-Friday World – 21 February 2026
अमेरिका के इसराइल में राजदूत माइक हकाबी ने एक इंटरव्यू में ऐसा बयान दिया है जिसने मध्य पूर्व में तूफान मचा दिया है। उन्होंने कहा कि बाइबल के अनुसार इसराइल को मध्य पूर्व के बड़े हिस्से पर कब्जा करने का "दिव्य अधिकार" है – और अगर इसराइल "सब कुछ ले ले तो भी ठीक रहेगा"!
यह बयान शनिवार को जारी हुए टकर कार्लसन के इंटरव्यू में आया, जहां पूर्व रिपब्लिकन गवर्नर और अब अमेरिकी राजदूत हकाबी ने ओल्ड टेस्टामेंट की बुक ऑफ जेनेसिस (Genesis 15:18) का हवाला दिया। इस अध्याय में ईश्वर अब्राहम से वादा करते हैं कि उनके वंशजों को नील नदी से लेकर यूफ्रेटिस नदी तक की भूमि मिलेगी – जो आज के मिस्र, इसराइल, जॉर्डन, लेबनान, सीरिया, इराक और सऊदी अरब के हिस्सों को कवर करती है।
टकर कार्लसन ने सीधे सवाल किया: "क्या इसका मतलब है कि इसराइल को पूरे मध्य पूर्व पर अधिकार है?" हकाबी ने जवाब दिया, "अगर वे सब कुछ ले लें तो भी ठीक होगा।" उन्होंने आगे कहा कि यह भूमि "ईश्वर द्वारा अब्राहम के माध्यम से यहूदियों को दी गई है" और इसराइल को "सुरक्षा और स्थिरता" का हक है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इसराइल वर्तमान में ऐसे विस्तार की मांग नहीं कर रहा है। इस बयान पर इस्लामी दुनिया में भारी आक्रोश
- जॉर्डन ने इसे "गैर-जिम्मेदाराना, भड़काऊ और बेतुका" करार दिया। जॉर्डन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऐसे बयान क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालते हैं और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं।
- ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन (OIC) ने कड़ी निंदा की और कहा कि यह बयान "किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं" है। OIC ने इसे "चरमपंथी सोच" का प्रमाण बताया और अमेरिका से राजदूत के बयानों पर स्पष्टीकरण मांगा। -
अरब लीग** और मिस्र ने भी इसे "अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन" कहा। मिस्र के विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि ऐसे बयान क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा सकते हैं।
- फिलिस्तीनी अथॉरिटी और अन्य मुस्लिम संगठनों ने इसे "इसराइली विस्तारवाद" को बढ़ावा देने वाला बताया और अमेरिकी नीति पर सवाल उठाए।
हकाबी कौन हैं और क्यों विवाद? माइक हकाबी एक इवेंजेलिकल क्रिश्चियन और कट्टर क्रिश्चियन जियोनिस्ट हैं। वे लंबे समय से इसराइल के मजबूत समर्थक रहे हैं और ट्रंप प्रशासन में राजदूत बनने के बाद से विवादों में घिरे हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में तनाव पहले से ही चरम पर है – गाजा संकट, ईरान-अमेरिका विवाद और होर्मुज स्ट्रेट की खाड़ी पर तनाव के बीच।
हकाबी ने बाद में सफाई दी कि "यह हाइपरबोलिक स्टेटमेंट था" और इसराइल विस्तार नहीं चाहता, लेकिन उनका मूल बयान वायरल हो चुका है। टकर कार्लसन ने भी इसे "अमेरिकी हितों से ज्यादा इसराइली हितों को प्राथमिकता" बताकर सवाल उठाया।
श्विक प्रभाव और सवाल यह बयान अमेरिकी विदेश नीति पर नए सवाल खड़े कर रहा है। क्या अमेरिका अब औपचारिक रूप से "ग्रेटर इसराइल" की अवधारणा का समर्थन कर रहा है? क्या यह क्षेत्रीय शांति प्रयासों को नुकसान पहुंचाएगा? इस्लामी देशों का विरोध दिखाता है कि ऐसे बयान कितने संवेदनशील हैं – जहां धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या राजनीतिक सीमाओं से टकरा रही है।
यह घटना मध्य पूर्व की जटिल राजनीति को और उलझा रही है। डिप्लोमेसी की उम्मीद है, लेकिन ऐसे बयान युद्ध के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। दुनिया अब अमेरिकी प्रशासन से स्पष्ट रुख की प्रतीक्षा कर रही है!
Sajjadali Nayani ✍
Friday World – 21 February 2026