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Thursday, 23 April 2026

खड़गे का 'टैक्स टेररिज्म' बयान या मोदी को 'आतंकवादी' कहना? चुनाव आयोग का 24 घंटे का नोटिस और कांग्रेस का तीखा जवाब

खड़गे का 'टैक्स टेररिज्म' बयान या मोदी को 'आतंकवादी' कहना? चुनाव आयोग का 24 घंटे का नोटिस और कांग्रेस का तीखा जवाब
-Friday World-April 24,2026 
चुनावी मौसम में राजनीतिक बयानबाजी अक्सर विवादों का कारण बन जाती है। हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में तूफान खड़ा कर दिया। चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और चुनावी कार्यक्रम के दौरान खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा था कि "मोदी आतंकवाद फैला रहे हैं"। बीजेपी ने इसे प्रधानमंत्री को "आतंकवादी" कहने के रूप में लिया और चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई। 

चुनाव आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को **24 घंटे** के अंदर जवाब देने का सख्त नोटिस जारी किया। इस नोटिस को लेकर कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया है। पार्टी ने न केवल समय की कमी पर सवाल उठाया, बल्कि आयोग पर पक्षपात और औपचारिकता निभाने का आरोप भी लगाया। यह घटना वर्तमान चुनावी आचार संहिता (Model Code of Conduct) और राजनीतिक भाषा की मर्यादा पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।

### क्या था खड़गे का मूल बयान?

तमिलनाडु में AIADMK-BJP गठबंधन की आलोचना करते हुए खड़गे ने कहा था – "वे मोदी के साथ कैसे जुड़ सकते हैं? वह आतंकवादी हैं। उनकी पार्टी समानता और न्याय में विश्वास नहीं करती।" बाद में सफाई देते हुए खड़गे ने स्पष्ट किया:

> "मैंने प्रधानमंत्री को आतंकवादी नहीं कहा। मैंने कहा कि 'टैक्स टेररिज्म' हो रहा है। ईडी, इनकम टैक्स और सीबीआई छापे मार रही हैं। यह आतंकवाद प्रधानमंत्री करा रहे हैं। वे लोगों को डरा रहे हैं, चुप कराने की कोशिश कर रहे हैं और चुनाव में उन्हें हराने की कोशिश कर रहे हैं।"

खड़गे का तर्क था कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं और उम्मीदवारों को डराने के लिए किया जा रहा है, जिसे उन्होंने "टैक्स टेररिज्म" या "एजेंसी टेररिज्म" का नाम दिया। लेकिन बीजेपी ने इसे सीधे प्रधानमंत्री को "आतंकवादी" कहने के रूप में पेश किया और इसे चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन बताया।

### चुनाव आयोग का एक्शन

बीजेपी के कई नेताओं, जिनमें केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और निर्मला सीतारमण शामिल थे, ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई। आयोग ने इसे "अत्यधिक आपत्तिजनक" और Model Code of Conduct का prima facie उल्लंघन मानते हुए खड़गे को नोटिस जारी किया। नोटिस में 24 घंटे के अंदर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया, अन्यथा उचित कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

यह नोटिस चुनावी राज्यों (खासकर तमिलनाडु) में प्रचार के दौरान जारी किया गया, जब राजनीतिक तापमान पहले से ही ऊंचा है।

### कांग्रेस का जवाब – समय कम है, पक्षपात है

कांग्रेस ने नोटिस का जवाब देते हुए कई गंभीर आरोप लगाए:

1. **समय की कमी**: पार्टी ने कहा कि खड़गे कई चुनावी अभियानों में व्यस्त हैं। मात्र 24 घंटे का समय जवाब तैयार करने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने एक हफ्ते का समय मांगा है।

2. **संदर्भ की अनदेखी**: कांग्रेस का आरोप है कि बयान के पूरे संदर्भ को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। "टैक्स टेररिज्म" शब्द को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है ताकि खड़गे के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता निकाला जा सके।

