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Sunday, 5 April 2026

थार रेगिस्तान उगलने लगा ‘काला सोना’!भारत के रेगिस्तान में तेल का रिकॉर्ड फव्वारा: युद्ध के बीच 70% उछाल, ऊर्जा सुरक्षा को मिला नया बल!

थार रेगिस्तान उगलने लगा ‘काला सोना’!भारत के रेगिस्तान में तेल का रिकॉर्ड फव्वारा: युद्ध के बीच 70% उछाल, ऊर्जा सुरक्षा को मिला नया बल!
-Friday World-April 6,2026 
जब पूरी दुनिया पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और संभावित होर्मुज संकट से तेल की कीमतों में उछाल को लेकर चिंतित है, तब भारत के थार रेगिस्तान से बेहद अच्छी खबर आई है। सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने राजस्थान के जैसलमेर-बाघेवाला क्षेत्र में कच्चे तेल के उत्पादन में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की है। दैनिक उत्पादन पिछले साल के 705 बैरल प्रति दिन से बढ़कर 1,202 बैरल प्रति दिन हो गया है – यानी लगभग 70 प्रतिशत का शानदार उछाल।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस क्षेत्र से कुल 43,773 मीट्रिक टन कच्चा तेल निकाला गया, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा मात्र 32,787 मीट्रिक टन था। यह सफलता न सिर्फ घरेलू उत्पादन बढ़ाने में मील का पत्थर साबित हुई है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम भी है।

### क्यों महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि?
भारत अपनी कुल तेल जरूरत का बड़ा हिस्सा (लगभग 85%) आयात पर निर्भर है। ईरान-इजरायल संघर्ष और उसके कारण वैश्विक सप्लाई चेन में आने वाली अनिश्चितता के बीच घरेलू उत्पादन में वृद्धि देश के लिए बड़ी राहत है। थार रेगिस्तान का यह तेल क्षेत्र अब भारत के आत्मनिर्भर ऊर्जा अभियान का प्रतीक बन गया है।

 आधुनिक तकनीक ने कर दिखाया कमाल
बाघेवाला तेल क्षेत्र भारी (heavy) कच्चे तेल के लिए जाना जाता है, जिसकी चिपचिपाहट (viscosity) ज्यादा होने के कारण पारंपरिक तरीकों से निकालना मुश्किल था। ऑयल इंडिया ने यहां अत्याधुनिक थर्मल एन्हांस्ड ऑयल रिकवरी (EOR) तकनीकों का इस्तेमाल किया है। सबसे अहम है साइक्लिक स्टीम स्टिमुलेशन (Cyclic Steam Stimulation - CSS)।

इस तकनीक में भाप को उच्च दबाव पर कुओं में इंजेक्ट किया जाता है, जो चट्टानों में फंसे घने तेल को पतला करके बाहर निकालने में मदद करती है। कंपनी ने इस वर्ष 19 कुओं में CSS ऑपरेशन पूरा किया (पिछले साल से 72% ज्यादा) और 13 नए कुएं भी ड्रिल किए। इसके अलावा फिशबोन ड्रिलिंग और इलेक्ट्रिक डाउनहोल हीटर जैसी नवीन पद्धतियों का भी उपयोग किया गया, जिससे उत्पादन क्षमता में जबरदस्त सुधार हुआ।

जोधपुर सैंडस्टोन फॉर्मेशन से मिला यह रिकॉर्ड उत्पादन बताता है कि सही तकनीक और निरंतर प्रयास से रेगिस्तान की चुनौतीपूर्ण भूगर्भीय संरचना को भी जीता जा सकता है।

 तेल कैसे पहुंचता है रिफाइनरी तक?
बाघेवाला (जैसलमेर) से निकाला गया कच्चा तेल टैंकरों के जरिए गुजरात के मेहसाणा स्थित ONGC केंद्र पहुंचाया जाता है। वहां से पाइपलाइन के माध्यम से इसे वड़ोदरा (कोयली) स्थित इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की रिफाइनरी भेजा जाता है, जहां इसे प्रोसेस करके पेट्रोल, डीजल और अन्य उत्पादों में बदला जाता है।

यह सप्लाई चेन कुशल और लागत प्रभावी है, जो घरेलू उत्पादन को राष्ट्रीय स्तर पर उपयोगी बनाती है।

 बैकग्राउंड: बाघेवाला तेल क्षेत्र
यह क्षेत्र 1991 में खोजा गया था और 200.26 वर्ग किलोमीटर में फैला है। 2017 से यहां भारी कच्चे तेल का उत्पादन शुरू हुआ। वर्तमान में क्षेत्र में 52 कुएं हैं, जिनमें से 33 सक्रिय रूप से उत्पादन कर रहे हैं। थार रेगिस्तान की कठिन परिस्थितियां (रेतीली मिट्टी, उच्च तापमान) के बावजूद ऑयल इंडिया की टीम ने लगातार नवाचार से सफलता हासिल की है।

 वैश्विक संदर्भ में भारत की मजबूती
वर्तमान में पश्चिम एशिया में तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (तेल निर्यात का प्रमुख रास्ता) प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में भारत के लिए घरेलू स्रोतों से उत्पादन बढ़ाना रणनीतिक रूप से बहुत जरूरी है। यह उपलब्धि न केवल आयात बिल पर बोझ कम करेगी, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा को भी नई दिशा देगी।

ऑयल इंडिया के इस प्रयास से साफ है कि आत्मनिर्भर भारत का विजन सिर्फ नारा नहीं, बल्कि व्यावहारिक कदमों से साकार हो रहा है। रेगिस्तान में तेल का फव्वारा फूटना इसी का प्रतीक है।

 आगे की राह
कंपनी अब और अधिक कुओं में CSS और अन्य EOR तकनीकों का विस्तार करने की योजना बना रही है। यदि यह गति बनी रही, तो आने वाले वर्षों में राजस्थान के थार क्षेत्र से और बड़ा योगदान मिल सकता है। सरकार की प्रोत्साहन नीतियां, निवेश और तकनीकी सहयोग से यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

यह खबर उन सभी के लिए प्रेरणा है जो मानते हैं कि चुनौतियों के बीच भी नवाचार और संकल्प से असंभव को संभव बनाया जा सकता है। थार का रेगिस्तान अब सिर्फ रेत और ऊंटों का नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती ऊर्जा शक्ति का गवाह भी बन गया है।

मोदी है तो मुमकिन है– यह न सिर्फ एक नारा है, बल्कि ऐसे प्रयासों से सिद्ध भी हो रहा है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-April 6,2026