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Saturday, 21 March 2026

"ख़र्ग द्वीप की कब्रगाह: सद्दाम की 8 साल की जंग से सबक न लेने वाले ट्रंप का आत्मघाती मिशन?"

"ख़र्ग द्वीप की कब्रगाह: सद्दाम की 8 साल की जंग से सबक न लेने वाले ट्रंप का आत्मघाती मिशन?"
-Friday World March 21,2026 
1980 का दशक। इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन ने अपनी सेना को दुनिया की सबसे आधुनिक फौज मानते हुए ईरान पर हमला बोल दिया। 70,000 सैनिक, 3,000 टैंक, और विश्वास कि महज दो हफ्ते में तेहरान पर कब्जा कर लेंगे। लेकिन ईरान ने उन्हें ऐसा जाल बिछाया कि युद्ध 8 साल तक चला, 10 लाख से ज्यादा जानें गईं, और सद्दाम की सेना टूटकर बिखर गई। खुर्रमशहर शहर पर कब्जे में ही सद्दाम को 34 दिन लगे। मई 1982 में दक्षिणी ईरान की एक लड़ाई में इराक के 19,000 सैनिक मारे गए, 20,000 से ज्यादा घायल या हलाक। इराकी टैंक जले हुए कबाड़ बन गए। ईरान की जनता ने हौसले से जवाब दिया—औरतें, बच्चे, बुजुर्ग सब मोर्चे पर। ईरान ने न सिर्फ बचाव किया, बल्कि इराक को पीछे धकेल दिया। यह युद्ध 20वीं सदी की सबसे लंबी और खूनी जंग बन गई, जहां ईरान की जुझारूपन ने दुनिया को हैरान कर दिया। 

आज, मार्च 2026 में, इतिहास खुद को दोहराने की कगार पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ युद्ध को नई ऊंचाई दे रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 13,000 अमेरिकी मरीन (मारines) को ख़र्ग द्वीप (Kharg Island) पर उतारने की योजना है—वही द्वीप जहां से ईरान के 90% कच्चे तेल का निर्यात होता है। यह द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, फारस की खाड़ी में स्थित एक छोटा-सा टापू, लेकिन वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण। 

ट्रंप का दावा है कि वे सिर्फ सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, तेल सुविधाओं को नहीं। लेकिन अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही रोकता है, तो तेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी हमला हो सकता है। सीनेटर लिंडसे ग्राहम जैसे ट्रंप समर्थक कह रहे हैं, "जो ख़र्ग द्वीप पर कब्जा करेगा, वही युद्ध की किस्मत तय करेगा।"

 लेकिन पूर्व अमेरिकी नेवी इंटेलिजेंस अधिकारी और विशेषज्ञ मैलकम नैंस (Malcolm Nance) इस योजना को "आत्मघाती" बता रहे हैं। नैंस, जिन्होंने सालों तक फारस की खाड़ी में काम किया और ईरान की रणनीति को करीब से समझा है, कहते हैं कि यह मिशन अमेरिकी मरीनों के लिए "खुदकुशी" साबित होगा। उनकी विश्लेषण पर आधारित एक काल्पनिक लेकिन यथार्थवादी परिदृश्य कुछ इस तरह है:

 1. हॉर्मुज जलडमरूमध्य का जहन्नुम: ख़र्ग तक पहुंचने के लिए मरीनों को होर्मुज पार करना होगा। ईरान ने यहां सैकड़ों बारूदी सुरंगें (mines) बिछा रखी हैं—2026 की रिपोर्ट्स में ईरान ने पहले से ही दर्जनों माइंस डाले हैं, और उनके पास हजारों माइंस और माइन-लेइंग जहाज हैं। अमेरिकी सेना ने कुछ माइन-लेइंग जहाजों को नष्ट किया है, लेकिन ईरान के पास अभी भी 80-90% क्षमता बाकी है। छोटे-छोटे स्पीडबोट्स (fast attack craft), विस्फोटक से लदे नावें, और अदृश्य हमले का जाल बिछा है। ब्रिटिश साम्राज्य ने 150 साल तक फारस की खाड़ी पर कब्जे की कोशिश की, लेकिन असफल रहा—यह इलाका हर आक्रमणकारी सेना के लिए कब्रगाह साबित हुआ।

 2. तटीय इलाकों में मौत का तांडव: होर्मुज पार करने के बाद 380 समुद्री मील की तटीय पट्टी। यहां जमीन से, समुद्र से, और हवा से मिसाइलें, ड्रोन, और रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के हमले होंगे। ईरान के पास असिमेट्रिक युद्ध (asymmetric warfare) की मजबूत क्षमता है—छोटे जहाज, मिसाइल बैटरी, और ड्रोन स्वार्म। अमेरिकी जहाजों और मरीनों पर चारों तरफ से हमला होगा। 

3. ख़र्ग पर पहुंचकर क्या मिलेगा?: अगर मरीन किसी तरह द्वीप पर उतर भी जाते हैं, तो उन्हें जली हुई रिफाइनरीज और तेल टर्मिनल मिलेंगे। मुकाबला होगा हथियारबंद 8,000 नागरिकों से—जिनमें औरतें और बच्चे भी शामिल। ईरान की बसिज मिलिशिया (Basij) और IRGC के सदस्य सुसाइड अटैक के लिए तैयार हैं। द्वीप छोटा है, लेकिन चारों तरफ से घिरा हुआ—24 घंटे टिक पाना भी बड़ी बात होगी। 

4. वैश्विक परिणाम: ख़र्ग पर हमला ईरान की अर्थव्यवस्था को तोड़ देगा, लेकिन बदले में होर्मुज बंद हो जाएगा। दुनिया का 20% तेल यहां से गुजरता है—तेल की कीमतें आसमान छू लेंगी। चीन (ईरान का मुख्य खरीदार) और अन्य देश प्रभावित होंगे। नैंस कहते हैं, "ईरानी होर्मुज को जहन्नुम बना देंगे। तेल के जहाज तिनकों की तरह बिखर जाएंगे।" 

सद्दाम हुसैन ने ईरान को कमजोर समझा था—परिणाम? उसकी सेना का मनोबल टूट गया, और युद्ध में इराक हार गया। आज ट्रंप प्रशासन भी वैसी ही गलती दोहरा रहा है। ईरान 1980 के दशक से ज्यादा मजबूत है—उसके पास बेहतर मिसाइलें, ड्रोन, और जनता का समर्थन। ईरान ने सद्दाम को झेला, अब ट्रंप को भी झेलने की तैयारी है।

 यह युद्ध सिर्फ दो देशों का नहीं—यह वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, और शांति का सवाल है। मैलकम नैंस जैसे विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं: "ट्रंप बेशक कोशिश कर लें, लेकिन होगा वही जो ईरान चाहेगा।" इतिहास गवाह है—ईरान की हिम्मत और जुझारूपन के सामने कोई भी आक्रमणकारी टिक नहीं पाया। 

क्या यह युद्ध दुनिया को नई तबाही की ओर ले जाएगा? या ट्रंप पीछे हटेंगे? समय बताएगा, लेकिन सबक साफ है: फारस की खाड़ी में घुसना आसान है, लेकिन निकलना लगभग असंभव। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World March 21,2026