-Friday World – 2, April 2026
मध्य पूर्व में जारी युद्ध ने अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के सबसे संवेदनशील बिंदु – होर्मुज़ स्ट्रेट – को केंद्र में ला दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान पर दबाव बना रहे हैं कि होर्मुज़ स्ट्रेट को तुरंत खोल दिया जाए, यहां तक कि सैन्य बल के उपयोग की धमकी भी दी जा रही है। लेकिन ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने साफ-साफ चुनौती देते हुए कहा है कि यह सामरिक जलमार्ग “इस देश के दुश्मनों” के लिए बंद ही रहेगा।
सरकारी टीवी पर प्रसारित आईआरजीसी के बयान में कहा गया, “होर्मुज़ स्ट्रेट हमारी नौसेना के मजबूत और पूर्ण नियंत्रण में है। यह दुश्मनों के लिए नहीं खोला जाएगा।” यह बयान ऐसे समय में आया है जब युद्ध के एक महीने से अधिक समय बीत चुका है और वैश्विक तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
युद्ध की पृष्ठभूमि और होर्मुज़ का महत्व
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल द्वारा शुरू किए गए बड़े हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट को प्रभावी रूप से बंद कर दिया। ड्रोन, मिसाइल और संभवतः बारूदी सुरंगों के माध्यम से ईरान ने इस जलमार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस इसी संकीर्ण जलमार्ग से गुजरता है। इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई है।
ट्रंप प्रशासन ने बार-बार कहा है कि होर्मुज़ स्ट्रेट को खोलना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। ट्रंप ने हाल ही में राष्ट्र को संबोधित करते हुए दावा किया कि युद्ध दो-तीन हफ्तों में समाप्त हो जाएगा और स्ट्रेट “स्वाभाविक रूप से” खुल जाएगा। उन्होंने यहां तक कहा कि अमेरिका युद्ध के बाद स्ट्रेट खोलने की जिम्मेदारी अन्य देशों पर छोड़ सकता है।
लेकिन आईआरजीसी का रुख पूरी तरह अलग है। उन्होंने साफ किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति के “हास्यास्पद प्रदर्शन” से स्ट्रेट दुश्मनों के लिए नहीं खोला जाएगा। ईरान का कहना है कि वह केवल अपने दुश्मनों (अमेरिका और इजराइल से जुड़े जहाजों) को ही रोक रहा है, जबकि अन्य देशों के लिए मार्ग खुला रखा गया है।
ब्रिटेन की कूटनीतिक पहल इस तनाव के बीच ब्रिटेन सक्रिय रूप से कूटनीति चला रहा है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीयर स्टार्मर ने कहा कि बढ़ती महंगाई से निपटने का सबसे अच्छा तरीका तनाव कम करना और होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खुलवाना है। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले महीने आसान नहीं होंगे।
ब्रिटिश विदेश मंत्री येवेट कूपर गुरुवार को लगभग 35 देशों की वर्चुअल बैठक की मेजबानी कर रही हैं। इस बैठक में स्ट्रेट को दोबारा खोलने के लिए व्यावहारिक कूटनीतिक और राजनीतिक उपायों पर चर्चा होगी। ब्रिटेन फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, जापान और कुछ खाड़ी देशों सहित एक गठबंधन के साथ मिलकर काम कर रहा है।
स्टार्मर ने डाउनिंग स्ट्रीट में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि होर्मुज़ का बंद रहना ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन स्तर पर सीधा असर डाल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिटेन युद्ध में सीधे शामिल नहीं होगा, लेकिन स्वतंत्र नौवहन सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर रहा है।
ईरानी राष्ट्रपति का संदेश ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा है कि उनके देश में “युद्ध समाप्त करने की जरूरी इच्छाशक्ति” मौजूद है। उन्होंने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष से फोन पर बातचीत में जोर दिया कि युद्ध खत्म करने का कोई भी फैसला ईरानी लोगों की सुरक्षा, गरिमा और हितों की रक्षा करने वाला होना चाहिए। पेजेश्कियन ने भविष्य में दोबारा आक्रमण न हो, इसके लिए ठोस गारंटी मांगी है।
उनके बयान के बाद बाजार में कुछ राहत मिली। तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं। हालांकि, विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि अगर स्ट्रेट मध्य अप्रैल तक नहीं खुला तो यूरोप में जेट ईंधन और डीजल की भारी कमी हो सकती है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर होर्मुज़ स्ट्रेट के बंद रहने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में 4-5 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कमी आई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख ने इसे “बहुत बड़ी बाधा” बताया है। तेल की कीमतें पहले 100 डॉलर से ऊपर जा चुकी थीं, जिससे हवाई यात्रा, परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें बढ़ गई हैं।
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने दुश्मन देशों से जुड़े तीन कार्गो जहाजों को वापस लौटा दिया। आईआरजीसी की नौसेना पूरी तरह तैयार है और किसी भी उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान समझौता नहीं करता तो अमेरिका उसके बिजली संयंत्रों, तेल कुओं और खार्ग द्वीप को पूरी तरह नष्ट कर सकता है। लेकिन हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि ट्रंप प्रशासन युद्ध को 4-6 हफ्तों में समाप्त करने का लक्ष्य रख रहा है और होर्मुज़ को खोलने की जटिल ऑपरेशन को बाद के लिए टाल सकता है।
आगे क्या? वर्तमान स्थिति में तीन बड़े मोर्चे सक्रिय हैं:
1. सैन्य दबाव: अमेरिका और इजराइल ईरान पर दबाव बनाए हुए हैं।
2. ईरानी प्रतिरोध: आईआरजीसी की मजबूत स्थिति और चुनौती।
3. कूटनीतिक प्रयास: ब्रिटेन के नेतृत्व में 35 देशों की बैठक।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर कूटनीति कामयाब नहीं हुई तो युद्ध लंबा खिंच सकता है और वैश्विक महंगाई नई ऊंचाइयों को छू सकती है। ईरान का रुख साफ है – वह गरिमा और सुरक्षा की गारंटी के बिना पीछे नहीं हटेगा। वहीं पश्चिमी देश ऊर्जा संकट से बचने के लिए जल्द समाधान चाहते हैं।
यह संकट न केवल मध्य पूर्व की स्थिरता, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। होर्मुज़ स्ट्रेट की नियति तय करेगी कि आने वाले महीनों में तेल की कीमतें कितनी ऊंची जाएंगी और आम लोगों पर इसका क्या असर पड़ेगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World – 2, April 2026