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Wednesday, 15 April 2026

युद्ध खत्म करने के लिए हाथ-पैर मारते “आतंकवादी” ट्रंप और नेतन्याहू: हॉर्मुज में अमेरिकी जहाजों की दौड़-भाग, ईरान की चेतावनी और फिर तेज वापसी

युद्ध खत्म करने के लिए हाथ-पैर मारते “आतंकवादी” ट्रंप और नेतन्याहू: हॉर्मुज में अमेरिकी जहाजों की दौड़-भाग, ईरान की चेतावनी और फिर तेज वापसी
-Friday World-April 15,2026
सना/तेहरान/वाशिंगटन, 15 अप्रैल 2026 – मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष को जल्दी खत्म करने की बेचैनी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हाथ-पैर मार रहे हैं। सुबह अमेरिकी नौसेना के जहाज हॉर्मुज स्ट्रेट की ओर तेजी से बढ़े, लेकिन ईरान की सशक्त चेतावनी “आगे आओ, सबको जहन्नुम भेज देते हैं” सुनते ही वे उसी गति से वापस लौट गए। अमेरिका ने बाद में बयान जारी कर कहा – “ना जी, ना… हम तो रूटीन पेट्रोलिंग के लिए आ रहे थे, अब वापस जा रहे हैं।”

यह घटना युद्ध समाप्ति की कोशिशों में अमेरिका-इजरायल गठजोड़ की हताशा को साफ दिखाती है। एक ओर ट्रंप युद्ध को “बहुत जल्द खत्म” होने का दावा कर रहे हैं, दूसरी ओर हॉर्मुज स्ट्रेट पर नाकाबंदी लगाकर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ईरान की दृढ़ता के सामने हर बार पीछे हटना पड़ रहा है।

 सुबह की घटना: अमेरिकी जहाजों की तेज़ रफ्तार और तेज़ वापसी
आज सुबह जब अमेरिकी नौसेना के दो गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर हॉर्मुज स्ट्रेट की ओर बढ़े, तो पूरी दुनिया की नजरें वहीं टिक गईं। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने तुरंत चेतावनी जारी की – “अगर तुम आगे बढ़े तो हम सबको जहन्नुम भेज देंगे।” ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि कोई भी विदेशी युद्धपोत जो हॉर्मुज में घुसने की कोशिश करेगा, उसे नष्ट कर दिया जाएगा।

यह चेतावनी इतनी सख्त और स्पष्ट थी कि अमेरिकी जहाज रुक गए और उसी तेज गति से वापस लौट गए। घटना के कुछ घंटों बाद पेंटागन और व्हाइट हाउस ने संयुक्त बयान जारी किया – “यह कोई आक्रामक कार्रवाई नहीं थी। हमारे जहाज रूटीन नेवल ऑपरेशन के तहत क्षेत्र में थे और अब वापस जा रहे हैं।”

विश्लेषकों का कहना है कि यह “दौड़-भाग” ट्रंप प्रशासन की हताशा को उजागर करती है। पाकिस्तान में हाल ही में हुई अमेरिका-ईरान शांति वार्ता बेनतीजा रही थी। उसके बाद ट्रंप ने हॉर्मुज पर नाकाबंदी लगाने का आदेश दिया, लेकिन ईरान की मजबूत प्रतिक्रिया के सामने अमेरिका को हर बार पीछे हटना पड़ रहा है।
 ट्रंप और नेतन्याहू की बेचैनी: युद्ध खत्म करने की जद्दोजहद
ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि “युद्ध बहुत जल्द खत्म होने वाला है।” उन्होंने दूसरी दौर की बातचीत की संभावना जताई, लेकिन साथ ही ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए नौसैनिक नाकाबंदी को जारी रखने की बात कही। वहीं नेतन्याहू ने कैबिनेट मीटिंग में अमेरिकी नाकाबंदी का पूरा समर्थन किया और कहा कि इजरायल और अमेरिका पूरी तरह समन्वय में हैं।

दोनों नेता लगातार “युद्ध समाप्ति” की बात कर रहे हैं, लेकिन उनके हर कदम से साफ हो रहा है कि वे ईरान को झुकाने में नाकाम हो रहे हैं। हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल चोकपॉइंट है, जहां से रोजाना 21 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल गुजरता है। ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता का हिस्सा बताते हुए किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को सीधा चुनौती माना है।

ईरान के सुप्रीम लीडर ने कहा – “हम किसी भी आक्रामकता का मुंहतोड़ जवाब देंगे। अमेरिका और उसके सहयोगी अगर समझौते चाहते हैं तो सम्मानजनक तरीके से आएं, धमकियों से कुछ नहीं होगा।”

