ईरान की बढ़ती मिसाइल क्षमता और ब्रिटेन की रक्षा व्यवस्था पर गहराता संकट
मध्य पूर्व में चल रहा तनाव अब वैश्विक स्तर पर खतरे की घंटी बजा रहा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग ने नई ऊंचाइयां छू ली हैं। हाल ही में ईरान ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया द्वीप पर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जो अमेरिका और ब्रिटेन द्वारा संयुक्त रूप से संचालित एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा है। यह हमला असफल रहा, लेकिन इसने दुनिया को ईरान की मिसाइल ताकत का एक बड़ा सबूत दे दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अब 4,000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें बना चुका है, जिसका मतलब है कि लंदन, पेरिस, बर्लिन जैसी यूरोपीय राजधानियां भी अब ईरान की पहुंच में आ गई हैं।
डिएगो गार्सिया पर हमला: ईरान की मिसाइल ताकत का सबसे बड़ा प्रदर्शन
21 मार्च 2026 को ईरान ने डिएगो गार्सिया पर दो इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें लॉन्च कीं। ईरान से इस द्वीप की दूरी लगभग 3,800-4,000 किलोमीटर है। पहले ईरान खुद अपनी मिसाइलों की अधिकतम रेंज 2,000 किलोमीटर बताता था, लेकिन इस हमले ने साबित कर दिया कि उसकी क्षमता उससे कहीं ज्यादा है।
- अमेरिकी युद्धपोत ने SM-3 इंटरसेप्टर मिसाइल से रोका, हालांकि सफलता की पुष्टि नहीं हुई।
यह हमला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि डिएगो गार्सिया अमेरिकी B-2 स्टेल्थ बॉम्बर, पनडुब्बियों और लंबी दूरी के ऑपरेशंस का प्रमुख केंद्र है। ईरान ने इसे निशाना बनाकर अमेरिका-ब्रिटेन को स्पष्ट संदेश दिया कि अब कोई भी उनके दुश्मन सुरक्षित नहीं है। ईरानी मीडिया ने इसे "दुश्मन की कल्पना से परे" कदम बताया।
यह हमला होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर ईरानी हमलों के जवाब में हुआ। ब्रिटेन ने अपने एयरबेस से अमेरिका को ईरान पर हमले की इजाजत दी थी, जिसके बदले ईरान ने डिएगो गार्सिया को टारगेट किया।
लंदन अब ईरान की मिसाइल रेंज में: ब्रिटेन की रक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत? ईरान से लंदन की दूरी लगभग 4,425 किलोमीटर है। इजरायली सेना के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल ज़मीर ने चेतावनी दी है कि ईरान की नई दो-चरण वाली लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल 4,000 किलोमीटर तक पहुंच सकती है। इससे पेरिस (4,198 किमी), बर्लिन, रोम और लंदन जैसी राजधानियां खतरे में हैं।
ब्रिटेन के पास स्वतंत्र रूप से बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम नहीं है। ब्रिटिश सेना के पूर्व कमांडर जनरल सर रिचर्ड बैरन्स ने कहा कि ईरान की ताकत को बार-बार कम आंका गया है। पहले 1,240 किमी की रेंज मानी जाती थी, लेकिन अब 4,000 किमी साबित हो चुकी है।
यदि ईरान लंदन पर हमला करता है, तो ब्रिटेन को अमेरिका और यूरोपीय सहयोगियों पर निर्भर होना पड़ेगा:
- अमेरिकी SM-3 सिस्टम (पूर्वी यूरोप में तैनात)।
- जर्मनी की पैट्रियट मिसाइलें।
- नाटो के एयर डिफेंस नेटवर्क।
लेकिन ब्रिटेन में कोई घरेलू लंबी दूरी का एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम नहीं है, जो इसे बेहद कमजोर बनाता है। स्काई न्यूज के सैन्य विश्लेषक शॉन बेल ने कहा, "लंदन अब दूर नहीं रहा। ब्रिटेन के पास प्रभावी बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा नहीं है।"
ईरान की मिसाइल ताकत कैसे बढ़ी? स्पेस प्रोग्राम का कनेक्शन ईरान का स्पेस लॉन्च व्हीकल प्रोग्राम (जैसे सिमोर्ग) बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास में सीधे जुड़ा है। नेवी के रिटायर्ड अधिकारी स्टीव प्रेस्ट के अनुसार, "बैलिस्टिक मिसाइलें स्पेस रॉकेट ही हैं।" ईरान ने अपनी स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल मिसाइल रेंज बढ़ाने में किया है।
यह तकनीक रूस और चीन से मिली खुफिया जानकारी के साथ मिलकर और मजबूत हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान अब इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) क्लास में पहुंच चुका है।
युद्ध की मार झेल रहा ब्रिटेन: महंगाई और ऊर्जा संकट मध्य पूर्व का तनाव ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पर भी भारी पड़ रहा है। होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमलों से तेल और खाद की आपूर्ति बाधित हुई है। ब्रिटेन खाद निर्माण के लिए पूरी तरह वैश्विक बाजार पर निर्भर है। ऊर्जा और खाद के दाम बढ़ने से रोजमर्रा की चीजें महंगी हो गई हैं। ब्रिटिश बाजार में महंगाई का दबाव बढ़ गया है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डाल रहा है।
दुनिया के लिए सबक और खतरा डिएगो गार्सिया हमला सिर्फ एक असफल प्रयास नहीं, बल्कि ईरान की बढ़ती ताकत का ऐलान है। यह दिखाता है कि ईरान अब क्षेत्रीय स्तर से निकलकर वैश्विक खतरा बन चुका है। ब्रिटेन जैसे देशों को अपनी रक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है, वरना वे सहयोगियों पर निर्भर रहेंगे।
यह घटना दुनिया को याद दिलाती है कि मिसाइल तकनीक और स्पेस प्रोग्राम कितने खतरनाक हो सकते हैं। यदि तनाव बढ़ता रहा, तो यूरोप और ब्रिटेन भी सीधे युद्ध के दायरे में आ सकते हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की इस क्षमता को कम नहीं आंकना चाहिए, क्योंकि यह अब सिर्फ मध्य पूर्व की समस्या नहीं रही।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 22,2026