Breaking

यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Sunday, 5 April 2026

ईरान का अमेरिकी रेस्क्यू मिशन को ‘नाकाम’ बताना: ट्रंप के दावे पर तेहरान का तीखा पलटवार, 1980 के ऑपरेशन ईगल क्लॉ से की तुलना

ईरान का अमेरिकी रेस्क्यू मिशन को ‘नाकाम’ बताना: ट्रंप के दावे पर तेहरान का तीखा पलटवार, 1980 के ऑपरेशन ईगल क्लॉ से की तुलना
-Friday World-April 5,2026
ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच एक नया विवादास्पद मोड़ आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति **डोनाल्ड ट्रंप** ने ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के अंदर एक अमेरिकी पायलट (F-15E फाइटर जेट क्रैश होने के बाद) को बचाने के लिए “अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशनों” में से एक को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। ट्रंप ने लिखा, “We GOT him! वह अब सुरक्षित और स्वस्थ है।”

लेकिन ईरान की तरफ से पूरी तरह विपरीत दावा किया जा रहा है। खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता ने इस मिशन को पूरी तरह नाकाम बताया है। उन्होंने कहा, “दुश्मन के गिराए गए पायलट को बचाने की हताश कोशिश अल्लाह की मदद और ईरानी बलों की त्वरित कार्रवाई के कारण विफल हो गई।” ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने तो ट्रंप पर आरोप लगाया कि वे “भारी हार छिपाने” के लिए इस ऑपरेशन को सफल बता रहे हैं।

घटना का क्रम और दोनों पक्षों के दावे

ईरान ने दावा किया है कि इस्फहान प्रांत के दक्षिणी क्षेत्र में अमेरिकी रेस्क्यू मिशन के दौरान उनके बलों ने दो C-130 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर को मार गिराया। ईरानी मीडिया ने घटनास्थल की तस्वीरें और वीडियो जारी किए, जिनमें जलते हुए मलबे दिखाए गए हैं।

ईरानी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम ज़ोल्फ़ाग़री ने कहा, “दुश्मन के उड़ने वाले यंत्रों को निशाना बनाया गया और वे अब जल रहे हैं। यह अमेरिकी सेना की खोखली ताकत और अपमानजनक हार को उजागर करता है।”

ट्रंप ने अपने पोस्ट में दावा किया कि दोनों क्रू मेंबर्स (पायलट और दूसरा अधिकारी) को बचाया गया है। उन्होंने कहा कि पहला क्रू मेंबर शुक्रवार को बचाया गया था, जबकि दूसरे को रात के अंधेरे में पहाड़ी इलाके से निकाला गया। ट्रंप ने ऑपरेशन को “मिरेकुलस” बताया और कहा कि इसमें दर्जनों एयरक्राफ्ट शामिल थे, लेकिन कोई अमेरिकी सैनिक हताहत नहीं हुआ।

ईरान की तुलना 1980 के ऑपरेशन ईगल क्लॉ से

ईरानी सरकारी टीवी और IRGC ने इस घटना की तुलना 1980 के ऑपरेशन ईगल क्लॉ से की है। उस समय जिमी कार्टर प्रशासन ने तेहरान में अमेरिकी दूतावास में बंधक बनाए गए 52 अमेरिकियों को बचाने के लिए ऑपरेशन चलाया था, जो पूरी तरह असफल रहा था। डेजर्ट वन में हेलीकॉप्टर क्रैश होने से 8 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे और मिशन को बीच में ही रोकना पड़ा था।

ईरान इस तुलना से अमेरिका को यह संदेश दे रहा है कि 46 साल बाद भी उसकी रेस्क्यू क्षमता ईरानी क्षेत्र में असफल साबित हो रही है। ईरानी मीडिया ने इसे “ट्रंप की हार का प्रयास” करार दिया है।

पृष्ठभूमि: F-15E फाइटर जेट का शूटडाउन

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब ईरान ने दावा किया कि उसने दक्षिण-पश्चिमी ईरान में एक अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट को मार गिराया। ईरानी मीडिया ने wreckage की तस्वीरें जारी कीं। अमेरिका ने शुरू में पुष्टि नहीं की, लेकिन बाद में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।

ईरान ने पायलट को पकड़ने के लिए स्थानीय लोगों को इनाम की घोषणा भी की थी। अमेरिका ने विशेष बलों, ड्रोन और हवाई सहायता से मिशन चलाया। ट्रंप ने दावा किया कि दोनों क्रू मेंबर्स सुरक्षित हैं, जबकि ईरान कह रहा है कि रेस्क्यू पूरी तरह विफल रहा और कई अमेरिकी एयरक्राफ्ट नष्ट हो गए।

 दोनों पक्षों के दावों में विरोधाभास

- अमेरिकी पक्ष: मिशन सफल, दोनों क्रू मेंबर्स बचाए गए, कोई हताहत नहीं, “सबसे साहसी ऑपरेशन”।
- ईरानी पक्ष: मिशन पूरी तरह नाकाम, कई अमेरिकी विमान (C-130 और ब्लैक हॉक) मार गिराए गए, ट्रंप हार छिपा रहे हैं।

यह विरोधाभासी दावे युद्ध के प्रचार युद्ध को और तेज कर रहे हैं। दोनों देश एक-दूसरे पर “झूठ फैलाने” का आरोप लगा रहे हैं। स्वतंत्र स्रोत अभी तक इन दावों की पुष्टि या खंडन नहीं कर पाए हैं।

 क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव

यह घटना ईरान-अमेरिका संघर्ष को और गहरा बना रही है। 
- सैन्य स्तर पर: रेस्क्यू मिशन के दौरान हुई कथित मुठभेड़ से तनाव बढ़ा है। ईरान अपनी एयर डिफेंस और ग्राउंड फोर्सेज की ताकत दिखाने का दावा कर रहा है।
- राजनीतिक स्तर पर: ट्रंप प्रशासन घरेलू स्तर पर इस मिशन को सफलता के रूप में पेश कर रहा है, जबकि ईरान इसे अमेरिकी “अपमानजनक हार” बता रहा है।
- मानवीय और रणनीतिक प्रभाव: अगर अमेरिकी पायलट वाकई ईरानी कब्जे में होते तो POW (Prisoner of War) संकट पैदा हो सकता था। बचाव से यह संकट टला, लेकिन प्रचार युद्ध जारी है।

सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे ऑपरेशन बेहद जोखिम भरे होते हैं। 1980 के ईगल क्लॉ की तरह यह भी भविष्य में सैन्य रणनीति और संयुक्त अभियानों के लिए सबक बन सकता है।

सच्चाई का इंतजार

ट्रंप और ईरानी अधिकारियों के बयानों से स्पष्ट है कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। अमेरिका कह रहा है कि उसके सैनिक सुरक्षित हैं, जबकि ईरान कह रहा है कि उसने दुश्मन के कई विमान नष्ट कर दिए।

यह घटना दिखाती है कि युद्ध के मैदान में सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि नैरेटिव (कथा) भी कितना महत्वपूर्ण हो जाता है। दुनिया इस वक्त दोनों पक्षों के दावों की सच्चाई का इंतजार कर रही है।

क्या यह रेस्क्यू मिशन वाकई “साहसी सफलता” था या “अपमानजनक हार”? समय और स्वतंत्र जांच ही अंतिम फैसला करेगी। लेकिन फिलहाल मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है और दोनों देश एक-दूसरे को घेरने की रणनीति पर अड़े हुए हैं।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 5,2026