### हॉर्मुज स्ट्रेट: युद्ध का सबसे बड़ा मैदान
हॉर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। यह संकीर्ण जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का 20-21% हिस्सा नियंत्रित करता है। अमेरिका ने नाकाबंदी लगाकर ईरान के तेल निर्यात को रोकने की कोशिश की, लेकिन ईरान ने जवाब में चेतावनी दी कि अगर नाकाबंदी जारी रही तो पूरा क्षेत्र अस्थिर हो जाएगा।

पिछले दिनों अमेरिकी डिस्ट्रॉयर ने स्ट्रेट पार किया था, लेकिन ईरानी ड्रोन की मौजूदगी में उन्हें पीछे हटना पड़ा। आज की घटना उसका ही विस्तार लगती है। ईरान ने कहा कि कोई भी जहाज बिना अनुमति के अंदर घुसा तो उसे “जहन्नुम” भेज दिया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप और नेतन्याहू इस चोकपॉइंट को युद्ध खत्म करने का हथियार बनाना चाहते हैं, लेकिन ईरान की सैन्य तैयारी और क्षेत्रीय समर्थन (यमनी स्वतंत्र सेनानियों समेत) के कारण यह रणनीति उल्टी पड़ रही है।

 वैश्विक प्रभाव: तेल बाजार में अस्थिरता
इस घटना से तेल की कीमतें फिर बढ़ गई हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने चेतावनी दी कि अगर हॉर्मुज में तनाव बढ़ा तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है। भारत, चीन, जापान और यूरोपीय देश सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले हैं।

ट्रंप ने दावा किया कि नाकाबंदी से ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है, लेकिन ईरान ने कहा कि वह अपने वैकल्पिक रास्तों और मजबूत आंतरिक क्षमता से इस दबाव का सामना करेगा।

 नेतन्याहू की भूमिका: इजरायल का पूरा समर्थन
इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने बार-बार अमेरिकी नाकाबंदी का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु क्षमता छोड़नी होगी और हॉर्मुज पर नियंत्रण नहीं रखना चाहिए। लेकिन इजरायल की अपनी सीमाएं हैं और लेबनान समेत अन्य मोर्चों पर भी तनाव जारी है।

विश्लेषक कहते हैं कि ट्रंप और नेतन्याहू दोनों युद्ध को जल्दी खत्म करना चाहते हैं क्योंकि घरेलू राजनीति और वैश्विक दबाव बढ़ रहा है। लेकिन ईरान की “सम्मानजनक शांति” की शर्तें दोनों को मंजूर नहीं हो रही हैं।

### ईरान की मजबूत स्थिति
ईरान ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी धमकी से नहीं डरता। उसके सशस्त्र बल हॉर्मुज और आसपास के क्षेत्र में पूरी तरह तैयार हैं। IRGC ने कहा – “हमारे पास पर्याप्त क्षमता है कि कोई भी आक्रामक जहाज को तुरंत नष्ट कर दें।”

ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका से अपील की कि अगर वाकई युद्ध खत्म करना चाहते हैं तो पाकिस्तान या किसी तटस्थ देश में सम्मानजनक बातचीत की मेज पर आएं, न कि नाकाबंदी और धमकियों के साथ।

 हताशा की राजनीति
ट्रंप और नेतन्याहू की “हाथ-पैर मारने” वाली रणनीति से साफ है कि वे युद्ध को जल्दी खत्म करना चाहते हैं, लेकिन ईरान की दृढ़ता के सामने हर कदम पर पीछे हट रहे हैं। आज की हॉर्मुज घटना इसी की मिसाल है – तेजी से आगे बढ़ना, ईरानी चेतावनी सुनना और फिर तेजी से वापस लौटना।

अमेरिका का बयान “रूटीन पेट्रोलिंग” का अब दुनिया को हंसाने वाला लग रहा है। विश्लेषक चेतावनी देते हैं कि अगर दोनों पक्ष संयम नहीं बरतेंगे तो पूरा क्षेत्र बड़े संघर्ष में फंस सकता है।

वर्तमान में दुनिया उम्मीद कर रही है कि दूसरी दौर की बातचीत जल्द शुरू हो और दोनों चोकपॉइंट्स (हॉर्मुज और बाब अल-मंदेब) पर शांति बहाल हो। लेकिन फिलहाल ट्रंप और नेतन्याहू की हताशा और ईरान की दृढ़ता के बीच तनाव जारी है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 15,2026