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Sunday, 26 April 2026

ढाई साल की मासूम को 'मनहूस' मान हाईवे पर फेंक दिया: करोड़पति दंपती की क्रूरता ने पूरे देश को झकझोर दिया

ढाई साल की मासूम को 'मनहूस' मान हाईवे पर फेंक दिया: करोड़पति दंपती की क्रूरता ने पूरे देश को झकझोर दिया-Friday World-April 26,2026
                       प्रतिकात्मक तस्वीर 
मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के नेशनल हाईवे-552 पर 18 अप्रैल की उस शाम का दृश्य आज भी कई लोगों की आंखों में आंसू भर देता है। सोंईकलां कस्बे के पास एक ढाई साल की छोटी सी बच्ची सड़क किनारे अकेली रो रही थी। उसके छोटे-छोटे हाथ, आंसुओं से भीगी आंखें और भयभीत चेहरा देखकर राहगीर रुक गए। कोई नहीं जानता था कि यह मासूम अपनी ही 'गोद लेने वाली' मां-बाप द्वारा जानबूझकर छोड़ दी गई है।

पुलिस ने बच्ची को तुरंत संरक्षण में ले लिया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद पूरे प्रदेश में हलचल मच गई। मानपुर थाना की टीम ने लगातार प्रयास किए — सोशल मीडिया अभियान चलाया, लोगों से अपील की और आखिरकार राजगढ़ जिले के एक जाने-माने करोड़पति कारोबारी **आकाश मूंदड़ा** और उनकी पत्नी **कृतिका मूंदड़ा** तक पहुंची। दोनों को भोपाल से गिरफ्तार कर लिया गया।

 अंधविश्वास और लालच की काली कहानी

आकाश मूंदड़ा पेट्रोल पंपों का बड़ा कारोबारी है। उनके पास राजगढ़ और आसपास कई पेट्रोल पंप बताए जाते हैं। आर्थिक रूप से संपन्न यह दंपती पहले से ही एक बच्ची की तलाश में था। जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ — यह बच्ची 'गोद' नहीं ली गई थी, बल्कि इंदौर की एक ब्यूटी पार्लर संचालिका से एक लाख रुपये में खरीदी गई थी। यह साफ तौर पर बाल तस्करी का मामला बन गया।

दंपती ने बच्ची को घर लाया। शुरुआत में सब ठीक था, लेकिन कुछ समय बाद उनके कारोबार में घाटा होने लगा। अंधविश्वास ने घर में घुसपैठ कर ली। आकाश और कृतिका को लगा कि यह ढाई साल की मासूम 'मनहूस' है। बच्ची के आने के बाद ही बिजनेस में नुकसान हो रहा है। उन्हें विश्वास हो गया कि बच्ची को घर से निकाल देने से उनकी किस्मत फिर से चमक उठेगी।

18 अप्रैल को दोनों खाटू श्याम और मेहंदीपुर बालाजी की धार्मिक यात्रा पर निकले। बच्ची को भी कार में साथ ले गए। रास्ते में श्योपुर के पास पहुंचकर उन्होंने फैसला कर लिया। सुनसान हाईवे पर बच्ची को उतार दिया और बिना पीछे मुड़े चले गए। ढाई साल की बच्ची, जो ठीक से बोलना भी नहीं जानती, अकेली रोती रही। दया का जरा सा भाव भी उनके दिल में नहीं जगा।
                   प्रतिकात्मक तस्वीर 
पुलिस की जांच में और भी हैरान करने वाले तथ्य सामने आए। दंपती बच्ची को पीटते और प्रताड़ित करते थे। गोद लेने के वैध कागजात उनके पास नहीं थे। पुलिस ने गोद लेने संबंधी दस्तावेज मांगे तो उनके पास कुछ नहीं निकला। इंदौर से बाल तस्करी गिरोह के चार सदस्यों को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब बच्ची के असली माता-पिता की तलाश कर रही है।

