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Thursday, 2 April 2026

ट्रंप का ईरान युद्ध भाषण: 'गुंडा-मवाली' स्टाइल या दिमागी तनाव? अमेरिकी सांसदों में फूट, शूमर बोले 'इतिहास की सबसे बड़ी गलती', "ग्राहम ने कहा 'निर्णायक भुल"

ट्रंप का ईरान युद्ध भाषण: 'गुंडा-मवाली' स्टाइल या दिमागी तनाव? अमेरिकी सांसदों में फूट, शूमर बोले 'इतिहास की सबसे बड़ी गलती', "ग्राहम ने कहा 'निर्णायक भुल"-Friday World-April 2,2026 
वॉशिंगटन — राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हालिया ईरान युद्ध पर राष्ट्र को संबोधन अमेरिकी राजनीति में तूफान ला गया है। भाषण में ट्रंप ने ईरान को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खोला गया तो अमेरिका ईरान के इलेक्ट्रिक ग्रिड, पावर प्लांट्स और ऊर्जा सुविधाओं को "स्टोन एज" में भेज देगा। उन्होंने ईरान को "थगिश" (गुंडागर्दी भरा) बताया और चेतावनी दी कि समझौता न होने पर "हर चीज को नष्ट" कर दिया जाएगा।

 यह भाषण कई डेमोक्रेट सांसदों को "रैम्बलिंग, डिसजॉइंटेड एंड पैथेटिक" (बिखरा हुआ, असंगत और दयनीय) लगा, जबकि रिपब्लिकन इसे "मजबूत और निर्णायक" बता रहे हैं। सवाल उठ रहा है — क्या ईरान की जवाबी कार्रवाइयों (मिसाइल हमले, क्षेत्रीय हमले) ने ट्रंप की बोलने की शैली और दिमागी हालत को प्रभावित किया है? या यह जानबूझकर "गुंडा-मवाली" जैसा आक्रामक अंदाज है? 

 ट्रंप का भाषण: आक्रामक अल्टीमेटम या बिखरा हुआ संदेश? 

ट्रंप के लगभग 19-20 मिनट के भाषण में मुख्य बातें थीं — ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षा को कुचलना, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलवाना और "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" के तहत अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों की सफलता का दावा। उन्होंने कहा, "अगर आप समझौता नहीं करते, तो हम उन सभी चीजों को नष्ट कर देंगे जिनकी आपको जरूरत होगी।" भाषण में "स्टोन एज" शब्द का इस्तेमाल और ईरान को "थग" कहना कई लोगों को गुंडागर्दी भरा लगा।

 ईरान की जवाबी कार्रवाइयों (गल्फ देशों पर हमले, तेल टैंकरों पर खतरा) के बाद ट्रंप का यह संबोधन आया, जिसमें वे पहले "2-3 हफ्तों में युद्ध खत्म" कहते रहे, फिर अचानक और हमलों की धमकी दी। कुछ आलोचक इसे दिमागी तनाव या युद्ध के दबाव का असर बता रहे हैं, जबकि समर्थक इसे "स्ट्रॉन्ग लीडरशिप" मानते हैं। 

 चक शूमर की तीखी आलोचना: "इतिहास की सबसे बड़ी नीतिगत गलती" 

न्यूयॉर्क के सीनेट माइनॉरिटी लीडर चक शूमर (डेमोक्रेट) ने भाषण पर सबसे कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "डोनाल्ड ट्रंप के ईरान से जुड़े फैसले हमारे देश के इतिहास की सबसे बड़ी नीतिगत गलतियों में गिने जाएंगे। क्या कभी कोई राष्ट्रपति का युद्ध भाषण इतना बिखरा हुआ, असंगत और दयनीय रहा होगा?" 

शूमर ने आरोप लगाया कि ट्रंप उद्देश्यों को स्पष्ट नहीं बता पाए, सहयोगियों को दूर कर रहे हैं और अमेरिकी लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं — महंगाई, स्वास्थ्य सेवा, घरेलू मुद्दों — को नजरअंदाज कर रहे हैं। कई डेमोक्रेट सांसदों ने शूमर का साथ दिया। उन्होंने भाषण को "रैम्बलिंग" बताया और वार पावर्स रेजोल्यूशन लाकर ट्रंप की सैन्य कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की। कुछ ने इसे "रिकलेस" और "बिना कांग्रेस की मंजूरी" वाला युद्ध करार दिया। 

डेमोक्रेट्स का कहना है कि ईरान की जवाबी हमलों के बाद ट्रंप का भाषण और ज्यादा आक्रामक और बिखरा हुआ लग रहा है, जो युद्ध के दबाव को दर्शाता है। 

