"ट्रंप का ईरान दांव: जब 93% अमेरिकी 'नो वॉर' चिल्ला रहे हैं, जमीनी सैनिक उतारना विद्रोह की चिंगारी बन सकता है—इज़राइल में भी नेतन्याहू-ट्रंप के खिलाफ सड़कें उबल रही हैं!"
मार्च 2026 का महीना इतिहास के पन्नों में दर्ज होने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ हवाई हमलों से शुरू की जंग को अब जमीनी स्तर पर ले जाने की तैयारी दिखाई है। लेकिन घरेलू मोर्चे पर स्थिति विस्फोटक है। नवीनतम पोल्स (मार्च 2026 के मध्य तक) बताते हैं कि ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग औसतन 27-33% के बीच घूम रही है, जबकि डिसअप्रूवल 76-80% तक पहुंच चुकी है। कई सर्वे में यह स्पष्ट है कि ईरान युद्ध के कारण उनका सपोर्ट बेस टूट रहा है—खासकर इंडिपेंडेंट्स और कुछ रिपब्लिकन्स में।
एक रॉयटर्स सर्वे (मार्च 2026) में साफ कहा गया कि अगर ट्रंप ईरान में बड़े पैमाने पर ग्राउंड ट्रूप्स (जमीनी सेना) उतारते हैं, तो सिर्फ 7% अमेरिकी इसका समर्थन करेंगे। 95% से ज्यादा लोग किसी भी तरह की ग्राउंड इन्वॉल्वमेंट का विरोध कर रहे हैं, और 65% मानते हैं कि ट्रंप आखिरकार ऐसा कदम उठाएंगे। यह आंकड़ा चिंताजनक है—क्योंकि इतिहास गवाह है कि जब राष्ट्रपति की पॉपुलैरिटी पहले से कमजोर हो और युद्ध लंबा खिंचे, तो घरेलू विरोध विद्रोह जैसी शक्ल ले लेता है।
अमेरिका में ट्रंप विरोध की लहर: 93% का 'नो ट्रस्ट' ट्रंप के ईरान युद्ध पर पब्लिक ओपिनियन लगभग एकतरफा है।
- रॉयटर्स/इप्सोस पोल (मार्च 2026): सिर्फ 27% ने शुरुआती स्ट्राइक्स को अप्रूव किया, 73% ने डिसअप्रूव किया। 86% अमेरिकी मानते हैं कि ट्रंप मिलिट्री फोर्स का इस्तेमाल करने के लिए बहुत उतावले हैं।
- क्विनिपियाक पोल: 73% रजिस्टर्ड वोटर्स ईरान में मिलिट्री एक्शन का विरोध कर रहे हैं, सिर्फ 30% सपोर्ट।
- एनपीआर/पीबीएस/मैरिस्ट पोल: 73% मिलिट्री एक्शन के खिलाफ, सिर्फ 36% ट्रंप के हैंडलिंग को अप्रूव करते हैं। 77% चिंतित हैं कि अमेरिका लंबे युद्ध में फंस जाएगा।
- इकोनॉमिस्ट/यूगॉव: इंडिपेंडेंट्स में ट्रंप का ईरान हैंडलिंग नेट अप्रूवल -39 तक गिर गया—यानी 63% डिसअप्रूव।
- कुल मिलाकर: अधिकांश पोल्स में ईरान युद्ध का ओवरऑल सपोर्ट 26-32% के बीच है, जबकि विरोध 70-80%। अगर जमीनी सैनिक उतारे गए, तो यह विरोध और भड़क सकता है—क्योंकि अमेरिकी जनता वियतनाम, इराक जैसे युद्धों से सबक ले चुकी है। कैजुअल्टीज, ऊंची तेल कीमतें, और इकोनॉमिक स्ट्रेस से जनता सड़कों पर उतर सकती है।
ट्रंप का कोर बेस (MAGA रिपब्लिकन्स) अभी खिलाफ है—कई पोल्स में 20-30% उनका सपोर्ट दिखता है—लेकिन नॉन-मेगा रिपब्लिकन्स और इंडिपेंडेंट्स में सपोर्ट गिर रहा है। अगर जमीनी हमला हुआ, तो यह बेस भी टूट सकता है, क्योंकि अमेरिकी जनता "अमेरिका फर्स्ट" के नाम पर अनंत युद्ध नहीं चाहती।
इज़राइल में नेतन्याहू-ट्रंप के खिलाफ उबाल: सड़कें गर्म, जनता विद्रोह पर
