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Monday, 16 February 2026

हरियाणा के छायंसा गांव में 'रहस्यमयी मौतों' का सिलसिला: 15 दिनों में 12 जानें गईं, 5 स्कूली बच्चे भी शामिल—

हरियाणा के छायंसा गांव में 'रहस्यमयी मौतों' का सिलसिला: 15 दिनों में 12 जानें गईं, 5 स्कूली बच्चे भी शामिल—Friday World, 16 फरवरी 2026
दूषित पानी और हेपेटाइटिस का खतरा, गांव में दहशत का माहौल!
हरियाणा के पलवल जिले के छायंसा गांव में पिछले 15 दिनों में 12 लोगों की मौत ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। इन मौतों में 5 स्कूली बच्चे भी शामिल हैं, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल फैल गया है। गांव के लोग अब हर घर में किसी न किसी के बीमार होने की खबर सुनकर डर रहे हैं। शुरुआती लक्षण तेज बुखार, खांसी, उल्टी, बदन दर्द और कमजोरी जैसे थे, लेकिन हालत तेजी से बिगड़ गई और कई मरीजों को बचाया नहीं जा सका। स्वास्थ्य विभाग ने इसे 'रहस्यमयी बीमारी' करार देते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी है।

  ग्रामीणों के अनुसार, सब कुछ जनवरी के आखिरी हफ्ते में शुरू हुआ। पहले तीन मौतें हुईं, फिर एक-एक करके मौतों का सिलसिला चलता रहा। मरने वालों में बच्चे पायल और हुफैज, किशोरियां सारिका और हुमा, बुजुर्ग जामिला, आशिया, इंद्रवती, हसन, नासिर और युवक दिलशाद, हब्बू, शमशुद्दीन शामिल हैं। गांव मुस्लिम बहुल है और मौतें सभी उम्र वर्गों में हुई हैं—बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक। लोग कह रहे हैं कि हर घर में अब कोई न कोई बुखार या उल्टी से पीड़ित है। 

स्वास्थ्य विभाग ने गांव में तुरंत कैंप लगाया। अब तक 400 से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है और 300 से अधिक ब्लड सैंपल लिए गए हैं। प्रारंभिक जांच में कुछ मामलों में हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी की पुष्टि हुई है। चार मौतों में हेपेटाइटिस-बी पॉजिटिव पाया गया, जबकि बाकी में लिवर फेलियर या मल्टीपल ऑर्गन फेलियर जैसी जटिलताएं सामने आई हैं। हालांकि, सभी मौतों का एक ही कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। 

 सबसे बड़ी आशंका दूषित पीने के पानी पर है। गांव में लोग अलग-अलग स्रोतों से पानी लेते हैं—सरकारी सप्लाई, टैंकर और RO। कई घरों की टंकी में पानी लंबे समय से जमा रहता है। 107 पानी के सैंपल में से 23 फेल पाए गए—बैक्टीरिया की मौजूदगी और क्लोरीन की मात्रा कम होने के कारण। अधिकारियों का कहना है कि जलजनित संक्रमण (waterborne infection) से बीमारी फैलने की संभावना मजबूत है। गांव में साफ पानी की कमी और टंकी साफ न करने से संक्रमण बढ़ रहा है। 

 स्वास्थ्य विभाग ने कई मेडिकल टीमें तैनात कर दी हैं। गंभीर मरीजों को पलवल और फरीदाबाद के अस्पतालों में भर्ती किया जा रहा है। ग्रामीणों को उबला हुआ पानी पीने, हाथ धोने और साफ-सफाई रखने की सलाह दी गई है। जांच रिपोर्ट आने तक गांव में अलर्ट जारी है। कुछ लोग अंधविश्वास में झाड़-फूंक का सहारा ले रहे हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि वैज्ञानिक जांच ही सच्चाई सामने लाएगी। 

 यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि ग्रामीण भारत में साफ पीने के पानी की समस्या कितनी गंभीर है। गुजरात, राजस्थान, बिहार जैसे राज्यों में भी ऐसी घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन यहां मौतों की संख्या और तेजी ने सबको चौंकाया है। मुख्यधारा के मीडिया में इस खबर को कम कवरेज मिल रहा है, लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियो और पोस्ट वायरल हो रहे हैं। जैसे ही खबर फैली, कुछ चैनल 'बचाव' में उतर पड़े—कह रहे हैं कि 'सिर्फ 7 मौतें कन्फर्म हैं' या 'हेपेटाइटिस पुराना है'—लेकिन ग्रामीणों का दर्द और डर असली है। 

क्या यह सिर्फ एक गांव की त्रासदी है या बड़े पैमाने पर जल संकट और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी का संकेत? स्वास्थ्य विभाग ने जांच तेज कर दी है, लेकिन समय रहते अगर सही कदम नहीं उठाए गए तो मौतों का सिलसिला और बढ़ सकता है। छायंसा के लोग अब सिर्फ एक सवाल पूछ रहे हैं—हमारा पानी सुरक्षित कब होगा? 

फिलहाल गांव में सन्नाटा पसरा है। श्मशान घाट पर मातम है, घरों में रोना है और सड़कों पर डर। यह सिर्फ 12 मौतों की खबर नहीं—यह ग्रामीण भारत की उस हकीकत की कहानी है जहां बुनियादी सुविधाएं जिंदगी छीन रही हैं। समय है कि सरकार और समाज मिलकर इस 'रहस्यमयी मौतों' के पीछे की सच्चाई को उजागर करें और भविष्य में ऐसी त्रासदी रोकें। 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World, 16 फरवरी 2026