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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Wednesday, 15 April 2026

दो चोकपॉइंट्स का जाल: हॉर्मुज बंद, यानबू में सऊदी तेल की बहाली, लेकिन ईरान की चेतावनी – बाब अल-मंदेब एक इशारे में बंद हो सकता है

दो चोकपॉइंट्स का जाल: हॉर्मुज बंद, यानबू में सऊदी तेल की बहाली, लेकिन ईरान की चेतावनी – बाब अल-मंदेब एक इशारे में बंद हो सकता है
-Friday World-April 15,2026 
रियाद/तेहरान/वाशिंगटन, 15 अप्रैल 2026– युद्ध के बाद स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज प्रभावी रूप से बंद होने के बावजूद सऊदी अरब ने अपनी तेल निर्यात क्षमता को पूर्व-युद्ध स्तर पर वापस ला लिया है। देश अब रोजाना 7 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन और निर्यात कर रहा है, जिसे ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए रेड सी के यानबू पोर्ट पर भेजा जा रहा है। लेकिन ईरान के विदेश नीति सलाहकार ने सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी है कि तेहरान बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को ठीक उसी नजरिए से देखता है जैसे वह हॉर्मुज को देखता है – और एक ही इशारे पर अंसारुल्लाह (यमनी स्वतंत्र सेनानी) इसे पूरी तरह बाधित कर सकते हैं।

सऊदी एनर्जी अधिकारियों ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया कि उन्होंने अंसारुल्लाह से वादा लिया है कि वे यानबू से जाने वाले सऊदी जहाजों पर हमला नहीं करेंगे। लेकिन रियाद ने वॉशिंगटन को साफ चेतावनी दी है कि हालात “फ्लूइड” (तरल और अनिश्चित) हैं। अगर ईरान ने और दबाव बढ़ाया तो स्थिति और बिगड़ सकती है।

यह स्थिति मध्य पूर्व में चल रहे तनाव को नई ऊंचाई पर ले जा रही है। एक चोकपॉइंट बंद होने के बाद दूसरे चोकपॉइंट की सुरक्षा अब वैश्विक ऊर्जा बाजार की सबसे बड़ी चिंता बन गई है।

हॉर्मुज बंद: सऊदी की नई रणनीति और यानबू का उदय
युद्ध के दौरान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में आई बाधा ने फारस की खाड़ी से तेल निर्यात को गंभीर रूप से प्रभावित किया। लेकिन सऊदी अरब ने अपनी पुरानी contingency योजना को सक्रिय कर दिया। 746 मील लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन अब पूरी क्षमता – 7 मिलियन बैरल प्रतिदिन – पर चल रही है। इस पाइपलाइन के जरिए कच्चा तेल अबकाइक और अन्य पूर्वी क्षेत्रों से यानबू पोर्ट तक पहुंचाया जा रहा है।

यानबू से निर्यात अब 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन से ऊपर पहुंच गया है, साथ ही रिफाइंड प्रोडक्ट्स का निर्यात भी 7-9 लाख बैरल प्रतिदिन हो रहा है। इससे सऊदी अरब ने उत्पादन को युद्ध से पहले के स्तर पर बहाल कर लिया है। टैंकरों की संख्या यानबू के बाहर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, हालांकि लोडिंग में 4-5 दिन की देरी हो रही है।

यह उपलब्धि सऊदी की इंजीनियरिंग क्षमता और पूर्व नियोजन का प्रमाण है, लेकिन यह पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। यानबू पोर्ट बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के उत्तर में स्थित है, इसलिए रेड सी से निकलने वाला हर टैंकर इस संकीर्ण जलमार्ग से गुजरता है।

 ईरान की सख्त चेतावनी: बाब अल-मंदेब = हॉर्मुज
ईरान के विदेश नीति सलाहकार अली अकबर वेलायती ने खुलकर कहा – “आज प्रतिरोध मोर्चे का एकीकृत कमांड बाब अल-मंदेब को ठीक वैसे ही देखता है जैसे वह हॉर्मुज को देखता है।” उन्होंने आगे चेतावनी दी कि “एक ही इशारे” पर अंसारुल्लाह (यमनी स्वतंत्र सेनानी) इस रूट को पूरी तरह प्रभावित कर सकते हैं।

