-Friday World January 20,2026
मुंबई: देश की सबसे अमीर और शक्तिशाली नगरपालिका बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनाव परिणामों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। महायुति गठबंधन (भाजपा-शिंदे शिवसेना) ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है, लेकिन उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना (UBT) ने एक ऐसा दावा किया है जिसने भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना में टेंशन बढ़ा दी है। शिवसेना (UBT) के सांसद **संजय राउत** ने कहा है कि विपक्ष बहुमत से महज 6 सीटें दूर है और मेयर पद की रेस में बड़ा 'खेल' हो सकता है।
BMC में कुल 227 सीटें हैं और मेयर चुने जाने के लिए कम से कम 114 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। चुनाव परिणामों के अनुसार, महायुति गठबंधन ने मजबूत प्रदर्शन किया:
- भाजपा: 89 सीटें
- एकनाथ शिंदे की शिवसेना: 29 सीटें
- कुल: 118 सीटें (बहुमत से 4 अधिक)
यह आंकड़ा महायुति को स्पष्ट बहुमत देता है और पहली बार भाजपा को मुंबई में मेयर पद मिलने का रास्ता साफ दिखता है। पिछले 25-30 वर्षों से ठाकरे परिवार का BMC पर कब्जा रहा है, लेकिन इस बार महायुति ने इसे तोड़ दिया। भाजपा ने 2017 के 82 सीटों के रिकॉर्ड को पार करते हुए 89 सीटें जीतीं, जो उसकी सबसे बड़ी सफलता है।
लेकिन संजय राउत का दावा सब कुछ बदल सकता है। उन्होंने कहा, "हमारे पास फिलहाल 108 सीटें हैं। लक्ष्य 114 का है। हम सिर्फ 6 सीटों से पीछे हैं। मुंबई के राजनीति में कुछ भी हो सकता है।" राउत के अनुसार, शिवसेना (UBT), महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS), कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों को मिलाकर यह आंकड़ा 108 तक पहुंच गया है। उद्धव ठाकरे गुट ने 65 सीटें जीतीं, जबकि राज ठाकरे की MNS को 6 सीटें मिलीं। कांग्रेस ने 24 सीटें जीतीं और अन्य छोटे दलों/स्वतंत्रों का समर्थन जोड़कर विपक्ष यह दावा कर रहा है।
राउत ने एकनाथ शिंदे पर तंज कसते हुए कहा कि शिंदे डर के मारे अपने पार्षदों को अलग-अलग होटलों में रख रहे हैं, जबकि उनके पार्षद खुले में हैं और सामान्य जीवन जी रहे हैं। उन्होंने कहा, "यह 108 बनाम 118 की लड़ाई है। हमारी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।" यह बयान महायुति में हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका पैदा कर रहा है। अगर विपक्ष किसी तरह 6 और पार्षदों का समर्थन जुटा ले, तो मेयर चुनाव में उलटफेर संभव है।
BMC चुनावों का इतिहास देखें तो ठाकरे परिवार की बादशाहत लंबे समय से चली आ रही थी। 1997 से लेकर 2017 तक शिवसेना (अविभाजित) सबसे बड़ी पार्टी रही, लेकिन 2022 में विभाजन के बाद स्थिति बदल गई। इस बार उद्धव गुट ने मराठी हृदयस्थलों जैसे दक्षिण मुंबई, वर्ली, गिरगांव में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन उपनगरीय इलाकों में भाजपा ने दबदबा बनाया। मुलुंड, घाटकोपर जैसे इलाकों में भाजपा ने क्लीन स्वीप किया।
महायुति की जीत को विकास और कामकाज पर जनता का भरोसा माना जा रहा है। देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे ने कहा कि मुंबई अब विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा। लेकिन विपक्ष का यह दावा कि "बाजी अभी पलट सकती है" राजनीतिक ड्रामा बढ़ा रहा है। अजित पवार की NCP ने अलग चुनाव लड़ा और सिर्फ 3 सीटें जीतीं, लेकिन वे महायुति का हिस्सा हैं, इसलिए उनका समर्थन महायुति के साथ ही माना जा रहा है।
BMC भारत की सबसे अमीर नगरपालिका है, जिसका बजट कई राज्यों से बड़ा है। मेयर पद न केवल प्रतिष्ठा का सवाल है, बल्कि शहर की नीतियां, परियोजनाएं और फंडिंग पर सीधा असर डालता है। अगर महायुति मजबूत रहती है, तो भाजपा पहली बार मेयर बनाएगी। लेकिन अगर हॉर्स ट्रेडिंग या कोई बड़ा 'खेल' होता है, तो उद्धव ठाकरे गुट फिर से सत्ता में आ सकता है।
संजय राउत का यह बयान मीडिया और राजनीतिक हलकों में छाया हुआ है। उन्होंने कहा, "मुंबई को अडानी की जेब में नहीं जाने देंगे।" यह इशारा विकास परियोजनाओं और बड़े निवेशकों की ओर है। दूसरी ओर, महायुति नेता इसे "खोखला दावा" बता रहे हैं और कह रहे हैं कि जनता ने स्पष्ट जनादेश दिया है।
BMC में सत्ता का यह नया दौर मुंबई के भविष्य को तय करेगा। क्या महायुति अपनी एकता बनाए रख पाएगी? या विपक्ष 6 सीटों का जादू चला देगा? आने वाले दिनों में मेयर चुनाव की तारीख और प्रक्रिया साफ होगी, लेकिन फिलहाल राजनीतिक टेंशन चरम पर है। मुंबई का 'खेल' अभी बाकी है!
Sajjadali Nayani ✍
Friday World January 20,2026