-Friday World March 13,2026
मिडिल ईस्ट में इज़राइल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आग अब और भड़क गई है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुले आम कहा है कि ऑयल की बढ़ती कीमतें अमेरिका के लिए फायदेमंद हैं, क्योंकि इससे अमेरिका भारी कमाई कर रहा है।
दूसरी तरफ ईरान के नए सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह मुजतबा खामेनेई ने पद संभालते ही अपना पहला बयान जारी किया और साफ चेतावनी दी – "हॉर्मुज़ स्ट्रेट अभी नहीं खुलेगा, अमेरिकी सैन्य अड्डे बंद करो वरना हमले जारी रहेंगे।"
यह बयान ऐसे समय में आया है जब युद्ध की वजह से वैश्विक तेल व्यापार ठप होने की कगार पर है, जहाजों पर हमले हो रहे हैं, और भारत समेत कई देशों के जहाज खतरे में फंसे हैं।
मुजतबा खामेनेई का पहला बयान: 7 सबसे बड़ी बातें
ईरान के सरकारी टीवी पर पढ़कर सुनाया गया यह संदेश बेहद सख्त और निर्णायक था। आयतुल्लाह मुजतबा खामेनेई ने कहा:
1. मिडिल ईस्ट में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को तुरंत बंद किया जाए, वरना उन पर हमले जारी रहेंगे।
2. ईरान अपने पड़ोसी देशों से अच्छे संबंध चाहता है, लेकिन उनके यहां मौजूद अमेरिकी अड्डे ही निशाने पर हैं।
3. दुश्मनों पर दबाव बनाने के लिए हॉर्मुज़ स्ट्रेट अभी बंद रहेगा – इसे खोलने का कोई इरादा नहीं।
4. ईरान हर शहीद का खून का बदला लेगा – चाहे वह पूर्व सुप्रीम लीडर हों या हमलों में मारे गए बच्चे।
5. ईरानी सेना का शुक्रिया – उनके बलिदान ने देश को विदेशी ताकतों के कब्जे और विभाजन से बचाया।
6. युद्ध से प्रभावित लोगों के लिए आर्थिक और अन्य मदद की योजनाएं बनाई जा रही हैं।
7. देश के लोग मतभेद भूलकर एकजुट रहें और इस मुश्किल वक्त का साथ मिलकर सामना करें।
यह बयान ईरान की नई लीडरशिप की सख्त नीति को दर्शाता है। मुजतबा खामेनेई ने साफ कहा कि ईरान अब पीछे नहीं हटेगा और अमेरिका-इज़राइल को हर हमले की "भरपाई" करनी पड़ेगी।
ट्रंप का विवादित बयान: "ऑयल महंगा होना हमारे लिए अच्छा है" अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा: "ऑयल की कीमतें बढ़ रही हैं, और यह हमारे लिए अच्छी बात है। अमेरिका अब दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल प्रोड्यूसर है। हम इससे खूब कमाई कर रहे हैं। हाई प्राइस से हमें फायदा हो रहा है।"
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया जब वैश्विक तेल की कीमतें 120-130 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं।
→ अमेरिका शेल ऑयल और अन्य घरेलू उत्पादन से लाभान्वित हो रहा है।
→ लेकिन यूरोप, भारत, चीन जैसे आयातक देशों में महंगाई आसमान छू रही है। ट्रंप ने यह भी कहा कि "ईरान को सबक सिखाना जरूरी है,
USS जेराल्ड फोर्ड पर आग: अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर में हादसा अमेरिकी नौसेना के सबसे आधुनिक विमानवाहक पोत **USS Gerald R. Ford** पर आग लगने की घटना ने दुनिया को चौंका दिया।
→ यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि आग जहाज के मुख्य लॉन्ड्री एरिया में लगी।
→ दो नाविक घायल हुए, लेकिन उनकी हालत स्थिर है।
→ जहाज की प्रोपल्शन सिस्टम को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
→ अमेरिकी नौसेना ने साफ किया कि यह घटना किसी लड़ाई से जुड़ी नहीं है – यह एक आंतरिक हादसा था।
→ फिर भी, युद्ध के बीच इतने बड़े जहाज पर आग लगना चिंता का विषय बना हुआ है।
हॉर्मुज़ स्ट्रेट के पास भारत के 28 जहाज फंसे: सुरक्षा पर नजर भारत सरकार ने पुष्टि की है कि हॉर्मुज़ स्ट्रेट के आसपास **28 भारतीय जहाज** मौजूद हैं।
→ इनमें से 24 जहाज स्ट्रेट के पश्चिमी हिस्से में हैं – 677 भारतीय नाविक सवार।
→ 4 जहाज पूर्वी हिस्से में हैं – 101 भारतीय नाविक।
→ शिपिंग मंत्रालय के अधिकारी राजेश कुमार सिंह ने कहा:
"हमारी नजर हर जहाज और नाविक पर है। जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता दी जाएगी।"
यह संख्या बताती है कि भारत का तेल आयात और निर्यात कितना खतरे में है। हॉर्मुज़ बंद होने से भारत में पेट्रोल-डीजल, गैस और अन्य आयातित सामान की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
रूस का ऑफर: भारत को LNG सप्लाई करने को तैयार रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा: "रूस भारत को लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) सप्लाई के लिए तैयार है। पहले भी करार हुए थे, लेकिन पश्चिमी प्रतिबंधों से रुक गए। अब हम वैकल्पिक रास्ते तलाश रहे हैं।"
यह बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब खाड़ी से गैस सप्लाई पर संकट मंडरा रहा है।
ईरान का 42वां हमला: 'ट्रू प्रॉमिस-4' ऑपरेशन ईरानी इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि 'ट्रू प्रॉमिस-4' ऑपरेशन के तहत मिसाइलों और ड्रोनों का **42वां जत्था** छोड़ा गया।
→ हमले का कोड: "लब्बैक या खामेनेई"
→ इस्तेमाल की गई मिसाइलें: इमाद, कद्र, खैबर-शेकन, फतह
→ निशाना: तेल अवीव और आसपास के अमेरिकी सैन्य अड्डे
ईरान का कहना है कि यह हमला "शहीदों के बदले" के लिए था।
वैश्विक प्रभाव: युद्ध अब अर्थव्यवस्था को निगल रहा है
- तेल की कीमतें 130 डॉलर के पार – महंगाई का खतरा।
- हॉर्मुज़ बंद होने से दुनिया का 20-25% तेल व्यापार रुक सकता है।
- भारत में पहले से गैस, डेयरी, सिरेमिक उद्योग संकट में
– अब तेल और गैस पर और मार।
- बनासकांठा जैसे इलाकों में बटाटा निर्यात रुका – किसान घाटे में।
- जहाजों पर हमले बढ़े – कच्छ के बंदरगाह प्रभावित।
ट्रंप का "महंगा ऑयल अच्छा है" बयान और मुजतबा का "हॉर्मुज़ नहीं खुलेगा" ऐलान – दोनों तरफ से सख्त रुख। युद्ध अब सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक युद्ध में बदल चुका है। दुनिया की नजरें अब इस बात पर हैं कि क्या कोई बड़ा समझौता होगा या फिर यह आग और फैलेगी?
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 13,2026