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Thursday, 19 March 2026

होर्मुज जलडमरूमध्य: ईरान का 'टोल रोड' बन गया! वार्षिक 73 अरब डॉलर की कमाई का प्लान, अमेरिकी प्रतिबंधों को चकमा देने की नई रणनीति

होर्मुज जलडमरूमध्य: ईरान का 'टोल रोड' बन गया! वार्षिक 73 अरब डॉलर की कमाई का प्लान, अमेरिकी प्रतिबंधों को चकमा देने की नई रणनीति
-Friday World March 20,2026 
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अब सिर्फ रणनीतिक हथियार नहीं, बल्कि आर्थिक कमाई का बड़ा स्रोत बनाने का फैसला किया है। अमेरिका और इजराइल के साथ चल रहे युद्ध के बीच ईरान की संसद में एक बिल पर चर्चा चल रही है, जिसमें होर्मुज से गुजरने वाले हर जहाज से टोल टैक्स और सुरक्षा शुल्क वसूलने का प्रस्ताव है। इस सिस्टम से ईरान को सालाना करीब 73 अरब डॉलर की भारी-भरकम कमाई हो सकती है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों का मुकाबला करने के लिए काफी है। 

यह प्रस्ताव ईरान की संसद सदस्य सोमायेह रफीई ने आईएसएनए न्यूज एजेंसी को बताया। उन्होंने कहा, "अगर होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों के आवागमन, ऊर्जा परिवहन और खाद्य सुरक्षा के लिए सुरक्षित मार्ग के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, तो देशों को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान को टोल और टैक्स चुकाने होंगे।" उन्होंने इसे 'सुरक्षा टैक्स' भी कहा, जिसमें ईरान क्षेत्र की सुरक्षा प्रदान करने के बदले में भुगतान मांग रहा है। 

→ होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों इतना महत्वपूर्ण है? 

यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां से रोजाना औसतन 20 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम उत्पाद गुजरते हैं, जो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20-25% है। सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और कतर जैसे देशों का ज्यादातर तेल और गैस इसी रास्ते से एशिया की ओर जाता है। युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने इस जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण मजबूत कर लिया है और कई जहाजों को पास होने के लिए विशेष अनुमति और शर्तें लगा रहा है। 

→ टोल टैक्स से 73 अरब डॉलर कैसे आएंगे?

 प्रस्ताव के अनुसार, अगर 10% टोल लगाया जाए तो यह रकम आसानी से पहुंच सकती है। रोजाना 20 मिलियन बैरल के वॉल्यूम पर, ब्रेंट क्रूड के मौजूदा ऊंचे भाव (100 डॉलर से ज्यादा) को देखते हुए गणना से यह आंकड़ा वास्तविक लगता है। तेहران यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर फोआद इजादी ने कहा कि यह टोल सिस्टम युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई करेगा और ईरान को सालाना 73 अरब डॉलर की आय देगा। इससे अमेरिकी और यूरोपीय प्रतिबंधों का असर कम हो जाएगा। 

→ युद्ध के बीच भी ईरान की तेल निर्यात जारी – रोज 14 करोड़ डॉलर की कमाई! 

खार्ग द्वीप – ईरान के 90% तेल निर्यात का केंद्र – पर अमेरिका ने सैन्य ठिकानों पर हमले किए, लेकिन तेल संकुलों को निशाना नहीं बनाया। कारण साफ है: अगर ईरान का तेल सप्लाई रुक जाए तो वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा हो जाएगा। केप्लर और टैंकरट्रैकर्स के डेटा से पता चलता है कि युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने 12 से 13.7 मिलियन बैरल तेल निर्यात किया है, यानी रोजाना 1 से 1.5 मिलियन बैरल। इससे ईरान रोजाना करीब 14 करोड़ डॉलर (लगभग 1200 करोड़ रुपये) कमा रहा है। 

→ ईरान के टैंकर आसानी से गुजर रहे, बाकी देशों के जहाज रुके हुए! 

ईरान के टैंकर होर्मुज से बिना रुकावट गुजर रहे हैं, जबकि अन्य देशों के जहाज रुक रहे हैं या हमलों का शिकार हो रहे हैं। अमेरिका ने ईरान के तेल को रोकने से परहेज किया, क्योंकि इससे कीमतें 150-200 डॉलर तक पहुंच सकती हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी होगा। 

→ वैश्विक प्रभाव और विवाद यह कदम नए विवाद पैदा कर सकता है। सुएज नहर और पनामा नहर जैसे अन्य मार्गों पर भी ऐसी टोल सिस्टम की नकल हो सकती है। फारस की खाड़ी के अन्य देश विरोध कर रहे हैं और सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दे रहे हैं। लेकिन ईरान का कहना है कि युद्ध की स्थिति में सुरक्षा प्रदान करने के बदले वसूली जरूरी है। 

→ भारत जैसे देशों के लिए चुनौती 

भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह बड़ा झटका है, क्योंकि उनका ज्यादातर तेल इसी मार्ग से आता है। कीमतें बढ़ेंगी, शिपिंग खर्च बढ़ेगा और वैकल्पिक रास्ते ढूंढने पड़ेंगे। 


युद्ध अब आर्थिक जंग भी है होर्मुज अब सिर्फ ऊर्जा मार्ग नहीं रहा – यह ईरान की आर्थिक ताकत और वैश्विक राजनीति का हथियार बन गया है। 

अगर टोल सिस्टम लागू हुआ तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में नए नियम बनेंगे। जरूरतमंद देशों को ईरान के प्रस्ताव मानने पड़ सकते हैं। यह दिखाता है कि युद्ध सिर्फ सैन्य नहीं, आर्थिक रणनीति भी है। ईरान अमेरिकी प्रतिबंधों को 'गोल्डन गेट' से चकमा दे रहा है। 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World March 20,2026