नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार को कड़ी चुनौती दी है। अमेरिका के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते (India-US Interim Trade Deal) पर तीखे हमले के बाद, जब संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने उनके खिलाफ कार्रवाई की बात कही, तो राहुल गांधी ने खुले मंच से जवाब दिया – "FIR करो, केस दर्ज करो या विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाओ, मैं किसानों के लिए लड़ता रहूंगा। कोई भी व्यापार समझौता जो किसानों की रोजगारी छीने या देश की अन्न सुरक्षा को कमजोर करे, वह किसान-विरोधी है। मोदी सरकार को अन्नदाताओं के हितों से समझौता नहीं करने देंगे।"
यह विवाद तब भड़का जब राहुल गांधी ने लोकसभा में बजट चर्चा के दौरान अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को "पूर्ण समर्पण" करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने किसानों, ऊर्जा सुरक्षा और डेटा संप्रभुता को अमेरिकी दबाव में बेच दिया है। राहुल ने कहा, "भारत माता को बेच दिया गया है, क्या शर्म नहीं आती? अमेरिकी टैरिफ 3% से बढ़कर 18% हो गए, जबकि भारत ने अपना टैरिफ शून्य कर दिया। अमेरिकी आयात 46 बिलियन डॉलर से बढ़कर 146 बिलियन डॉलर हो जाएगा। यह किसानों पर हमला है, छोटे-मझोले किसानों की कमर तोड़ने की साजिश है।"
रिजिजू की चेतावनी और दुबे का प्रस्ताव
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल के भाषण को "गृह को गुमराह करने" वाला बताते हुए कहा था कि सरकार उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन (Breach of Privilege) का प्रस्ताव ला रही है, क्योंकि उन्होंने बिना आधार के गंभीर आरोप लगाए। रिजिजू ने कहा, "राहुल गांधी निराधार दावे कर रहे हैं, सदन की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं।" वहीं, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने और कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने लोकसभा में "सब्सटेंसिव मोशन" (Substantive Motion) का नोटिस दिया, जिसमें राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द करने और उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित करने की मांग की गई। दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल विदेशी ताकतों (जैसे सोरोस फाउंडेशन, फोर्ड फाउंडेशन, USAID) से जुड़े हैं और "भारत-विरोधी तत्वों" के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
हालांकि, बाद में सरकार ने अपना प्रस्ताव वापस ले लिया। रिजिजु ने स्पष्ट किया कि निजी सदस्य (दुबे) ने पहले ही मोशन का नोटिस दे दिया है, इसलिए सरकार अपना अलग प्रस्ताव नहीं लाएगी। अब स्पीकर ओम बिरला से चर्चा के बाद तय होगा कि इसे विशेषाधिकार समिति, आचार समिति या सीधे सदन में चर्चा के लिए भेजा जाए।
राहुल का पलटवार: "मैं पीछे नहीं हटूंगा"
गुरुवार शाम को राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो पोस्ट कर जवाब दिया। उन्होंने कहा, "मोदी सरकार किसान-विरोधी है। पहले तीन काले कृषि कानून लाए, अब अमेरिकी दबाव में कृषि क्षेत्र खोल दिया। किसानों की मेहनत अमेरिकी कंपनियों को सौंप दी। मैं सच बोल रहा हूं, देश जानता है। FIR हो, मुकदमा हो या विशेषाधिकार प्रस्ताव लाओ – मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं और पूरी कांग्रेस किसानों के साथ खड़ी है। एक इंच भी पीछे नहीं हटूंगा।"
राहुल ने तीन बड़े संदेश भी दिए – अमेरिका से बात बराबरी की होनी चाहिए, ऊर्जा सुरक्षा और किसानों के हित अटल रहेंगे। उन्होंने कहा, "ट्रंप से बात करते समय हम कहते कि हम सेवक नहीं, बराबर हैं। पाकिस्तान जैसा दर्जा नहीं देंगे।"
किसानों के हित में कांग्रेस की लड़ाई
यह विवाद भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के संदर्भ में और गहरा गया है। राहुल गांधी का दावा है कि समझौते से भारतीय किसान, विशेषकर छोटे और सीमांत, खतरे में हैं। डेयरी, कृषि उत्पादों पर विदेशी प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होगी। कांग्रेस ने इसे "किसान विरोधी" करार दिया और कहा कि सरकार ने अमेरिकी चुनावी दबाव में राष्ट्रीय हितों से समझौता किया।
दूसरी ओर, सरकार और भाजपा इसे राष्ट्रीय हित में बताती है। लेकिन राहुल की चुनौती ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। संसद में हंगामा, विपक्ष की एकजुटता और किसान संगठनों की संभावित आंदोलन की तैयारी से यह मुद्दा और तेज हो सकता है।
राहुल गांधी की यह बेबाकी उनकी छवि को मजबूत करने वाली साबित हो सकती है। वे कहते हैं, "सच बोलने की कीमत चुकानी पड़े तो भी किसानों के साथ हूं।" आने वाले दिनों में देखना होगा कि स्पीकर का फैसला क्या होता है और यह विवाद कहां तक पहुंचता है। लेकिन एक बात साफ है – राहुल गांधी किसानों के मुद्दे पर पीछे नहीं हटने वाले।
Sajjadali Nayani ✍
Friday world 13th Feb 2026