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Saturday, 21 March 2026

"मैथ्यू वैनडाइक का छिपा चेहरा: पूर्व भाड़े का सैनिक से NIA की गिरफ्त में—म्यांमार ड्रोन ट्रेनिंग और 'ईसाई राष्ट्र' की साजिश?"

"मैथ्यू वैनडाइक का छिपा चेहरा: पूर्व भाड़े का सैनिक से NIA की गिरफ्त में—म्यांमार ड्रोन ट्रेनिंग और 'ईसाई राष्ट्र' की साजिश?"
-Friday World March 21,2026 
13 मार्च 2026 को NIA ने कोलकाता, दिल्ली और लखनऊ एयरपोर्ट से 7 विदेशियों को हिरासत में लिया। इनमें मुख्य नाम मैथ्यू वैनडाइक (46 वर्ष, अमेरिकी, बाल्टीमोर निवासी) है। बाकी 6 यूक्रेनी हैं: हुरबा पेट्रो, स्लिवियाक टारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफांकिव मारियन, होंचारुक मैक्सिम और कामिन्स्की विक्टर। सभी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे, लेकिन उन्होंने गुवाहाटी से मिजोरम के प्रतिबंधित इलाकों में बिना **प्रोटेक्टेड एरिया परमिट (PAP)** के अवैध रूप से प्रवेश किया। आरोप है कि वे मिजोरम से म्यांमार में घुसे और वहां के जातीय सशस्त्र समूहों (ethnic armed groups) को घातक ड्रोन सप्लाई किए, असेंबल ट्रेनिंग दी, और युद्ध की आधुनिक तकनीकें सिखाईं—जिसमें ड्रोन जामिंग, टैक्टिकल ऑपरेशंस और गोरिल्ला वारफेयर शामिल हैं। 

NIA का केस UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत दर्ज है, जिसमें साजिश, आतंकवादी कृत्यों को बढ़ावा देने, और भारत विरोधी गतिविधियों का आरोप है। दिल्ली की स्पेशल NIA कोर्ट ने 27 मार्च तक NIA कस्टडी दी है। जांच में पता चला कि ये लोग म्यांमार के विद्रोही गुटों के साथ मिलकर काम कर रहे थे, और कुछ भारतीय प्रतिबंधित संगठनों से भी लिंक हो सकते हैं। रूसी इंटेलिजेंस की टिप-ऑफ से यह ऑपरेशन शुरू हुआ, जिसने NIA को अलर्ट किया। 

 मैथ्यू वैनडाइक कौन है? एक विवादास्पद 'फ्रीडम फाइटर' की कहानी मैथ्यू वैनडाइक कोई साधारण पर्यटक नहीं। उसकी जिंदगी युद्धों, फिल्मों और 'क्रांतिकारी' गतिविधियों से भरी है:

 - **शुरुआत**: जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से सिक्योरिटी स्टडीज में मास्टर्स। 2009 में इराक और अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के साथ एम्बेडेड वॉर करस्पॉन्डेंट रहा। 

- **2011 - लीबिया**: मुअम्मर गद्दाफी के खिलाफ विद्रोहियों के साथ लड़ाई लड़ी। कैद हुआ, 6 महीने POW रहा। बाद में भाग निकला। इस घटना पर डॉक्यूमेंट्री "Point and Shoot" बनी, जो ट्रिबेका फिल्म फेस्टिवल में अवॉर्ड जीती। 

- **2012-2014 - सीरिया**: असद रेजीम के खिलाफ विद्रोहियों की मदद की, फिल्म "Not Anymore: A Story of Revolution" बनाई।

 - **2014 से अब तक**: Sons of Liberty International (SOLI) नाम से NGO बनाया, जो 'आतंकवाद और दमनकारी रेजीम' से लड़ने वाले ग्रुप्स को फ्री मिलिट्री ट्रेनिंग देता है। इराक में ISIS के खिलाफ अस्सीरियन क्रिश्चियन फोर्सेस (Nineveh Plain Protection Units) को ट्रेन किया। यूक्रेन में रूस के खिलाफ फोर्सेस को सपोर्ट किया। वेनेजुएला, फिलीपींस जैसे देशों में भी कवर ऑपरेशंस का दावा। 

