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बुधवार, 8 अप्रैल 2026 को मध्य पूर्व की जंग में एक नया और भयावह अध्याय जुड़ गया। इजरायल की वायुसेना ने लेबनान की राजधानी बेरूत समेत देश के विभिन्न इलाकों पर अब तक का सबसे भारी हमला किया। मात्र 10 मिनट में 50 फाइटर जेट्स ने 100 हिज्बुल्लाह टारगेट्स पर 160 बम गिराए। इजरायली सेना ने इसे आंतरिक रूप से "Operation Eternal Darkness" (अंधेरी रात का ऑपरेशन) नाम दिया। यह हमला ईरान और अमेरिका के बीच दो सप्ताह के सीजफायर घोषित होने के कुछ घंटों बाद हुआ, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।
इजरायल डिफेंस फोर्सेस (IDF) ने स्पष्ट किया कि यह हमला हिज्बुल्लाह की सैन्य कमान, रॉकेट यूनिट, इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर और रदवान फोर्स जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं को निशाना बनाने के लिए था। हमले बेरूत, बekaा घाटी और दक्षिणी लेबनान में हुए। IDF के अनुसार, हिज्बुल्लाह इन ठिकानों का इस्तेमाल इजरायली सैनिकों और नागरिकों पर हमले की योजना बनाने के लिए कर रहा था। इजरायली सेना प्रमुख ने कहा, "हम हिज्बुल्लाह के खिलाफ हर संभव मौके का फायदा उठाते हुए हमले जारी रखेंगे।"
हमले का भयानक स्वरूप
आईडीएफ के मुताबिक, 50 जेट्स ने समन्वित तरीके से 10 मिनट के अंदर ही 160 बम गिराए। यह वर्तमान संघर्ष में सबसे बड़ा एकल हवाई अभियान था। हमले के निशाने पर हिज्बुल्लाह के कमांड सेंटर, मिसाइल लॉन्चर, नौसेना इकाइयां और एयर यूनिट शामिल थीं। इजरायल का दावा है कि ये ठिकाने सैन्य प्रकृति के थे और हिज्बुल्लाह नागरिकों को ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहा था।
लेकिन लेबनान की तरफ से तस्वीर अलग है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, हमलों में सैकड़ों लोग मारे गए और घायल हुए। शुरुआती रिपोर्ट्स में 100 से 250 तक मौतों और 700-900 घायलों की बात कही गई है (आंकड़े अभी अंतिम नहीं हैं)। कई हमले घनी आबादी वाले आवासीय इलाकों में हुए, जहां बेरूत के दक्षिणी उपनगर और अन्य क्षेत्र प्रभावित हुए। लेबनानी अधिकारियों का आरोप है कि इजरायल ने बिना चेतावनी के घनी बसावट वाले इलाकों को निशाना बनाया, जो अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन है।
बेरूत की सड़कों पर दहशत का माहौल था। धमाकों की आवाजें दूर-दूर तक गूंजीं। अस्पताल मरीजों से भरे पड़े हैं। कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया। लेबनान के नागरिकों में गुस्सा और निराशा दोनों है — एक तरफ हिज्बुल्लाह की गतिविधियां, दूसरी तरफ इजरायली हमलों की निरंतरता।
लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम की अपील
इस संकट के बीच लेबनान के प्रधानमंत्री **नवाफ सलाम** ने मजबूत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लेबनान ईरान-अमेरिका सीजफायर का स्वागत करता था और लेबनान में भी शांति की कोशिशें कर रहा था, लेकिन इजरायल ने escalation जारी रखा। सलाम ने अपने मित्र देशों से मदद की गुहार लगाई:
> "लेबनान के सभी दोस्तों से अपील है कि वे इन हमलों को रोकने के लिए हर संभव माध्यम से हमारी मदद करें।"
उन्होंने गुरुवार (9 अप्रैल 2026) को राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया। पीएम सलाम ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वे लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करें और युद्ध को तुरंत रोकने के लिए कदम उठाएं। सलाम ने यह भी कहा कि लेबनान इस युद्ध का शिकार बन गया है, जिसका नतीजा और अंत कोई नहीं जानता।
पृष्ठभूमि: ईरान सीजफायर और लेबनान का अलग मोर्चा
यह हमला ऐसे समय हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ दो सप्ताह का सीजफायर घोषित किया था। इजरायल और अमेरिका ने स्पष्ट किया कि यह सीजफायर केवल ईरान के साथ है, लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ चल रही "अलग जंग" पर लागू नहीं होता। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार का रुख सख्त है — वे हिज्बुल्लाह की सैन्य क्षमता को पूरी तरह से कुचलने पर अड़े हैं।
2023 के बाद से चली आ रही इस जंग में हिज्बुल्लाह ने इजरायल पर रॉकेट दागे थे, जिसके जवाब में इजरायल ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की। अब 2026 में स्थिति और जटिल हो गई है। हिज्बुल्लाह लेबनान की राजनीति में मजबूत है, लेकिन कई लेबनानी नागरिक इसे देश को युद्ध में घसीटने का आरोप लगाते हैं।
मानवीय संकट और क्षेत्रीय प्रभाव
लेबनान पहले से ही आर्थिक संकट, विस्थापन और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं। अस्पतालों में दवाइयों और संसाधनों की कमी है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चिंता जताई है कि अगर हमले जारी रहे तो मानवीय संकट और गहरा हो जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। लेकिन फिलहाल इजरायल का रुख "कोई मौका नहीं छोड़ेंगे" वाला है, जबकि लेबनान कूटनीतिक प्रयास तेज कर रहा है।
आगे क्या?
यह हमला न केवल सैन्य रूप से बड़ा था, बल्कि क्षेत्रीय शांति प्रयासों को भी चुनौती दे रहा है। अगर दोनों पक्ष बातचीत की बजाय हथियारों पर भरोसा करते रहे, तो मध्य पूर्व में आग और फैल सकती है। लेबनान के आम नागरिक शांति चाहते हैं। वे न हिज्बुल्लाह की वजह से, न इजरायल की बमबारी से पीड़ित होना चाहते हैं।
इस जंग में सच्चाई दोनों पक्षों की कहानियों के बीच कहीं छिपी है — सुरक्षा की जरूरत और नागरिकों की जान की कीमत। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब सक्रिय भूमिका निभानी होगी, वरना मौत और तबाही का यह सिलसिला और लंबा खिंच सकता है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 9,2026