 ग्राहम ने ट्रंप की इलेक्ट्रिक ग्रिड पर हमले की चेतावनी को सही ठहराते हुए कहा, "अगर आप समझौता नहीं करते, तो हम उन सभी चीजों को नष्ट कर देंगे जिनकी आपको जरूरत होगी। यह इस अभियान का निर्णायक भुल है।" 

कांग्रेस में गहरी दरार अमेरिकी कांग्रेस में प्रतिक्रियाएं पूरी तरह पार्टी लाइनों पर बंटी हुई हैं: 

- रिपब्लिकन पक्ष: ज्यादातर सांसदों ने ट्रंप का समर्थन किया। उन्होंने ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षा, बैलिस्टिक मिसाइलें और क्षेत्रीय आतंकवाद को "अस्वीकार्य खतरा" बताया। कुछ ने भाषण को "मजबूत संदेश" कहा, भले ही शैली आक्रामक रही हो। 

- डेमोक्रेट पक्ष: डेमोक्रेट्स ने भाषण को "गुंडा-मवाली" जैसा, बिना रणनीति वाला और युद्ध को लंबा खींचने वाला बताया। उन्होंने पूछा कि ईरान की जवाबी कार्रवाइयों (जिससे तेल की कीमतें बढ़ीं और क्षेत्रीय अस्थिरता फैली) ने ट्रंप की सोच और बोलने के तरीके को प्रभावित तो नहीं किया?

 कुछ स्वतंत्र आवाजें, जैसे सीनेटर रैंड पॉल, ने कांग्रेस की भूमिका मजबूत करने की मांग की। हाउस और सीनेट में **वार पावर्स रेजोल्यूशन** पर बहस चल रही है, जिसे रिपब्लिकन बहुमत ने अभी तक रोक रखा है। 

क्या भाषण की शैली 'गुंडा-मवाली' जैसी थी? कई डेमोक्रेट और कुछ स्वतंत्र विश्लेषकों ने ट्रंप के शब्दों — "स्टोन एज", "थगिश", "हर चीज नष्ट कर देंगे" — को गुंडागर्दी भरा बताया। भाषण का बिखरा हुआ अंदाज, बार-बार दोहराव और स्पष्ट एग्जिट स्ट्रैटेजी का अभाव इसे "मेजर प्रेसिडेंशियल स्पीच" की बजाय "स्ट्रीट-फाइट" जैसा लगाता है।

 ईरान की जवाबी हमलों (गल्फ देशों पर मिसाइलें, क्षेत्रीय अस्थिरता) के बाद ट्रंप का यह संबोधन आया। कुछ का मानना है कि लगातार दबाव, तेल की ऊंची कीमतें और घरेलू आलोचना ने ट्रंप की मानसिक स्थिति को प्रभावित किया हो, जिससे भाषण और ज्यादा आक्रामक और असंगत हो गया। 

युद्ध का असर और आगे क्या? यह भाषण अमेरिका में घरेलू राजनीति को भी प्रभावित कर रहा है। तेल की कीमतें बढ़ने से आम अमेरिकी परेशान हैं। डेमोक्रेट्स इसे "ट्रंप की रिकलेस फॉरेन पॉलिसी" का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि रिपब्लिकन्स "ईरान को कमजोर करने का साहसी कदम" मान रहे हैं।

 ईरान ने जवाबी हमलों की धमकी दी है और कहा कि पावर प्लांट्स पर हमला पूरे क्षेत्र को अंधेरे में डाल सकता है। ट्रंप ने कहा कि युद्ध "जल्द खत्म" हो सकता है, लेकिन अगर समझौता नहीं हुआ तो हमले तेज होंगे।

विभाजित अमेरिका, अनिश्चित युद्ध ट्रंप का ईरान भाषण न सिर्फ तेहरान को, बल्कि अमेरिकी कांग्रेस को भी बांट गया है। चक शूमर इसे "इतिहास की सबसे बड़ी गलती" बता रहे हैं तो लिंडसे ग्राहम "निर्णायक भुल"। भाषण की आक्रामक शैली कई को "गुंडा-मवाली" जैसी लगी, 

ईरान की जवाबी कार्रवाइयों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। क्या यह दबाव ट्रंप की सोच को प्रभावित कर रहा है? या यह रणनीतिक "साइकोलॉजिकल वारफेयर" है? आने वाले दिनों में कांग्रेस की कार्रवाई, तेल की कीमतें और क्षेत्रीय घटनाक्रम इसका जवाब देंगे। 

अमेरिकी लोकतंत्र में विदेश नीति भी पार्टी पॉलिटिक्स का शिकार हो रही है। शांति वार्ता की उम्मीद बनी हुई है, लेकिन तनाव और अनिश्चितता जारी है। युद्ध में मानवीय संकट और आर्थिक नुकसान बढ़ रहा है — अंततः बातचीत और कूटनीति ही स्थायी समाधान हो सकती है। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-April 2,2026