देश के दो राज्यों में एक ही दिन सड़क दुर्घटनाओं ने लोगों के दिल दहला दिए हैं। आंध्र प्रदेश के मार्कापुरम (प्रकाशम जिला) में बस और टिपर लॉरी की टक्कर के बाद लगी भीषण आग ने 13-14 लोगों की जान ले ली, जबकि मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 'हितग्राही सम्मेलन' से लौट रही बस की ट्रक से आमने-सामने टक्कर में 10 लोगों की मौत हो गई और 20 से अधिक घायल हुए। ये घटनाएं सड़क सुरक्षा की चिंताजनक स्थिति को एक बार फिर उजागर करती हैं।
आंध्र प्रदेश में जिंदा जलने की त्रासदी (26 मार्च 2026, सुबह) आंध्र प्रदेश के मार्कापुरम जिले के रायवरम के पास गुरुवार सुबह लगभग 6 बजे एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। हरिकृष्णा ट्रेवल्स की निजी बस (तेलंगाना के निर्मल से नेल्लोर जा रही थी) ने टिपर लॉरी से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस में तुरंत आग लग गई और पूरी बस आग की लपटों में घिर गई।
बस में करीब 40 यात्री सवार थे। आग इतनी तेज फैली कि कई यात्री बस के अंदर ही फंस गए और जिंदा जल गए। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार 13 से 14 लोगों की मौत हुई, जबकि 23-25 लोग घायल हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। कुछ यात्रियों ने किसी तरह बच निकलकर अपनी जान बचाई, लेकिन आग की तीव्रता के कारण बचाव कार्य बेहद मुश्किल हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे के कुछ ही मिनटों में बस पूरी तरह आग की चपेट में आ गई थी। पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया, घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। मरने वालों में कई यात्री जलकर कंकाल बन गए, जिससे पहचान में भी दिक्कत आ रही है। इस हादसे ने पूरे आंध्र प्रदेश को सदमे में डाल दिया है।
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कार्यक्रम से लौट रही बस का हादसा (26 मार्च 2026, शाम)
कुछ घंटे बाद मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में दूसरी त्रासदी हुई। मोहखेड़ पुलिस स्टेशन क्षेत्र के सेमरिया हनुमान मंदिर के पास शाम करीब 6:30 बजे उमरानाला क्षेत्र में यह दुर्घटना घटी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के चौरई तहसील में आयोजित 'हितग्राही सम्मेलन' से लौट रही भंडारकुंड-करेर बस की एक ट्रक से आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई।
टक्कर की तीव्रता इतनी अधिक थी कि बस अनियंत्रित होकर पलट गई। बस में 40 से अधिक यात्री सवार थे, जो सम्मेलन से खुशी-खुशी घर लौट रहे थे। टक्कर के बाद बस में चीख-पुकार मच गई। कई यात्री बस के अंदर ही फंस गए। एक यात्री का हाथ कटकर अलग हो गया, जबकि कई के सिर में गंभीर चोटें आईं।
अभी तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें 6 पुरुष, 3 महिलाएं और 1 बच्चा शामिल है। 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। छिंदवाड़ा के एसपी घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। 20 से ज्यादा एंबुलेंस मौके पर पहुंचीं। हादसे के कारण 4-5 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया, जिसे साफ करने में प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
दोनों हादसों की समानताएं और सबक दोनों घटनाओं में बस और भारी वाहन (ट्रक/टिपर) की टक्कर मुख्य कारण रही। आंध्र प्रदेश में आग लगने से स्थिति और भयावह हो गई, जबकि मध्य प्रदेश में बस पलटने से यात्रियों को बचाना मुश्किल हुआ। दोनों मामलों में यात्री किसी कार्यक्रम या यात्रा से लौट रहे थे, जहां खुशी का माहौल अचानक मातम में बदल गया।
ये हादसे सड़क पर लापरवाही, ओवरस्पीडिंग, थके हुए ड्राइवरों और वाहनों की खराब स्थिति जैसी समस्याओं की ओर इशारा करते हैं। भारत में सड़क दुर्घटनाएं हर साल हजारों जिंदगियां निगल जाती हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, हर दिन औसतन सैकड़ों लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवाते हैं।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दोनों घटनाओं पर दुख व्यक्त किया है (आंध्र वाले पर भी संवेदना जताई जा रही है)। छिंदवाड़ा हादसे में मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने और घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए गए हैं। आंध्र प्रदेश सरकार भी राहत कार्य में जुटी हुई है। पुलिस दोनों मामलों में जांच कर रही है – स्पीड, वाहन की स्थिति, ड्राइवर की थकान आदि पहलुओं पर फोकस है।
सड़क सुरक्षा: क्या करें हम? ये घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि:
- वाहन चालकों को थकान भरी ड्राइविंग से बचना चाहिए।
- ओवरस्पीडिंग और लेन नियमों का पालन जरूरी है।
- भारी वाहनों (ट्रक, टिपर) की नियमित मेंटेनेंस हो।
- यात्रियों को सीट बेल्ट लगानी चाहिए।
- सरकारें हाईवे पर बेहतर लाइटिंग, साइन बोर्ड और पेट्रोलिंग बढ़ाएं।
दोनों हादसों में शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना। घायलों को जल्द स्वस्थ होने की कामना। ईश्वर सभी को इस दर्द से उबरने की शक्ति दे।
आंध्र प्रदेश के मार्कापुरम और मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा – दो अलग राज्यों में एक ही दिन हुई ये दुर्घटनाएं सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि पूरी परिवारों की टूटती उम्मीदों की कहानी हैं। सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता और सख्त कानूनों की तत्काल जरूरत है, ताकि ऐसे मातम की पुनरावृत्ति न हो।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 26,2026