- **CIA कनेक्शन?**: वह खुद कह चुका है कि CIA की भर्ती प्रक्रिया से गुजरा, लेकिन आधिकारिक रूप से एजेंट नहीं। उसके कई साथी अमेरिकी डिफेंस डिपार्टमेंट में हाई पोस्ट पर हैं। जानकार मानते हैं कि ऐसे 'प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर्स' या 'मर्सेनरी' को एजेंसियां प्रॉक्सी वॉर के लिए इस्तेमाल करती हैं—बिना डायरेक्ट इन्वॉल्वमेंट के।

 उसकी वेबसाइट और सोशल मीडिया पर वह खुद को 'स्पाई, फिल्ममेकर, सिक्योरिटी एनालिस्ट, रिवॉल्यूशनरी' बताता है। लेकिन NIA जांच में उसके रिकॉर्डिंग्स मिले हैं, जहां वह वेनेजुएला, ईरान और म्यांमार में 'ग्लोबल रिबेलियंस' की अपील करता है। 

 बड़ा सवाल: 'ईसाई राष्ट्र' की साजिश? यह मामला सिर्फ ड्रोन ट्रेनिंग तक सीमित नहीं। भू-राजनीतिक एक्सपर्ट्स और पूर्व बांग्लादेश पीएम **शेख हसीना** ने पहले चेतावनी दी थी कि बंगाल की खाड़ी, म्यांमार और भारत के नॉर्थ-ईस्ट के कुछ हिस्सों को मिलाकर एक अलग 'ईसाई राष्ट्र' बनाने की कोशिश हो रही है—ठीक पूर्वी तिमोर (East Timor) की तरह। 

मिजोरम के CM **लालदुहोमा** ने विधानसभा में माना कि जून-दिसंबर 2024 में करीब 2,000 विदेशी आइजोल पहुंचे, कई संदिग्ध थे। म्यांमार में गृहयुद्ध चल रहा है, जहां जातीय विद्रोही (Chin state आदि) जंटा के खिलाफ लड़ रहे हैं। भारत की सीमा पर ऐसे 'ट्रेनर्स' की मौजूदगी से नॉर्थ-ईस्ट में अस्थिरता फैल सकती है—इंसर्जेंसी बढ़ सकती है, ड्रोन से अटैक हो सकते हैं। 

यह पुरुलिया आर्म्स ड्रॉप केस जैसा लगता है, जहां विदेशी हथियार गिराए गए थे। NIA अभी और 8 यूक्रेनियंस की तलाश में है। अमेरिकी एम्बेसी और यूक्रेन सरकार मामले पर नजर रख रही है—यूक्रेन ने जांच की मांग की, लेकिन भारत ने कहा कि परमिशन जरूरी है। 

 भारत के लिए खतरा और सबक यह घटना दिखाती है कि कैसे वैश्विक पावर प्रॉक्सी के जरिए भारत के संवेदनशील इलाकों में घुसपैठ कर रही हैं। म्यांमार बॉर्डर पर ड्रोन और ट्रेनिंग से न सिर्फ म्यांमार, बल्कि भारत के असम, मणिपुर, नागालैंड जैसे राज्यों में खतरा बढ़ सकता है। सरकार को बॉर्डर सिक्योरिटी, इंटेलिजेंस शेयरिंग (रूस के साथ अच्छा रिश्ता यहां काम आया), और PAP नियमों को सख्त करने की जरूरत है।

 मेरी राय: हां, विदेशी ताकतें (चाहे CIA हो या अन्य) नॉर्थ-ईस्ट में अस्थिरता पैदा करना चाहती हैं—चाहे 'क्रिश्चियन स्टेट' के नाम पर या जियोपॉलिटिकल गेम के तौर पर। भारत की एकता और सुरक्षा के लिए यह बड़ा रेड फ्लैग है। NIA की जांच से और खुलासे होंगे, लेकिन अब सतर्कता जरूरी है—क्योंकि युद्ध अब सिर्फ बॉर्डर पर नहीं, बल्कि ड्रोन और प्रॉक्सी के जरिए लड़ा जा रहा है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World March 21,2026