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Tuesday, 17 March 2026

15 मई 2026 को देशव्यापी हड़ताल: मनरेगा मजदूरों का बड़ा ऐलान – VB-G RAM G कानून वापस लो, पुरानी गारंटी बहाल करो!

15 मई 2026 को देशव्यापी हड़ताल: मनरेगा मजदूरों का बड़ा ऐलान – VB-G RAM G कानून वापस लो, पुरानी गारंटी बहाल करो!
-Friday World – March 18, 2026
ग्रामीण भारत में उबाल! मजदूर संगठनों ने 15 मई को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया
 – नया VB-G RAM G कानून मनरेगा की आत्मा को कुचल रहा है, 200 दिन रोजगार और ₹700 मजदूरी की मांग तेज 

दिल्ली के ऐतिहासिक कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जहां सांसदों, अर्थशास्त्रियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और हजारों मनरेगा मजदूरों ने एकजुट होकर 15 मई 2026 को बड़े पैमाने पर हड़ताल का ऐलान किया। यह हड़ताल सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की आजीविका और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है। संयुक्त मंच (कृषि-ग्रामीण श्रमिक संघों और नरेगा संघर्ष मोर्चा से जुड़े संगठनों का गठबंधन) ने राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर पर आंदोलन तेज करने का संकल्प लिया है। 

मनरेगा का 'अंत' और नया कानून: VB-G RAM G क्या है?

दिसंबर 2025 में संसद में पेश और पारित हुआ Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Aajeevika Mission (Gramin) (VB-G RAM G) Act, 2025 ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA, 2005) को पूरी तरह बदल दिया है। सरकार इसे "विकसित भारत @2047" की दृष्टि से जोड़कर पेश करती है, जिसमें रोजगार की गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिनों की गई है। लेकिन मजदूर संगठन इसे "गारंटी का अंत" मानते हैं। पुरानी MGNREGA एक डिमांड-ड्रिवन, राइट-बेस्ड कानून थी 
– जहां ग्रामीण परिवार को काम मांगने पर 100 दिन का रोजगार मिलता था, और काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता। लेकिन VB-G RAM G में फंड कैप्ड (बजट-सीमित) है, सप्लाई-ड्रिवन मॉडल है, और काम मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर, वॉटर सिक्योरिटी, लाइवलीहुड प्रोजेक्ट्स पर फोकस्ड है। बजट 2026 में VB-G RAM G के लिए ₹95,692 करोड़ आवंटित किया गया, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि 125 दिन की गारंटी के लिए ₹2.3 लाख करोड़ चाहिए – यानी वास्तविक कवरेज सिर्फ 50-60 दिनों तक सीमित रह सकती है। 

मजदूरों की प्रमुख मांगें
 – क्यों है इतना गुस्सा? संयुक्त मंच ने अपनी बैठक में स्पष्ट किया कि VB-G RAM G कानून ग्रामीण लोकतंत्र और मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करता है। मुख्य मांगें:

 → VB-G RAM G कानून को तुरंत वापस लिया जाए और पुरानी MGNREGA बहाल की जाए। 

→ हर ग्रामीण परिवार को कम से कम 200 दिन का रोजगार मिले, न कि सिर्फ 125 दिन। 

→ न्यूनतम मजदूरी ₹700 प्रति दिन हो, जो हर साल महंगाई के अनुसार बढ़ाई जाए (वर्तमान में औसत ₹220-300 है)। 

→ आधार-बायोमेट्रिक, मोबाइल मॉनिटरिंग जैसी तकनीकी प्रणालियां हटाई जाएं – क्योंकि ये सिस्टम ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट/बायोमेट्रिक फेलियर से मजदूरों को काम से बाहर कर देते हैं, भुगतान में देरी होती है। 

→ ग्राम सभाओं की भूमिका बहाल और मजबूत की जाए 
– योजना बनाने, लागू करने और निगरानी में ग्राम सभा मुख्य भागीदार बने, न कि केंद्रीकृत डिजिटल सिस्टम। 

राजस्थान और पंजाब से आए मजदूरों ने कहा, "नया कानून राज्यों, पंचायतों और ग्राम सभाओं की शक्ति छीनता है। MGNREGA की लोकतांत्रिक, भागीदारी वाली प्रकृति खत्म हो रही है। तकनीक के नाम पर मजदूरों को बाहर किया जा रहा है।" 

बैठक में कौन-कौन शामिल? यह बैठक संयुक्त मंच ने बुलाई थी, जिसमें इंडियन नेशनल कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया, राष्ट्रीय जनता दल, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और भारत आदिवासी पार्टी के सांसद मौजूद थे। अर्थशास्त्री और सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हुए, जिन्होंने कानून के बजट-कैप्ड मॉडल और इंफ्रास्ट्रक्चर फोकस को "मजदूर-विरोधी" बताया। 

ग्रामीण भारत पर असर – क्यों जरूरी है हड़ताल? MGNREGA 2005 से ग्रामीण गरीबी कम करने, प्रवास रोकने और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में अहम भूमिका निभाई है। लाखों परिवारों के लिए यह एकमात्र सुरक्षा जाल है। लेकिन नया कानून आने के बाद:

 - काम की गारंटी बजट पर निर्भर हो गई है, डिमांड पर नहीं। 

- पीक एग्रीकल्चर सीजन में काम रोकने का प्रावधान है। 

- डिजिटल मॉनिटरिंग से भुगतान में देरी और वर्कर एक्सक्लूजन बढ़ा है।

 - ग्राम सभाओं की पावर कम हो रही है, केंद्रीकरण बढ़ रहा है।

 मजदूर संगठन कहते हैं कि यह "विकसित भारत" का नाम लेकर ग्रामीण गरीबों की आजीविका छीनने की साजिश है। 15 मई की हड़ताल के साथ आंदोलन और तेज होगा 
– रैलियां, धरने, ग्राम सभा रेजोल्यूशन और कानूनी लड़ाई। 

सरकार का पक्ष और विवाद सरकार का दावा है कि VB-G RAM G MGNREGA से बेहतर है – 125 दिन गारंटी, बेहतर कन्वर्जेंस, डिजिटल गवर्नेंस और Viksit Bharat 2047 से जुड़ा। लेकिन आलोचक कहते हैं कि फंडिंग कम है, अधिकार कमजोर हैं, और यह मजदूरों की बजाय इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता देता है। 

आगे क्या? 15 मई 2026 ग्रामीण भारत के लिए निर्णायक दिन होगा। अगर हड़ताल सफल हुई, तो सरकार पर दबाव बढ़ेगा। मजदूर संगठन कहते हैं, "हम लड़ेंगे तब तक जब तक MGNREGA की मूल भावना बहाल नहीं होती।" यह आंदोलन सिर्फ रोजगार का नहीं, ग्रामीण लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों का भी है।

 ग्रामीण भारत की आवाज अब दब नहीं सकती – 15 मई को सड़कें गूंजेंगी: "मनरेगा वापस लाओ, VB-G RAM G हटाओ!" 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World – March 18, 2026