बेरूत/बैरोत, 26 अप्रैल 2026 – लेबनान की इस्लामिक रेसिस्टेंस हिजबुल्लाह ने रविवार सुबह 2:00 बजे दक्षिणी लेबनान के बय्यादा (अल-बय्यादा) शहर में एक नई स्थापित इजरायली तोपखाने के ठिकाने पर ड्रोन हमले की घोषणा की। यह हमला हिजबुल्लाह का तीसरा ऑपरेशन बताया जा रहा है, जो इजरायल के कथित संघर्षविराम उल्लंघनों और दक्षिणी लेबनानी गांवों पर निरंतर गोलाबारी के जवाब में किया गया।
हिजबुल्लाह ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि उसके लड़ाकों ने एक ड्रोन हमले के जरिए इजरायली सेना के इस नए आर्टिलरी पोजीशन को निशाना बनाया। हमले में ठिकाने के फायर कंट्रोल रूम में आग लगने की रिपोर्ट्स आई हैं। हिजबुल्लाह का दावा है कि यह हमला सटीक और प्रभावी था, जो इजरायली सेना की दक्षिण लेबनान में जारी मौजूदगी और उल्लंघनों का मुंहतोड़ जवाब है।
पृष्ठभूमि: नाजुक संघर्षविराम और बढ़ते तनाव
नवंबर 2025 में अमेरिका की मध्यस्थता से इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्षविराम समझौता हुआ था, जिसे बाद में कई बार बढ़ाया गया। लेकिन दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उल्लंघन का आरोप लगाते रहे हैं। हिजबुल्लाह का कहना है कि इजरायली सेना ने 200 से अधिक बार संघर्षविराम तोड़ा है, जिसमें दक्षिणी लेबनान के गांवों पर गोलाबारी, नागरिकों पर हमले और घरों को नष्ट करना शामिल है।
इजरायली सेना ने इन आरोपों को खारिज किया है और दावा किया है कि हिजबुल्लाह ही उल्लंघन कर रहा है। हाल के दिनों में हिजबुल्लाह ने कई छोटे-छोटे ऑपरेशन किए हैं, जिनमें ड्रोन हमले और रॉकेट फायरिंग शामिल हैं। 26 अप्रैल का यह हमला इसी श्रृंखला का हिस्सा माना जा रहा है।
बय्यादा दक्षिण लेबनान के टायर क्षेत्र के पास रास अल-बय्यादा हेडलैंड पर स्थित है। यह इलाका सीमा से निकट है और इजरायली सेना ने यहां नए सैन्य ठिकाने स्थापित किए हैं, जिन्हें हिजबुल्लाह “आक्रामक कब्जे” की कोशिश बता रहा है।
हिजबुल्लाह का बयान: “प्रतिरोध जारी रहेगा”
हिजबुल्लाह के बयान में कहा गया, “हमारे मुजाहिदीन ने सुबह 2:00 बजे एक ड्रोन हमले से इजरायली दुश्मन के नए स्थापित आर्टिलरी पोजीशन को निशाना बनाया। यह हमला दक्षिणी गांवों पर इजरायली गोलाबारी और संघर्षविराम के बार-बार उल्लंघनों का जवाब है। हम लेबनान की संप्रभुता और अपनी जनता की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे।”
समूह ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य केवल सैन्य ठिकाने हैं, न कि नागरिक क्षेत्र। हालांकि, इजरायली पक्ष ने अभी तक इस हमले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ड्रोन हमला इंटरसेप्ट कर लिया गया, जबकि हिजबुल्लाह दावा कर रहा है कि निशाना सही लगा और आग लगी।
क्षेत्रीय संदर्भ: लेबनान-इजरायल सीमा पर अनिश्चित शांति
2024-2025 के बड़े संघर्ष के बाद लेबनान में व्यापक तबाही हुई थी। हजारों घर नष्ट हुए, सैकड़ों लोग मारे गए और अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। संघर्षविराम के बावजूद तनाव कम नहीं हुआ है। इजरायल दक्षिण लेबनान में “बफर जोन” जैसी स्थिति बनाए रखना चाहता है, जबकि हिजबुल्लाह इसे अपनी जमीन पर कब्जा मानता है।
हिजबुल्लाह, जो ईरान समर्थित है, खुद को लेबनान की संप्रभुता का रक्षक बताता है। उसके नेता बार-बार चेतावनी देते हैं कि अगर इजरायल ने उल्लंघन जारी रखा तो प्रतिरोध बढ़ेगा। दूसरी ओर, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि कोई भी उल्लंघन “मजबूत जवाब” का सामना करेगा।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और चिंताएं
संयुक्त राष्ट्र और कई देश इस नाजुक स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। लेबनान सरकार ने संघर्षविराम का सम्मान करने की बात कही है, लेकिन हिजबुल्लाह को अलग से काम करने वाला समूह मानती है।
विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे छोटे हमले बड़े पैमाने पर युद्ध को भड़का सकते हैं। दक्षिण लेबनान के कई गांवों में निवासियों को इजरायली चेतावनियां मिल रही हैं कि वे कुछ क्षेत्रों में न लौटें। इससे स्थानीय लोगों में डर और अनिश्चितता बढ़ गई है।
क्या है आगे का रास्ता?
यह तीसरा ऑपरेशन दिखाता है कि हिजबुल्लाह संघर्षविराम को “अर्थहीन” मान रहा है जब तक इजरायल अपनी सेना दक्षिण लेबनान से पूरी तरह नहीं हटाता और उल्लंघन बंद नहीं करता। समूह ने पहले भी कई बार कहा है कि वह “आनुपातिक जवाब” देगा।
दूसरी तरफ, इजरायल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने का हवाला देकर सैन्य मौजूदगी बनाए रखना चाहता है। दोनों पक्षों के बीच यह “छाया युद्ध” जारी रहने से क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो रही है।
: शांति की उम्मीद या नया संघर्ष?
26 अप्रैल 2026 का यह ड्रोन हमला एक और याद दिलाता है कि लेबनान-इजरायल सीमा पर शांति अभी बहुत दूर है। हिजबुल्लाह की क्षमता – चाहे ड्रोन हो या अन्य हथियार – और उसकी इच्छाशक्ति स्पष्ट है। लेकिन बड़े युद्ध से दोनों पक्षों को भारी नुकसान होगा।
दुनिया उम्मीद कर रही है कि कूटनीति काम करेगी और दोनों पक्ष बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाएंगे। फिलहाल, दक्षिण लेबनान के गांव शांति की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि प्रतिरोध की आवाजें गूंज रही हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 26,2026