मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध ने वैश्विक शिपिंग को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। जहां एक ओर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के 20% से ज्यादा तेल और गैस का मुख्य रास्ता है, वहीं ईरान ने अब इस चोकपॉइंट पर अपना 'सुरक्षित कॉरिडोर' बना लिया है। लॉयड्स लिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने कम से कम एक प्राइवेट ऑयल टैंकर कंपनी से सुरक्षित गुजरने के बदले करीब 20 लाख डॉलर (लगभग 18 करोड़ रुपये) वसूल लिए हैं। यह राशि एक तरह का 'टोल टैक्स' या 'सुरक्षा शुल्क' है, जिसके बदले जहाजों को ईरानी जलक्षेत्र से होकर सुरक्षित रास्ता दिया जा रहा है। हालांकि, यह व्यवस्था अभी भी केस-बाय-केस आधार पर चल रही है और पूरी तरह फॉर्मलाइज्ड नहीं हुई है।
ईरान का 'सुरक्षित मार्ग' क्या है? युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पर सख्ती बरती है। अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगी देशों से जुड़े जहाजों को पूरी तरह रोक दिया गया है। लेकिन ईरान ने अपने क्षेत्रीय जल में एक 'सुरक्षित कॉरिडोर' बनाया है, जो लारक द्वीप के पास से गुजरता है। यहां ईरानी इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) और पोर्ट अथॉरिटी जहाजों की विजुअल जांच करती है। जहाजों को पहले रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है, जिसमें मालिकाना हक, कार्गो की डिटेल्स और अन्य जानकारी दी जाती है।
इस कॉरिडोर का इस्तेमाल करने वाले जहाजों को IRGC की निगरानी में सुरक्षा मिलती है। अब तक कम से कम 9 जहाज इस रास्ते से गुजर चुके हैं। लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार, केवल एक टैंकर ने ही स्पष्ट रूप से 20 लाख डॉलर का भुगतान किया है। बाकी मामलों में डिप्लोमैटिक हस्तक्षेप या वेटिंग के जरिए पास हुआ है। ईरान ने जल्द ही एक फॉर्मलाइज्ड रजिस्ट्रेशन सिस्टम शुरू करने की तैयारी की है, जहां इंटरमीडियरीज के जरिए आवेदन और पेमेंट होगा।
भारत के जहाजों की मुश्किलें: 22 जहाज फंसे, 611 नाविक खतरे में भारत के लिए यह स्थिति बेहद गंभीर है। विदेश मंत्रालय और शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास कम से कम 22 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें 611 भारतीय नाविक सवार हैं। इनमें क्रूड ऑयल टैंकर, एलपीजी कैरियर और एलएनजी जहाज शामिल हैं। कुछ जहाज दो हफ्तों से ज्यादा समय से फंसे हैं।
भारत सरकार ने ईरान के साथ बातचीत शुरू की है। कुछ जहाजों को पासेज मिल चुका है, जैसे दो एलपीजी टैंकर 'नंदा देवी' और 'शिवालिक' मार्च 13 के आसपास गुजर चुके हैं। लेकिन बाकी जहाजों को अभी इंतजार है। सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने भारत से फरवरी में जब्त किए गए तीन ईरानी टैंकरों को रिलीज करने की मांग की है, ताकि भारतीय जहाजों को पासेज मिल सके। हालांकि, भारत ने इसे 'एक्सचेंज' नहीं माना और बातचीत जारी रखी है।
सरकार ने सभी जहाजों को 'स्टे पुट' (रुकने) का निर्देश दिया है, क्योंकि स्थिति और बिगड़ सकती है। भारतीय नौसेना IRGC से संपर्क में है और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है। लेकिन लंबे इंतजार से जहाजों में सप्लाई कम हो रही है, और नाविकों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है।
वैश्विक प्रभाव: तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं यह 'सुरक्षित कॉरिडोर' और फीस की व्यवस्था वैश्विक शिपिंग के लिए एक नया संकट है। होर्मुज स्ट्रेट से रोजाना करीब 20-21 मिलियन बैरल तेल गुजरता है। युद्ध के बाद ट्रांसिट 80-90% तक गिर गया है। मार्च 1 से 15 तक सिर्फ 89 जहाज गुजरे, जिसमें 16 ऑयल टैंकर थे। पहले यह संख्या 100-135 प्रति दिन थी।
इससे फ्रेट रेट्स दोगुने-तिगुने हो गए हैं, इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़े हैं, और तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। भारत जैसे आयातक देशों पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। अगर यह व्यवस्था जारी रही तो छोटे-मध्यम शिपिंग कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी। ईरान का दावा है कि यह कॉरिडोर 'सुरक्षा' के लिए है, लेकिन विशेषज्ञ इसे 'टोल बूथ' या ब्लैकमेल जैसा मान रहे हैं। लॉयड्स लिस्ट ने चेतावनी दी है कि 'सुरक्षित' का मतलब गारंटी नहीं है, और जोखिम अभी भी बना हुआ है।
डिप्लोमेसी और वैकल्पिक रास्ते भारत, चीन, पाकिस्तान, इराक और मलेशिया जैसे देश ईरान से सीधे बात कर रहे हैं। इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) ने भी 'सेफ्टी कॉरिडोर' का प्रस्ताव दिया है, लेकिन ईरान की मर्जी के बिना लागू करना मुश्किल है। भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन फिलहाल डिप्लोमेसी ही एकमात्र रास्ता है।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि भू-राजनीतिक तनाव कितनी तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं। ईरान का यह 'पेड कॉरिडोर' न सिर्फ शिपिंग के लिए चुनौती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून और फ्री नेविगेशन के सिद्धांतों पर भी सवाल उठाता है। आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं, लेकिन फिलहाल जहाज फंसे हैं, नाविक इंतजार कर रहे हैं, और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 20,2026