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Wednesday, 18 March 2026

ईरान ने सऊदी अरब की अरामको रिफाइनरी पर हमला कर खाड़ी क्षेत्र को आग के हवाले कर दिया है! खाड़ी का तेल जल रहा है:

ईरान ने सऊदी अरब की अरामको रिफाइनरी पर हमला कर खाड़ी क्षेत्र को आग के हवाले कर दिया है! खाड़ी का तेल जल रहा है: 
-Friday World March 19,2026
ईरान ने सऊदी अरब की अरामको रिफाइनरी पर हमला कर खाड़ी क्षेत्र को आग के हवाले कर दिया है! खाड़ी का तेल जल रहा है: वैश्विक अर्थव्यवस्था कोरोना से 4 गुना बड़ी तबाही की कगार पर

 मध्य पूर्व का युद्ध अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहा। 2 मार्च 2026 को ईरान ने सऊदी अरब की सबसे बड़ी और दुनिया की प्रमुख तेल रिफाइनरी रास तनुरा (Ras Tanura) पर ड्रोन और मिसाइल हमला किया। सऊदी अरामको की इस 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली रिफाइनरी में आग लग गई, जिसके बाद इसे एहतियातन बंद करना पड़ा। यह हमला अमेरिका-इजरायल गठजोड़ द्वारा ईरान पर किए गए हमलों का प्रत्यक्ष जवाब था, जिसमें ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड और अन्य ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया गया था।

 ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने इसे "ट्रू प्रॉमिस" अभियान का हिस्सा बताया, जबकि सऊदी रक्षा मंत्रालय ने ड्रोन को हवा में ही मार गिराने का दावा किया, लेकिन गिरते मलबे से आग लगने और सीमित नुकसान की पुष्टि हुई। सैटेलाइट इमेजरी में रिफाइनरी के कूलिंग टावरों के आसपास जलने के निशान साफ दिख रहे हैं। यह हमला 2019 के अबकाइक-खुरैस हमले की याद दिलाता है, लेकिन अब स्थिति कहीं ज्यादा खतरनाक है क्योंकि युद्ध 19-20 दिनों से चल रहा है और ईरान ने खाड़ी के कई ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया है। 

तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं – $110 बैरल पार!* खाड़ी क्षेत्र दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक हब है। सऊदी अरब अकेले वैश्विक तेल आपूर्ति का 10-12% हिस्सा संभालता है, और अरामको की रिफाइनरियां इसका दिल हैं। रास तनुरा न सिर्फ रिफाइनिंग करती है, बल्कि पर्सियन गल्फ से टैंकरों के जरिए निर्यात का प्रमुख केंद्र भी है। हमले के बाद सऊदी ने अप्रैल के लिए निर्यात बंदरगाहों की अनिश्चितता जताई है, और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का प्रभाव बढ़ गया है। 

विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर खाड़ी के ऊर्जा भंडारों पर लगातार हमले जारी रहे, तो वैश्विक तेल आपूर्ति में 20-30% की कमी आ सकती है। इससे तेल की कीमतें $150-200 बैरल तक पहुंच सकती हैं। कोरोना महामारी में तेल की मांग घटी थी, लेकिन आपूर्ति बनी रही। अब आपूर्ति ही ठप होने की कगार पर है। 

- आर्थिक प्रभाव: वैश्विक मुद्रास्फीति बढ़ेगी, ट्रांसपोर्ट, खाद्य और मैन्युफैक्चरिंग लागत आसमान छूएंगी। 

- उभरती अर्थव्यवस्थाएं सबसे ज्यादा प्रभावित: भारत, चीन, यूरोप जैसे देश जहां तेल आयात पर निर्भरता ज्यादा है, वहां पेट्रोल-डीजल ₹200+ पार कर सकता है। इंडस्ट्रीज बंद, बेरोजगारी बढ़ेगी।

 - कोरोना से 4 गुना बदतर: कोरोना में GDP ग्रोथ रुकी, लेकिन अब ऊर्जा संकट से सप्लाई चेन पूरी तरह टूट सकती है। IMF और विश्व बैंक पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि यह "कैटास्ट्रोफिक" शॉक होगा। 

नेतन्याहू-ट्रंप जोड़ी ने दुनिया को संकट में धकेला यह युद्ध अमेरिका-इजरायल की आक्रामक नीतियों का नतीजा है। इजरायल ने ईरान के परमाणु और ऊर्जा ठिकानों पर हमले तेज किए, अमेरिका ने बेस और सहयोग दिया। ट्रंप प्रशासन (या उनके प्रभाव में) ने ईरान पर "मैक्सिमम प्रेशर" की नीति दोहराई, जबकि नेतन्याहू ने क्षेत्रीय वर्चस्व के लिए युद्ध को हथियार बनाया। नतीजा? ईरान ने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी के तेल ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे सऊदी, कतर, यूएई, बहरीन तक हमले फैल गए। 

ईरान ने सऊदी के जुबैल पोर्ट, रियाद के अमेरिकी फ्यूल स्टॉक, कतर के रस लफ्फान और अल उदैद बेस पर भी हमले किए। अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ब्लॉकेज की आशंका है, जहां से रोजाना 20 मिलियन बैरल तेल गुजरता है। यह पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को पंगु बना सकता है। 

क्या होगा आगे?

 - अगर ईरान ने और हमले किए, तो OPEC+ देशों की उत्पादन क्षमता बर्बाद हो सकती है।

 - अमेरिका-इजरायल अगर और आक्रामक हुए, तो परमाणु खतरा बढ़ेगा।

 - दुनिया को तत्काल कूटनीति की जरूरत है, लेकिन नेतन्याहू और ट्रंप की जोड़ी शांति की बजाय युद्ध को बढ़ावा दे रही है।

 यह सिर्फ मध्य पूर्व का संकट नहीं, बल्कि पूरी मानवता का संकट है। तेल जल रहा है, अर्थव्यवस्था जल रही है, और आम आदमी की जेबें खाली हो रही हैं। क्या विश्व नेता अब भी चुप रहेंगे? 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World March 19,2026