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Tuesday, 17 March 2026

सोनम वांगचुक की रिहाई के बाद बड़ा खुलासा: "जेल में था तो मेरी पत्नी का दिल्ली की सड़कों पर पीछा किया गया" – NSA के दुरुपयोग पर सवाल,

सोनम वांगचुक की रिहाई के बाद बड़ा खुलासा: "जेल में था तो मेरी पत्नी का दिल्ली की सड़कों पर पीछा किया गया" – NSA के दुरुपयोग पर सवाल,
-Friday World – March 18, 2026 
         लद्दाख मुद्दे पर अब बातचीत की उम्मीद

 जेल से आजाद सोनम वांगचुक का पहला बयान – "मैं सिर्फ अपनी जीत नहीं, लद्दाख और हिमालय की जीत चाहता हूं" – पत्नी गीतांजलि का पीछा, एनएसए का 'फिल्मी' इस्तेमाल, अब सरकार ने हाथ बढ़ाया तो डायलॉग शुरू! 

लद्दाख के मशहूर पर्यावरणविद्, शिक्षा सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 14 मार्च 2026 को जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहा होने के बाद दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। लगभग 170 दिनों (सितंबर 2025 से) की नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) हिरासत के बाद उनकी रिहाई ने पूरे देश में सुर्खियां बटोरीं। लेकिन रिहाई के साथ ही उन्होंने एक चौंकाने वाला खुलासा किया – उनकी पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो का दिल्ली में कोर्ट जाने के दौरान गाड़ियों और मोटरसाइकिलों से पीछा किया गया। 

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सोनम वांगचुक ने कहा, "मुझे परिवार या वकीलों से बात करने का मौका दिए बिना अचानक घर से उठाकर जेल में डाल दिया गया। भारी सुरक्षा के बीच मेरी पत्नी पत्रकारों से भी नहीं मिल पाईं। फिर वो कोर्ट का दरवाजा खटखटाने दिल्ली आईं और दो-तीन हफ्तों तक दिल्ली की सड़कों पर उनका गाड़ियों और मोटरसाइकिलों से पीछा किया गया। ये सब किसी फिल्म जैसा था।" 

यह बयान NSA जैसे सख्त कानून के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े करता है। वांगचुक ने आगे कहा, "अगर कोर्ट भी इस मामले में फैसला दर्ज करता है, तो भविष्य में अफसरों और नीति-निर्माताओं को ये सीख मिलेगी कि एनएसए जैसे कानूनों का इस्तेमाल कैसे करना है और खासकर कैसे नहीं करना है।" 

रिहाई की पृष्ठभूमि: लद्दाख आंदोलन और NSA का इस्तेमाल
 सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को लेह के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई 24 सितंबर 2025 को लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद हुई, जहां लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की **छठी अनुसूची** के तहत संरक्षण देने की मांग पर पुलिस फायरिंग में चार लोगों की मौत हो गई थी। केंद्र सरकार ने इन प्रदर्शनों को "सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा" बताया और वांगचुक को "उकसाने" का आरोप लगाया। 
NSA के तहत अधिकतम 12 महीने की हिरासत संभव है, लेकिन वांगचुक ने लगभग आधा समय (170 दिन) जेल में बिताया। उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की थी, जिसमें हिरासत को "मनमाना और असंवैधानिक" बताया गया। केंद्र ने 14 मार्च 2026 को NSA हटाने का फैसला लिया, जिसके बाद उन्हें जोधपुर जेल से रिहा कर दिया गया। गृह मंत्रालय ने कहा कि यह कदम "शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास" बनाने के लिए उठाया गया है ताकि लद्दाख में सभी पक्षों से "सार्थक संवाद" शुरू हो सके। 

प्रेस कॉन्फ्रेंस में वांगचुक का संदेश: जीत सिर्फ मेरी नहीं, लद्दाख की होनी चाहिए रिहाई के बाद अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में वांगचुक ने भावुक होकर कहा, "मैं थोड़ा लालची इंसान हूं। सिर्फ जीत मेरे लिए काफी नहीं थी। अगर सिर्फ सोनम वांगचुक जीतता है तो क्या ही फायदा, जब तक लद्दाख, हिमालय और जिन मुद्दों के लिए मैं खड़ा हूं वो न जीतें। इसलिए हम मुद्दों की जीत चाहते थे।"

 उन्होंने केंद्र सरकार के हाथ बढ़ाने का स्वागत किया: "अब सरकार ने भरोसा बनाने और सार्थक बातचीत शुरू करने के लिए हाथ बढ़ाया है, ये बहुत अच्छी बात है। इससे लद्दाख भी जीतेगा और हमारा मुद्दा भी जीतेगा।" 

वांगचुक ने जोर दिया कि लद्दाख के लोग सिर्फ बातचीत चाहते थे। उन्होंने कहा, "हमने विरोध, दिल्ली तक पैदल मार्च, अनशन – सब किया। सामान्यतः लोग बातचीत छोड़कर बंदूक उठा लेते हैं, लेकिन यहां लोग शांतिपूर्ण रहे। सरकार अब डायलॉग के लिए तैयार है, यह जीत-जीत की स्थिति है।" 

पत्नी गीतांजलि का संघर्ष और परिवार पर असर गीतांजलि अंगमो ने रिहाई के बाद X पर पोस्ट किया कि आखिरकार उन्हें पति से "फ्री-फ्लोइंग चैट" करने का मौका मिला, बिना जेल की घड़ी देखे। उन्होंने बताया कि पिछले पांच महीनों में वे हर हफ्ते दो बार जोधपुर जेल जाती थीं, सिर्फ एक घंटे की मुलाकात के लिए। रिहाई के बाद वांगचुक को मेडिकल चेकअप के लिए अस्पताल ले जाया गया। 

वांगचुक ने अपनी हिरासत को "ह्यूज हॉरर स्टोरी" बताया और कहा कि वे 12 महीने जेल में रहने के लिए तैयार थे, लेकिन अब बाहर आकर "सच्चाई" बताना चाहते थे – खासकर पत्नी के साथ हुए व्यवहार के बारे में। 

लद्दाख मुद्दे का भविष्य: डायलॉग या फिर आंदोलन? लद्दाख के लोग राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची संरक्षण, जमीन-नौकरी पर अधिकार और पर्यावरण सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। वांगचुक की रिहाई से पहले लेह और कारगिल में सिविल सोसाइटी ने विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई थी। अब केंद्र ने डायलॉग का रास्ता खोला है, लेकिन वांगचुक ने साफ कहा कि "लचीलापन" दोनों तरफ से चाहिए। 

यह घटना NSA जैसे कानूनों के दुरुपयोग पर बहस छेड़ रही है। कई संगठन और कार्यकर्ता इसे "अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला" बता रहे हैं। वांगचुक की रिहाई से उम्मीद है कि लद्दाख में शांति बहाल होगी और हिमालय की रक्षा के मुद्दे पर सार्थक चर्चा होगी।

 सोनम वांगचुक का संघर्ष सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे हिमालय और ग्रामीण भारत की आवाज है। उनकी रिहाई एक नई शुरुआत हो सकती है – जहां बातचीत से समस्याओं का हल निकले, न कि हिरासत से।

 Sajjadali Nayani ✍
 Friday World – March 18, 2026