Breaking

यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Thursday, 22 January 2026

"ट्रंप की ग्रीनलैंड लालच vs यूरोप का पाखंड: सैक्स ने सबकी पोल खोल दी! बिना सिद्धांतों वाली दुनिया"

"ट्रंप की ग्रीनलैंड लालच vs यूरोप का पाखंड: सैक्स ने सबकी पोल खोल दी! बिना सिद्धांतों वाली दुनिया"
-Friday World January 22,2026
अमेरिकी अर्थशास्त्री **जेफरी सैक्स** की तीखी टिप्पणी ने वैश्विक राजनीति की दोहरी नीति पर एक बार फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा है कि यूरोपीय देशों ने **गाजा**, **ईरान** और **वेनेजुएला** के खिलाफ अमेरिका द्वारा किए गए हर तरह के दुर्व्यवहार, बर्बरता और उल्लंघनों में खुलकर साथ दिया। लेकिन अब जब **डेनमार्क** और **ग्रीनलैंड** की बात आती है, तो वही यूरोपीय लोग हैरान और आहत क्यों हो रहे हैं? 

यह बयान ट्रंप प्रशासन के ग्रीनलैंड पर बढ़ते दबाव के संदर्भ में आया है, जहां ट्रंप ने बार-बार दावा किया कि ग्रीनलैंड "पहले हमारा था" और इसे अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के लिए जरूरी बताया। 

ट्रंप का यह तर्क इतिहास की एक पुरानी याद दिलाता है—अमेरिका खुद एक समय ब्रिटेन का उपनिवेश था, लेकिन आज वह स्वतंत्रता और संप्रभुता की बात करता है, जबकि दूसरों की जमीन पर नजर रखता है। 

यूरोप की चुप्पी और दोहरा मापदंड जेफरी सैक्स, जो कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रसिद्ध प्रोफेसर हैं और वैश्विक शांति व विकास के मुद्दों पर मुखर रहे हैं, ने यूरोपीय नेताओं की **पाखंडपूर्ण** नीति पर करारा प्रहार किया। उनके अनुसार: 

- यूरोप ने गाजा में चल रहे संघर्ष (जिसे कई लोग नरसंहार तक कहते हैं) में अमेरिका और इजरायल का साथ दिया। हथियार सप्लाई, वित्तीय मदद और संयुक्त राष्ट्र में वीटो के जरिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून की अनदेखी की। 

- ईरान पर अमेरिकी हमलों के बाद यूरोपीय देशों ने ईरान से "संयम" बरतने की मांग की, लेकिन अमेरिका या इजरायल की आलोचना नहीं की। 

- वेनेजुएला में राष्ट्रपति के अपहरण जैसी कार्रवाई को चुपचाप स्वीकार किया, क्योंकि वहां तेल के विशाल भंडार थे और अमेरिकी हित जुड़े थे। 

लेकिन जब ट्रंप ने ग्रीनलैंड को "खरीदने" या "कब्जे" की बात की, तो यूरोप में हंगामा मच गया। डेनमार्क ने अपनी आर्कटिक रक्षा पर अरबों डॉलर खर्च करने की घोषणा की। यूरोपीय नेता अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और न्याय की दुहाई देने लगे। सैक्स कहते हैं—यह "थोड़ा दुखद" है। सिद्धांतों की कमी से निरंतरता नहीं आती। यूरोप ने खुद उन सिद्धांतों को तब कुचला जब वे ग्लोबल साउथ या मध्य पूर्व के देशों पर लागू हो रहे थे। 

ट्रंप का ग्रीनलैंड दावा: इतिहास की विडंबना डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही ग्रीनलैंड पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम है—आर्कटिक में रूस और चीन की बढ़ती मौजूदगी के बीच। लेकिन उनका तर्क विडंबनापूर्ण है: "ग्रीनलैंड पहले हमारा था"। यह वही अमेरिका है जो 1776 में ब्रिटेन से आजादी लेकर बना। अगर इतिहास की बात करें, तो अमेरिका की जमीन भी कभी यूरोपीय उपनिवेश थी—ब्रिटिश, फ्रेंच, स्पेनिश। 

ट्रंप का यह दृष्टिकोण "स्पीयर्स ऑफ इन्फ्लुएंस" (प्रभाव क्षेत्र) पर आधारित लगता है। अमेरिका मध्य पूर्व, लैटिन अमेरिका और अब आर्कटिक में अपना वर्चस्व चाहता है। ग्रीनलैंड में दुर्लभ खनिज, रणनीतिक स्थान और जलवायु परिवर्तन से खुलते नए समुद्री मार्ग हैं। ट्रंप के कुछ समर्थक और दानदाता यहां खनन और "टेक्नो-सिटी" जैसी परियोजनाओं में रुचि रखते हैं।

 यूरोप अब जाग रहा है, क्योंकि पहली बार यह खतरा उनके अपने दरवाजे पर है। लेकिन सैक्स पूछते हैं—जब गाजा के बच्चे मर रहे थे, वेनेजुएला में लोकतंत्र कुचला जा रहा था, ईरान पर बम बरसाए जा रहे थे, तब यूरोप कहां था? 

वैश्विक व्यवस्था पर सवाल यह घटनाक्रम वैश्विक व्यवस्था की नाजुकता को उजागर करता है। अमेरिका जब "नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था" की बात करता है, तो वह अक्सर अपने हितों के अनुरूप नियम बनाता है। यूरोप, जो खुद को मानवाधिकार और कानून का चैंपियन बताता है, अमेरिका के आगे झुक जाता है—क्योंकि NATO, व्यापार और ऊर्जा निर्भरता है। 

सैक्स की बात साफ है: बिना सिद्धांतों के कोई निरंतरता नहीं। अगर यूरोप सच में अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करना चाहता है, तो उसे हर जगह एक जैसा रुख अपनाना होगा—चाहे पीड़ित गाजा हो, ईरान हो, वेनेजुएला हो या अब ग्रीनलैंड। 

ट्रंप का ग्रीनलैंड दावा सिर्फ एक द्वीप की बात नहीं—यह साम्राज्यवाद की नई शक्ल है, जहां शक्ति वाला कमजोर की जमीन पर नजर रखता है। और यूरोप, जो इतिहास में उपनिवेशक रहा, अब खुद उपनिवेश बनने के डर से कांप रहा है। 

यह समय है आत्ममंथन का। क्या दुनिया सिद्धांतों पर चलेगी या सिर्फ शक्ति के बल पर? जेफरी सैक्स की यह चेतावनी सुनने लायक है—क्योंकि जो आज दूसरों पर हो रहा है, कल वही तुम पर हो सकता है। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World January 22,2026