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Monday, 23 February 2026

IDFC फर्स्ट बैंक में ₹590 करोड़ का भयंकर घोटाला: शेयर 20% टूटे, निवेशकों में हड़कंप, बैंक ने 4 अधिकारियों को सस्पेंड किया

IDFC फर्स्ट बैंक में ₹590 करोड़ का भयंकर घोटाला: शेयर 20% टूटे, निवेशकों में हड़कंप, बैंक ने 4 अधिकारियों को सस्पेंड किया
-Friday World 23 February 2026
नई दिल्ली/मुंबई, 23 फरवरी 2026: शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुआत तेजी के साथ हुई, सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार उछाल देखा गया, लेकिन IDFC फर्स्ट बैंक के निवेशकों के लिए यह दिन काला साबित हुआ। बैंक की चंडीगढ़ शाखा में हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में करीब ₹590 करोड़ का संभावित घोटाला सामने आने के बाद बैंक का शेयर सोमवार को 20% तक गिरकर लोअर सर्किट पर पहुंच गया। निवेशकों की करीब ₹14,000 करोड़ की संपत्ति एक झटके में स्वाहा हो गई, जबकि बैंक का मार्केट कैप घटकर लगभग ₹50,000 करोड़ के आसपास आ गया। 

घोटाले का खुलासा कैसे हुआ? यह पूरा मामला तब सामने आया जब हरियाणा सरकार की कुछ संस्थाओं ने अपने खातों में बैलेंस की जांच की। 18 फरवरी 2026 को हरियाणा सरकार ने एक सर्कुलर जारी कर IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी कामकाज से डी-एम्पैनल कर दिया था। विभागों को निर्देश दिए गए कि वे इन बैंकों में जमा सरकारी फंड्स को तुरंत ट्रांसफर या खाते बंद करें। इसी दौरान खातों के वास्तविक बैलेंस और रिकॉर्ड में दिखाए गए बैलेंस के बीच बड़ा अंतर सामने आया। 

बैंक की जांच में पता चला कि चंडीगढ़ शाखा के कुछ कर्मचारियों ने बाहरी व्यक्तियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी लेन-देन किए। मुख्य रूप से फर्जी फिजिकल चेक के जरिए अनधिकृत ट्रांसफर किए गए, जिससे हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में ₹590 करोड़ (लगभग ₹490 करोड़ की रिकॉन्सिलिएशन से + ₹100 करोड़ आंतरिक जांच से) की गड़बड़ी हुई। बैंक ने इसे 'लोकलाइज्ड इश्यू' बताया है, यानी यह केवल एक शाखा और कुछ खातों तक सीमित है, पूरे बैंक में नहीं फैला।

 बैंक की त्वरित कार्रवाई घोटाले के खुलासे के तुरंत बाद IDFC फर्स्ट बैंक ने सख्त कदम उठाए: - चार संदिग्ध अधिकारियों को तत्काल सस्पेंड कर दिया गया। 

- पुलिस में शिकायत दर्ज की गई।

 - स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट के लिए KPMG को नियुक्त किया गया, जिसकी रिपोर्ट 4-5 हफ्तों में आने की उम्मीद है।

 - अनुशासनात्मक, सिविल और क्रिमिनल कार्रवाई की जाएगी, जिसमें बाहरी शामिल लोगों पर भी सख्ती बरती जाएगी। 

बैंक के एमडी और सीईओ वी. वैद्यनाथन ने कहा कि यह बैंक के 10 साल के इतिहास में पहला बड़ा ऑपरेशनल झटका है। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि बैंक की गवर्नेंस मजबूत है, कैपिटल पर्याप्त है और बड़े निवेशक जैसे Warburg Pincus साथ हैं। अंतिम नुकसान रिकवरी, इंश्योरेंस और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। 

बाजार पर असर और विशेषज्ञों की राय सोमवार को बैंक का शेयर पिछले बंद भाव ₹83.51 से टूटकर ₹75.16 पर खुला और फिर ₹66.80 तक गिर गया। यह छह साल का सबसे बुरा सेशन रहा। ब्रोकरेज फर्मों का अनुमान है: 

- FY26 के प्री-टैक्स प्रॉफिट पर 20% तक असर। 

- पोस्ट-टैक्स प्रॉफिट का 22% तक प्रभाव। 

- नेटवर्थ पर सिर्फ 0.9-1% का असर, इसलिए सॉल्वेंसी पर कोई बड़ा खतरा नहीं।

 आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि इस घटना से बैंकिंग सिस्टम में कोई सिस्टेमिक रिस्क नहीं है। फिर भी, यह घटना बैंकिंग सेक्टर में इंटरनल कंट्रोल्स और गवर्नेंस की कमजोरियों पर सवाल उठा रही है। 

 क्या सीख मिलेगी? यह घोटाला एक बार फिर साबित करता है कि सरकारी खातों की निगरानी कितनी जरूरी है। हरियाणा सरकार ने तुरंत दोनों बैंकों को डी-एम्पैनल कर खाते बंद करने के आदेश दिए, जबकि कांग्रेस ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। IDFC फर्स्ट बैंक अब अपने सिस्टम्स को और मजबूत करने का वादा कर रहा है।

 निवेशकों के लिए सबक साफ है – बाजार की तेजी में भी किसी भी कंपनी के फंडामेंटल्स पर नजर रखनी चाहिए। यह घटना बैंकिंग सेक्टर की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है, लेकिन बैंक का त्वरित रिस्पॉन्स और लोकलाइज्ड नेचर से उम्मीद है कि असर सीमित रहेगा। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 23 February 2026