3. **औपचारिकता निभाना**: पार्टी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि यह महज औपचारिकता निभाने का मामला है। "नॉन-एप्लीकेशन ऑफ माइंड" (दिमाग का इस्तेमाल न करना) जैसा शब्द इस्तेमाल करते हुए कांग्रेस ने कहा कि आयोग पक्षपाती रवैया अपना रहा है।

4. **दोहरे मापदंड**: कांग्रेस ने याद दिलाया कि उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज कराई थीं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पार्टी का सवाल है – जब सत्ता पक्ष के बयानों पर आयोग चुप रहता है तो विपक्ष पर इतनी तेजी क्यों?

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश और अन्य नेताओं ने भी आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

### राजनीतिक प्रतिक्रिया और माहौल

बीजेपी ने खड़गे के बयान को "अत्यंत निंदनीय" बताया। पार्टी नेताओं ने कहा कि जो नेता आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं, उन्हें आतंकवादी कहना लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ है। अमित शाह और अन्य नेताओं ने भी इस पर तीखा हमला बोला।

दूसरी ओर, कांग्रेस ने इसे "बीजेपी की साजिश" और "विपक्ष को दबाने की कोशिश" बताया। पार्टी का दावा है कि केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग विपक्षी दलों को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है।

यह विवाद चुनाव आयोग की निष्पक्षता, राजनीतिक भाषा की सीमाओं और Model Code of Conduct के प्रभावी क्रियान्वयन पर बहस छेड़ता है।

### चुनाव आचार संहिता और भाषा की मर्यादा

Model Code of Conduct चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों और नेताओं पर कई प्रतिबंध लगाता है। इसमें व्यक्तिगत हमले, जाति-धर्म आधारित बयान और अपमानजनक भाषा से बचने की सलाह दी जाती है। 

खड़गे मामला इस बात को रेखांकित करता है कि "आतंकवाद" जैसे गंभीर शब्दों का इस्तेमाल कितना संवेदनशील हो सकता है। भले ही संदर्भ "टैक्स टेररिज्म" हो, लेकिन शब्दों का सीधा अर्थ जनता के मन में अलग प्रभाव डालता है। 

चुनाव आयोग अक्सर ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई करता है ताकि चुनावी माहौल खराब न हो। लेकिन विपक्षी दलों का आरोप है कि यह कार्रवाई चयनात्मक होती है।

### क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि:
- चुनावी समय में ऐसे बयान दोनों पक्षों से आते रहते हैं।
- आयोग को सभी शिकायतों पर समान रूप से ध्यान देना चाहिए।
- भाषा की मर्यादा बनाए रखना सभी दलों की जिम्मेदारी है, क्योंकि यह लोकतंत्र की नींव को प्रभावित करता है।

खड़गे की सफाई के बावजूद विवाद थमा नहीं है। कांग्रेस ने जवाब दाखिल कर दिया है, अब आयोग का अगला कदम क्या होगा, यह देखना बाकी है।

### निष्कर्ष – लोकतंत्र में बहस की सीमाएं

यह घटना भारतीय राजनीति की वर्तमान स्थिति को दर्शाती है। जहां एक ओर विपक्ष सत्ता पक्ष पर एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाता है, वहीं सत्ता पक्ष विपक्ष को "अपमानजनक भाषा" का इस्तेमाल करने का दोषी ठहराता है। 

चुनाव आयोग जैसे संस्थानों की निष्पक्षता बनाए रखना लोकतंत्र के लिए जरूरी है। साथ ही, राजनीतिक नेता भी शब्दों का चयन सावधानी से करें, क्योंकि उनके बयान लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंचते हैं और चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं।

समझदार मतदाता इन विवादों से परे जाकर मुद्दों – विकास, रोजगार, महंगाई और शासन – पर ध्यान केंद्रित करेंगे। लेकिन बयानबाजी की यह जंग चुनावी लोकतंत्र की सजीवता भी दिखाती है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 24,2026