-Friday World March 7,2026
मार्च 2026 की शुरुआत में आम आदमी की जेब पर एक और वार हुआ है। ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच चल रही भयंकर जंग के कारण वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मची हुई है, और इसका सीधा असर भारत में घरेलू रसोई गैस (LPG) की कीमतों पर पड़ गया है। तेल विपणन कंपनियों – इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम – ने 7 मार्च 2026 से घरेलू और कमर्शियल दोनों LPG सिलेंडरों के दामों में भारी बढ़ोतरी की घोषणा कर दी है।
घरेलू सिलेंडर पर ₹60 का बोझ 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर (नॉन-सब्सिडी) की कीमत में ₹60 की बढ़ोतरी की गई है। इस वृद्धि के बाद दिल्ली में अब यह सिलेंडर ₹853 की जगह ₹913 में उपलब्ध होगा। अन्य प्रमुख शहरों में भी इसी तरह की बढ़ोतरी देखी गई है:
- मुंबई: ₹913 से बढ़कर ₹973
- कोलकाता: ₹933 से बढ़कर ₹993
- चेन्नई: ₹969 से बढ़कर ₹1,029
यह बढ़ोतरी उन लाखों परिवारों के लिए बड़ा झटका है जो पहले से ही महंगाई से जूझ रहे हैं। मध्यम वर्गीय परिवारों में रसोई का बजट पहले ही तंग चल रहा था, अब यह और सिकुड़ जाएगा।
कमर्शियल सिलेंडर पर ₹115 की मार कमर्शियल इस्तेमाल के लिए 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत में ₹115 का इजाफा किया गया है। दिल्ली में अब यह सिलेंडर ₹1,883 में मिलेगा। रेस्तरां, ढाबा, होटल, छोटे-मोटे उद्योग और कैटरिंग वाले कारोबारियों के लिए यह बढ़ोतरी बेहद परेशान करने वाली है। कई जगहों पर पहले से ही खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ चुके हैं, अब गैस की कीमत बढ़ने से होटल और ढाबों में थाली की कीमत में और इजाफा होने की संभावना है।
बढ़ोतरी के पीछे का मुख्य कारण: मिडिल ईस्ट की जंग यह बढ़ोतरी अचानक नहीं आई। फरवरी 2026 के अंत से अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए, जिसे "Operation Epic Fury" नाम दिया गया। इन हमलों में ईरान के परमाणु ठिकाने, मिसाइल साइट्स और मिलिट्री बेस निशाने पर रहे। ईरान ने जवाब में ड्रोन और मिसाइल अटैक किए, जिसमें खाड़ी के अमेरिकी बेस, UAE, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और यहां तक कि साइप्रस में ब्रिटिश RAF अक्रोटिरी बेस भी शामिल थे।
इस जंग के कारण:
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर खतरा बढ़ा
- तेल टैंकरों की इंश्योरेंस लागत कई गुना बढ़ गई
- वैश्विक क्रूड ऑयल की कीमतें $110 प्रति बैरल के पार चली गईं
- LPG और अन्य रिफाइंड प्रोडक्ट्स की इंटरनेशनल कीमतों में तेज उछाल आया
भारत, जो अपनी 85% से ज्यादा तेल जरूरतें आयात करता है, इस वैश्विक उथल-पुथल से सीधे प्रभावित हुआ है। पेट्रोलियम कंपनियों का कहना है कि वे पिछले कई महीनों से घाटे में चल रही थीं और अब कीमतें बढ़ाना मजबूरी हो गई।
आम आदमी की परेशानी बढ़ी, राहत की कोई उम्मीद नहीं सरकार की ओर से अभी तक कोई सब्सिडी बढ़ोतरी या राहत पैकेज की घोषणा नहीं हुई है। Ujjwala योजना के तहत गरीब परिवारों को मिलने वाली सब्सिडी पहले से ही सीमित है, और अब बढ़ी हुई कीमतें उनके लिए और बोझ बन गई हैं। कई परिवारों ने पहले ही गैस सिलेंडर की जगह चूल्हा या लकड़ी का सहारा लेना शुरू कर दिया है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
क्या होगा आगे?
- अगर जंग लंबी खिंची, तो क्रूड ऑयल $120-130 तक जा सकता है
- अगले कुछ महीनों में और बढ़ोतरी की आशंका - तेल कंपनियां हर महीने की 1 तारीख को कीमतों की समीक्षा करती हैं
- सरकार पर दबाव बढ़ रहा है कि Ujjwala सब्सिडी बढ़ाई जाए या कोई विशेष राहत दी जाए
ईरान-अमेरिका-इज़राइल की जंग अब सिर्फ मिडिल ईस्ट की नहीं रही – इसका असर भारतीय रसोई तक पहुंच गया है। जहां दुनिया युद्ध के नतीजों पर नजर रख रही है, वहीं आम भारतीय अब हर महीने ₹60-₹100 ज्यादा खर्च करने को मजबूर है। महंगाई की यह लहर घर-घर पहुंच रही है, और राहत की कोई किरण अभी नजर नहीं आ रही।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 7,2026