दूसरी तरफ, इज़राइल में स्थिति और भी गंभीर है। बेंजामिन नेतन्याहू और ट्रंप की जोड़ी ने ईरान पर हमले को "रेजीम चेंज" का लक्ष्य बनाया, लेकिन घरेलू स्तर पर दोनों की पॉपुलैरिटी धराशायी है।
- मार्च 2026 में इज़राइल में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं—हजारों लोग सड़कों पर उतरकर नेतन्याहू के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। ईरान युद्ध के कारण इज़राइल की इकोनॉमी प्रभावित हो रही है, और जनता "ट्रंप-नेतन्याहू की जंग" को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मान रही है।
- रिपोर्ट्स बताती हैं कि नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा था कि इज़राइल "अकेले" साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया, लेकिन ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से इसे नकार दिया। इससे दोनों के बीच दरार साफ दिख रही है।
- इज़राइल में विरोध इतना तेज है कि अगले कुछ दिनों में जनता दोनों नेताओं के लोकेशन (रेजिडेंस या ऑफिस) को सोशल मीडिया पर लाइव शेयर कर विरोध को और तेज कर सकती है। पहले से ही "ट्रंप-नेतन्याहू जलाओ" जैसे प्रतीकात्मक प्रोटेस्ट ईरान में हो रहे हैं, लेकिन इज़राइल में भी जनता "नो मोर वॉर" चिल्ला रही है।
क्या होगा अगर ट्रंप जमीनी सेना उतारते हैं? कल्पना कीजिए: 13,000 मरीन्स या ज्यादा सैनिक ईरान की जमीन पर उतरते हैं। ईरान की असिमेट्रिक वॉरफेयर (ड्रोन, मिसाइल, बारूदी सुरंगें, बसिज मिलिशिया) पहले से ही अमेरिकी जहाजों को चुनौती दे रही है। ख़र्ग द्वीप जैसी जगहों पर हमला पहले ही "आत्मघाती" बताया जा चुका है। लेकिन अमेरिका में इसका असर और बड़ा होगा:
- विद्रोह की संभावना: अगर अमेरिकी सैनिकों की बॉडी बैग्स आने लगीं, तो विरोध प्रदर्शन वियतनाम-स्टाइल हो सकते हैं। कैम्पस, शहरों में "नो ड्राफ्ट" और "इम्पीच ट्रंप" के नारे गूंज सकते हैं।
- इकोनॉमिक क्राइसिस: होर्मुज बंद होने से तेल की कीमतें दोगुनी हो सकती हैं—इन्फ्लेशन, गैसोलीन $8/गैलन तक। जनता ट्रंप को दोषी ठहराएगी।
- पॉलिटिकल फॉलआउट: मिडटर्म इलेक्शन्स नजदीक हैं—ट्रंप की पार्टी को भारी नुकसान हो सकता है। इंडिपेंडेंट्स और युवा वोटर्स पहले से ही दूर हो चुके हैं।
- ग्लोबल इंपैक्ट: चीन, रूस जैसे देश ईरान का सपोर्ट करेंगे। अमेरिका अकेला पड़ सकता है।
ट्रंप का यह दांव सद्दाम हुसैन की 1980 वाली गलती जैसा लगता है—ईरान को कमजोर समझना। लेकिन ईरान 8 साल की जंग झेल चुका है। अमेरिका में भी जनता अब "अनंत युद्ध" नहीं चाहती। अगर ट्रंप जमीनी हमला करते हैं, तो घरेलू विद्रोह न सिर्फ संभव है, बल्कि लगभग तय है। इतिहास दोहराया जा रहा है—और इस बार जनता तैयार है।
ट्रंप को सोचना चाहिए: क्या ईरान जीतना इतना जरूरी है कि अपना देश खो दें? जनता का गुस्सा अब चुप नहीं रहेगा। अगले कुछ दिन निर्णायक होंगे—या तो ट्रंप पीछे हटेंगे, या विद्रोह की आग पूरे अमेरिका और इज़राइल को जला डालेगी।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 21,2026