प्रतिकात्मक तस्वीर
"हमारे किसी भी द्वीप पर हमला हुआ तो सारी लाइनें खत्म, फारस की खाड़ी में पूरी ताकत से जवाब देंगे"
मिडिल ईस्ट में इज़राइल-ईरान युद्ध की आग अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है जहां दोनों पक्षों में से कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा। लेकिन पहली बार इज़राइल ने खुले तौर पर रूस से मदद मांगी है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने गुरुवार को सनसनीखेज खुलासा किया कि इज़राइल ने मॉस्को से फोन पर अपील की है कि रूस ईरान को युद्धविराम के लिए राजी कराए और राजनयिक वार्ता फिर से शुरू करवाए।
दूसरी ओर ईरान ने साफ-साफ चेतावनी दी है – "हमारे किसी भी द्वीप पर हमला करने की कोशिश हुई तो सारी सीमाएं खत्म हो जाएंगी। फारस की खाड़ी में हमलावरों को पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा।"
इज़राइल की अपील: रूस से मांगी मध्यस्थता
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा:
"इज़राइल ने हमें संपर्क किया है और फोन पर अनुरोध किया है कि हम ईरान को युद्धविराम के लिए मनाएं। वे चाहते हैं कि मॉस्को राजनयिक स्तर पर बातचीत फिर से शुरू करवाए।"
उन्होंने आगे कहा:
"पूरे क्षेत्र में मानवीय स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। तनाव लगातार बढ़ रहा है और यह चिंताजनक है। हम स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।"
यह दूसरी बार है जब इज़राइल ने सार्वजनिक रूप से रूस से मध्यस्थता की अपील की है। रूस ने पहले से ही ईरान के साथ मजबूत संबंध बनाए रखे हैं और सीरिया में भी दोनों देश मिलकर काम करते हैं। इज़राइल की यह अपील युद्ध में थकान या रणनीतिक दबाव का संकेत मानी जा रही है।
ईरान का सख्त रुख: "द्वीप पर हमला हुआ तो कोई लाइन नहीं बचेगी"
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने X (पूर्व ट्विटर) पर एक सख्त पोस्ट में चेतावनी दी:
"ईरान के किसी भी द्वीप पर हमला करने की कोशिश हुई तो सारी सीमाएं खत्म हो जाएंगी। हम कोई प्रतिबंध नहीं मानेंगे। फारस की खाड़ी में हमलावरों को पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा।"
गालिबाफ का यह बयान ईरान की "रेड लाइन" को स्पष्ट करता है। ईरान के पास फारस की खाड़ी में कई रणनीतिक द्वीप हैं जैसे:
- अबू मूसा
- ग्रेटर टुनब
- लेसर टुनब
ये द्वीप पर ईरान का कब्जा हैं।
इज़राइल या उसके सहयोगी अगर इन पर हमला करने की कोशिश करते हैं तो ईरान इसे "राष्ट्रीय संप्रभुता पर सीधा हमला" मानकर पूर्ण युद्ध घोषित कर सकता है।
युद्ध की ताजा स्थिति: दोनों तरफ से हमले जारी
- ईरान ने हाल ही में 'ट्रू प्रॉमिस-4' ऑपरेशन के तहत 42वां बैच मिसाइल और ड्रोन छोड़े।
- इज़राइल ने तेहरान के आसपास के ठिकानों पर हमले तेज किए।
- हॉर्मुज़ स्ट्रेट में जहाजों पर हमले बढ़े
– भारत के 28 जहाज फंसे हुए।
- अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS Gerald R. Ford पर आग लगने की घटना।
- ट्रंप का बयान: "ऑयल महंगा होना हमारे लिए अच्छा है।"
वैश्विक प्रभाव: भारत पर सबसे ज्यादा असर
- हॉर्मुज़ स्ट्रेट बंद होने की आशंका से तेल की कीमतें 130 डॉलर के पार।
- भारत में पहले से गैस, डेयरी, सिरेमिक, बटाटा निर्यात संकट में।
- कच्छ के बंदरगाहों पर जहाजों का आवागमन प्रभावित।
- रूस ने भारत को LNG सप्लाई का ऑफर दिया
– लेकिन अभी तक कोई बड़ा करार नहीं।
क्या होगा आगे? इज़राइल की रूस से अपील और ईरान की "कोई लाइन नहीं बचेगी" वाली चेतावनी से साफ है कि युद्ध अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है।
- अगर रूस मध्यस्थता में सफल हुआ तो कुछ दिनों में युद्धविराम संभव।
- अगर ईरान ने द्वीपों पर हमले का जवाब दिया तो फारस की खाड़ी पूरी तरह युद्ध का मैदान बन सकती है।
- दुनिया की नजरें अब रूस पर टिकी हैं – क्या मॉस्को ईरान को रोक पाएगा या फिर यह आग पूरे क्षेत्र को जला डालेगी?
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 13,2026