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Wednesday, 15 April 2026

किम जोंग उन ने नेवल डिस्ट्रॉयर 'चो ह्योन' से लॉन्च की स्ट्रेटेजिक क्रूज़ और एंटी-शिप मिसाइलें: उत्तर कोरिया की बढ़ती समुद्री ताकत का नया प्रदर्शन

किम जोंग उन ने नेवल डिस्ट्रॉयर 'चो ह्योन' से लॉन्च की स्ट्रेटेजिक क्रूज़ और एंटी-शिप मिसाइलें: उत्तर कोरिया की बढ़ती समुद्री ताकत का नया प्रदर्शन
-Friday World-April 15,2026 
प्योंगयांग, 15 अप्रैल 2026 – उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने व्यक्तिगत रूप से देश के नए और शक्तिशाली नौसैनिक डिस्ट्रॉयर 'चो ह्योन' से लॉन्च की गई स्ट्रेटेजिक क्रूज़ मिसाइलों और **एंटी-शिप (एंटी-वारशिप) मिसाइलों** के सफल परीक्षण की देखरेख की। कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) ने मंगलवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि यह परीक्षण प्योंगयांग की नौसेना को और अधिक घातक और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

रविवार 12 अप्रैल 2026 को पश्चिमी समुद्र (येलो सी) के ऊपर किए गए इस ऑपरेशनल एफिशिएंसी टेस्ट में दो स्ट्रेटेजिक क्रूज़ मिसाइलें और तीन एंटी-शिप मिसाइलें दागी गईं। KCNA के अनुसार, क्रूज़ मिसाइलें लगभग 7,869 से 7,920 सेकंड (यानी करीब दो घंटे 10 मिनट से अधिक) तक उड़ान भरने के बाद पूर्व-निर्धारित लक्ष्यों पर अत्यंत सटीकता ("ultra-precision hit accuracy") से हमला करने में सफल रहीं। वहीं, एंटी-शिप मिसाइलें 1,960 से 1,973 सेकंड (लगभग 33 मिनट) की उड़ान के बाद लक्ष्य को भेदने में कामयाब हुईं।

 परीक्षण का उद्देश्य और तकनीकी सफलता
यह परीक्षण मुख्य रूप से डिस्ट्रॉयर के इंटीग्रेटेड वेपन कमांड सिस्टम की जांच, क्रू के मिसाइल लॉन्च प्रक्रिया में प्रशिक्षण और अपग्रेडेड नेविगेशन सिस्टम की सटीकता व एंटी-जैमिंग क्षमता को परखने के लिए किया गया। किम जोंग उन वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों और नौसेना कमांडरों के साथ मौजूद रहे और उन्होंने पूरे अभियान का बारीकी से निरीक्षण किया।

राज्य मीडिया में जारी तस्वीरों में किम जोंग उन को डिस्ट्रॉयर के डेक पर खड़े होकर मिसाइल लॉन्च देखते हुए दिखाया गया है। उन्होंने इस मौके पर जोर दिया कि परमाणु निवारक क्षमता को मजबूत करना और नौसेना की त्वरित प्रतिक्रिया की तैयारियों को बढ़ाना उत्तर कोरिया की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
'चो ह्योन' डिस्ट्रॉयर: उत्तर कोरिया की नौसेना का गौरव
'चो ह्योन' (Choe Hyon) क्लास का यह 5,000 टन वर्ग का डिस्ट्रॉयर उत्तर कोरिया का पहला आधुनिक युद्धपोत है, जिसे अप्रैल 2025 में दुनिया के सामने पेश किया गया था। शुरुआती लॉन्च के दौरान इसमें कुछ तकनीकी चुनौतियां आई थीं, लेकिन बाद में इसे पूरी तरह बहाल कर लिया गया। जून 2025 में किम जोंग उन ने घोषणा की थी कि 2026 में दो और ऐसे डिस्ट्रॉयर बनाए जाएंगे और आगे हर साल दो या इससे बेहतर क्लास के जहाजों को कमीशन किया जाएगा।

यह परीक्षण 'चो ह्योन' के हथियार प्रणाली की दूसरी प्रमुख जांच है। इससे पहले मार्च 2026 में भी किम ने इसी जहाज से मिसाइल परीक्षण देखे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया वैश्विक स्तर पर व्यस्तताओं (जैसे यूक्रेन-रूस संघर्ष और मध्य पूर्व की स्थिति) का फायदा उठाकर अपनी नौसेना और परमाणु क्षमताओं को तेजी से विकसित कर रहा है।

 सामरिक महत्व: समुद्र से हमला करने की नई क्षमता
स्ट्रेटेजिक क्रूज़ मिसाइलें पारंपरिक या परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम होती हैं और लंबी दूरी तक सटीक हमला कर सकती हैं। वहीं, एंटी-शिप मिसाइलें दुश्मन के युद्धपोतों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन की गई हैं। इन दोनों को एक साथ एक आधुनिक डिस्ट्रॉयर से लॉन्च करने की क्षमता उत्तर कोरिया को समुद्री युद्ध में मजबूत स्थिति प्रदान करती है।

विश्लेषकों के मुताबिक, यह विकास कोरियाई प्रायद्वीप के आसपास की सुरक्षा स्थिति को प्रभावित कर सकता है। दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान जैसे देश पहले से ही उत्तर कोरिया की मिसाइल गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं।

किम जोंग उन की रणनीति: नौसेना का विस्तार
किम जोंग उन लगातार उत्तर कोरिया की सशस्त्र सेनाओं, खासकर नौसेना को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने हाल के वर्षों में परमाणु-सक्षम पनडुब्बियों, मिसाइलों और अब आधुनिक डिस्ट्रॉयरों पर ध्यान केंद्रित किया है। 'चो ह्योन' क्लास के जहाजों का बेड़ा बढ़ाने की योजना से प्योंगयांग का लक्ष्य है कि वह क्षेत्रीय जल क्षेत्रों में अपनी पहुंच और हमले की क्षमता को कई गुना बढ़ा सके।

KCNA ने रिपोर्ट में किम के हवाले से कहा कि ऐसे परीक्षण न केवल तकनीकी प्रगति दिखाते हैं, बल्कि सैनिकों की लड़ाकू तैयारियों को भी निखारते हैं।

 वैश्विक संदर्भ और प्रतिक्रियाएं
यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब पूर्वोत्तर एशिया में तनाव पहले से मौजूद है। दक्षिण कोरिया और अमेरिका नियमित सैन्य अभ्यास करते रहते हैं, जिसे उत्तर कोरिया अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने उत्तर कोरिया की मिसाइल गतिविधियों की निंदा की है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का हवाला दिया जाता है। हालांकि, प्योंगयांग इन प्रतिबंधों को नजरअंदाज करते हुए अपनी रक्षा क्षमताओं को लगातार बढ़ा रहा है।

 निष्कर्ष: बढ़ती चुनौती
उत्तर कोरिया के इस नवीनतम परीक्षण से साफ है कि किम जोंग उन की सरकार न केवल भूमि-आधारित मिसाइलों बल्कि समुद्री मंचों से भी शक्तिशाली हमले की क्षमता विकसित करने पर पूरा ध्यान दे रही है। 'चो ह्योन' जैसे डिस्ट्रॉयरों का बेड़ा और परमाणु-सक्षम क्रूज़ मिसाइलें भविष्य में क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को और जटिल बना सकती हैं।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 15,2026