्हें सुरक्षित महसूस करना चाहिए। ऐसी घटनाएं देश की छवि पर भी असर डालती हैं।
पुलिस जांच जारी है और यह देखना होगा कि आरोपी के खिलाफ कितनी सख्त कार्रवाई होती है। साथ ही एयरपोर्ट प्रबंधन को अपनी ट्रेनिंग, निगरानी और प्रक्रियाओं में सुधार करने की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। पीड़िता ने कहा है कि इस घटना से भारत के प्रति उसकी नजरिया नहीं बदला, लेकिन बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की उम्मीद जताई है।
यह घटना समाज को चेतावनी देती है कि सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा सर्वोपरि है। एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील इलाकों में सतर्कता और त्वरित कार्रवाई जरूरी है। उम्मीद है कि न्याय मिलेगा और ऐसी हरकत करने वालों को कड़ी सजा मिलेगी, ताकि अन्य लोग डरें और महिलाएं सुरक्षित यात्रा कर सकें।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World January 22,2026