ईरान का तर्क सरल लेकिन प्रभावी है – अगर अमेरिका और उसके सहयोगी हॉर्मुज में ईरान के तेल निर्यात को रोक रहे हैं, तो तेहरान भी सऊदी के वैकल्पिक रूट को निशाना बना सकता है। बाब अल-मंदेब (गेट ऑफ टियर्स) रोजाना करीब 4-5 मिलियन बैरल तेल और वैश्विक व्यापार का महत्वपूर्ण हिस्सा ले जाता है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और सुएज कैनाल के रास्ते यूरोप-एशिया व्यापार का शॉर्टेस्ट रूट है।

अंसारुल्लाह पहले भी रेड सी में जहाजों पर कार्रवाई कर चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि बाब अल-मंदेब को बंद करना उनके पास एक विकल्प है, जो यमनी संप्रभुता और क्षेत्रीय न्याय की भावना से प्रेरित है।

 सऊदी की चिंता और वॉशिंगटन को चेतावनी
सऊदी अधिकारियों ने WSJ को बताया कि उन्होंने अंसारुल्लाह से लिखित या मौखिक वादा लिया है कि यानबू से जाने वाले उनके टैंकरों पर हमला नहीं होगा। लेकिन रियाद ने अमेरिका को साफ-साफ बताया कि स्थिति “फ्लूइड” है। अगर ईरान ने और दबाव बढ़ाया या स्थिति बिगड़ी तो अंसारुल्लाह का रुख बदल सकता है।

सऊदी के लिए यह बड़ा जोखिम है। अगर बाब अल-मंदेब प्रभावित हुआ तो यानबू से निर्यात रुक जाएगा और सऊदी तेल रेड सी में फंस जाएगा। केप ऑफ गुड होप का लंबा रूट लागत और समय दोनों बढ़ा देगा, जिससे वैश्विक तेल की कीमतें और उछल सकती हैं।

वैश्विक प्रभाव: डबल चोकपॉइंट का खतरा
- तेल आपूर्ति: हॉर्मुज (20-21%) पहले से बंद है। अगर बाब अल-मंदेब भी बाधित हुआ तो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का 25% से ज्यादा हिस्सा प्रभावित हो सकता है।
- कीमतें: तेल पहले से ही ऊंचे स्तर पर है। डबल बाधा से $150-200 प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका है।
- प्रभावित देश: भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोप सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। मुद्रास्फीति बढ़ेगी और आर्थिक विकास पर असर पड़ेगा।
- वैकल्पिक रूट*: सऊदी की पाइपलाइन क्षमता सीमित है। कोई पूरा बैकअप नहीं है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने चेतावनी दी है कि ऐसी स्थिति में आपातकालीन स्टॉक रिलीज भी सीमित समय तक ही राहत दे सकती है।

अंसारुल्लाह की भूमिका: स्वतंत्र लेकिन प्रभावशाली
यमनी स्वतंत्र सेनानी (अंसारुल्लाह) खुद को ईरान के प्रॉक्सी नहीं, बल्कि क्षेत्रीय प्रतिरोध की स्वतंत्र ताकत मानते हैं। उन्होंने पहले भी स्वतंत्र फैसले लिए हैं। अब वे कह रहे हैं कि बाब अल-मंदेब पर उनका नियंत्रण है और जरूरत पड़ने पर वे इसे “यमनी विकल्प” के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।

सऊदी के वादे के बावजूद, अगर ईरान ने और जोर दिया तो अंसारुल्लाह का रुख बदल सकता है। यह सऊदी की सबसे बड़ी चिंता है।

 निष्कर्ष: अनिश्चितता का खेल
सऊदी अरब ने हॉर्मुज बंद होने के बाद यानबू के जरिए अपनी तेल निर्यात क्षमता को 7 मिलियन बैरल प्रतिदिन पर बहाल कर दिखाया है, लेकिन यह राहत अस्थायी लग रही है। ईरान की चेतावनी और बाब अल-मंदेब की संवेदनशीलता ने पूरी स्थिति को फिर से जटिल बना दिया है।

रियाद की वॉशिंगटन को चेतावनी साफ है – हालात फ्लूइड हैं और एक छोटी सी चिंगारी पूरे क्षेत्र को आग में झोंक सकती है। विश्लेषक कहते हैं कि अब कूटनीति और संयम की सबसे ज्यादा जरूरत है। अगर दोनों चोकपॉइंट्स (हॉर्मुज और बाब अल-मंदेब) एक साथ प्रभावित हुए तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में सुनामी आ सकती है।

दुनिया फिलहाल उम्मीद कर रही है कि तनाव कम होगा और दोनों रूट्स पर शांति बहाल होगी। लेकिन ईरान की “एक इशारे” वाली चेतावनी और सऊदी की फ्लूइड स्थिति बताती है कि खेल अभी खत्म नहीं हुआ है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-April 15,2026