-Friday World-April 5,2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में 'रिजीम चेंज' (सत्ता परिवर्तन) का बड़ा दावा किया था, लेकिन अब खुद उनकी सत्ता घरेलू मोर्चे पर बुरी तरह डगमगा रही है। फरवरी 2026 में शुरू हुए ईरान युद्ध को पांच हफ्ते से ज्यादा हो चुके हैं और इसके आर्थिक परिणाम अब अमेरिकी जनता पर भारी पड़ रहे हैं। पेट्रोल-डीजल और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में तेज उछाल, महंगाई का बढ़ता बोझ और युद्ध की अनिश्चितता ने ट्रंप की लोकप्रियता को भारी नुकसान पहुंचाया है।
नवीनतम सर्वेक्षणों के अनुसार, ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग गिरकर मात्र 36% रह गई है, जबकि अस्वीकृति (डिसअप्रूवल) 57% तक पहुंच गई है। यह उनके दूसरे कार्यकाल की सबसे निचली सतह है। अर्थव्यवस्था, महंगाई और युद्ध की हैंडलिंग को लेकर जनता में गहरा असंतोष फैल रहा है।
युद्ध का आर्थिक बोझ और जनता का रोष
ईरान युद्ध ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में तनाव के कारण तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत 4 डॉलर प्रति गैलन के पार पहुंच गई है, जो कई वर्षों का उच्चतम स्तर है। इससे आम अमेरिकी परिवारों पर भारी बोझ पड़ रहा है।
पोल्स बताते हैं कि लगभग 60% से ज्यादा अमेरिकी इस युद्ध के खिलाफ हैं। CNN, Reuters/Ipsos और Quinnipiac जैसे प्रमुख सर्वेक्षणों में साफ दिख रहा है कि जनता को डर है कि यह लड़ाई लंबी खिंच गई तो आर्थिक संकट और गहरा हो जाएगा। यहां तक कि ट्रंप के अपने समर्थक आधार में भी महंगाई और ऊर्जा संकट को लेकर बेचैनी बढ़ रही है। कई स्वतंत्र मतदाता (Independents) अब ट्रंप से दूर हो रहे हैं।
जनता का मानना है कि ईरान में 'रिजीम चेंज' का लक्ष्य हासिल नहीं हुआ, जबकि युद्ध के खर्च और परिणाम अमेरिकी टैक्सपेयर्स पर पड़ रहे हैं। ट्रंप बार-बार कह रहे हैं कि "रिजीम चेंज हो चुका है" क्योंकि कई ईरानी नेता मारे गए, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की सत्ता संरचना अभी भी मजबूत है और नया नेतृत्व भी उसी विचारधारा का है।
कैबिनेट में बड़ा भूचाल? तुलसी गब्बार्ड और हॉवर्ड लुटनिक पर खतरा
व्हाइट हाउस के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप अपनी कैबिनेट में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहे हैं। हाल ही में अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी को हटाए जाने के बाद अब नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गब्बार्ड और **कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक** पर सवाल उठ रहे हैं।
ट्रंप गब्बार्ड की परफॉर्मेंस से नाखुश बताए जा रहे हैं, खासकर ईरान से जुड़ी इंटेलिजेंस रिपोर्टिंग और उनकी कुछ पुरानी टिप्पणियों को लेकर। वहीं लुटनिक पर जेफ्री एपस्टीन से जुड़े पुराने विवाद फिर से उछले हैं और उनकी व्यावसायिक निर्णय क्षमता पर भी सवाल हैं।
व्हाइट हाउस के कुछ अधिकारी कह रहे हैं कि ट्रंप "बहुत गुस्से" में हैं और मिडटर्म इलेक्शन्स से पहले कैबिनेट को "साफ-सुथरा" बनाना चाहते हैं। हालांकि, कुछ सलाहकार बड़े पैमाने के शेकअप से बचने की सलाह दे रहे हैं क्योंकि इससे राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ सकती है।
मीडिया कवरेज से नाराज ट्रंप
ट्रंप मीडिया कवरेज से बेहद नाराज हैं। उनका आरोप है कि मुख्यधारा के मीडिया ने ईरान युद्ध को "गलत तरीके से" पेश किया है और सिर्फ नकारात्मक पहलुओं पर फोकस किया है। उन्होंने अपनी टीम को सख्त निर्देश दिए हैं कि सरकार की "सकारात्मक उपलब्धियों" को ज्यादा प्रमोट किया जाए।
लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि सिर्फ टीम बदलने या मीडिया पर हमला करने से जनता का गुस्सा शांत नहीं होगा। अर्थव्यवस्था पर असर, युद्ध की अनिश्चितता और बढ़ती महंगाई जैसे मुद्दे ट्रंप के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं।
आगे क्या?
ट्रंप ने हाल ही में कहा है कि अमेरिका ईरान से "जल्दी बाहर" निकलने वाला है और "स्पॉट हिट्स" के अलावा ज्यादा कुछ नहीं करना पड़ेगा। लेकिन जनता और कई रिपब्लिकन सांसद भी युद्ध के लंबे खिंचाव से चिंतित हैं। मिडटर्म इलेक्शन्स नजदीक आ रहे हैं और अगर अर्थव्यवस्था सुधरती नहीं दिखी तो ट्रंप की पार्टी को भारी नुकसान हो सकता है।
यह स्थिति दिखाती है कि विदेश नीति के बड़े फैसले घरेलू मोर्चे पर कितना असर डाल सकते हैं। ट्रंप ने ईरान में सत्ता परिवर्तन का सपना देखा था, लेकिन फिलहाल व्हाइट हाउस में खुद उनकी सत्ता स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं।
अमेरिकी जनता अब स्पष्ट संदेश दे रही है – युद्ध की कीमत महंगाई और आर्थिक अस्थिरता के रूप में चुकानी पड़ रही है। ट्रंप के लिए अब चुनौती है कि वे इस संकट से कैसे निकलते हैं और अपनी लोकप्रियता को फिर से बहाल करते हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 5,2026