 पैसे की ताकत इंसानियत को नहीं खरीद सकती

यह घटना सिर्फ एक परिवार की क्रूरता नहीं है, बल्कि समाज में गहरे बैठे अंधविश्वास, बाल तस्करी और पैसे के घमंड की तस्वीर है। करोड़ों का कारोबार करने वाला व्यक्ति सोचता है कि सब कुछ खरीदा जा सकता है — यहां तक कि एक बच्ची की जिंदगी भी। जब बात अपनी सुविधा की आई तो मासूम को 'मनहूस' का ठप्पा लगा दिया।

धर्म की यात्रा पर निकलकर अधर्म का ऐसा कृत्य करना और भी निंदनीय है। बच्चे को भगवान का रूप माना जाता है, लेकिन इनके लिए वह सिर्फ एक 'बदकिस्मत' का साया बन गई। यात्रा के नाम पर बच्ची को 400 किलोमीटर दूर ले जाकर फेंकना — यह सोचकर भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि अगर कोई राहगीर न रुकता तो क्या होता?

यह मामला बाल अधिकारों, बाल तस्करी रोकथाम कानून (POCSO और JJ Act) और गोद लेने की प्रक्रिया की कमजोरियों पर भी सवाल उठाता है। अगर अमीर लोग बिना वैध प्रक्रिया के बच्चियों को 'खरीद' सकते हैं तो कानून कहां खड़ा है? पुलिस की तेज कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन ऐसे मामलों में सख्त सजा और जागरूकता दोनों जरूरी हैं।

 समाज के लिए सबक

आज जब हम विकास, शिक्षा और आर्थिक प्रगति की बात करते हैं, तब ऐसी घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि बाहरी चमक के पीछे इंसानियत कितनी खोखली हो सकती है। आकाश मूंदड़ा जैसे लोग सोचते हैं कि पैसे से सब कुछ कंट्रोल किया जा सकता है — लेकिन प्रकृति और ईश्वर के नियम अलग होते हैं।

अंधविश्वास ने कितने परिवारों को बर्बाद किया है, यह हम जानते हैं। लेकिन एक निहत्थी, बेबस बच्ची पर अपना गुस्सा और हताशा निकालना — यह किसी भी सभ्य समाज में माफी के लायक नहीं।

पुलिस ने दंपती को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। कोर्ट अब उन्हें सजा सुनाएगा। लेकिन सवाल बाकी है — ऐसी मानसिकता वाले लोगों को समाज कैसे रोकेगा? क्या हमें बाल तस्करी के खिलाफ और सख्त कानून चाहिए? क्या गोद लेने की प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाना होगा?

यह घटना हर उस व्यक्ति को सोचने पर मजबूर करती है जो बच्चे को सिर्फ बोझ समझता है। बच्चियां अभिशाप नहीं, आशीर्वाद होती हैं। उन्हें प्यार और सुरक्षा मिलनी चाहिए, न कि हाईवे पर अकेले छोड़ दिया जाना।

 आकाश मूंदड़ा और कृतिका मूंदड़ा का यह कृत्य न सिर्फ कानूनी अपराध है, बल्कि नैतिक पतन का जीता-जागता उदाहरण है। ढाई साल की उस मासूम बच्ची की आंखों में छलकते आंसू पूरे समाज को चेतावनी देते हैं — इंसानियत को कभी भी पैसे या अंधविश्वास के आगे नहीं झुकना चाहिए।

अगर हम सच में सभ्य समाज बनाना चाहते हैं तो ऐसे क्रूर कृत्यों के खिलाफ आवाज उठानी होगी। बच्ची अब सुरक्षित है, लेकिन उसके दिल पर लगे घाव शायद कभी न भरें। आशा है कि कानून इन दोनों को कड़ी सजा देगा ताकि भविष्य में कोई और अमीर 'मनहूस' का बहाना बनाकर मासूम की जिंदगी से खिलवाड़ न कर सके।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 26,2026