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Monday, 6 April 2026

ईरान की अटूट प्रतिरोध क्षमता: फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में खुलासा – आधुनिक सेना को लकवाग्रस्त करने वाले हालात में भी मिसाइल हमले जारी

ईरान की अटूट प्रतिरोध क्षमता: फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में खुलासा – आधुनिक सेना को लकवाग्रस्त करने वाले हालात में भी मिसाइल हमले जारी
-Friday World-April 7,2026 
नई दिल्ली/लंदन, 7 अप्रैल 2026 – मध्य पूर्व में चल रहे तनावपूर्ण संघर्ष के बीच फाइनेंशियल टाइम्स (Financial Times) ने एक चौंकाने वाली रिपोर्ट प्रकाशित की है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान उन कठिन परिस्थितियों में भी लगातार मिसाइल हमले कर रहा है, जो किसी भी आधुनिक सेना को पूरी तरह लकवाग्रस्त कर सकती हैं। अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों के दावों के बावजूद कि ईरान की मिसाइल क्षमता लगभग नष्ट हो चुकी है, तेहरान ने फिलिस्तीनी क्षेत्रों और फारस की खाड़ी में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी रखे हैं।

यह रिपोर्ट ईरान की सैन्य रणनीति की मजबूती को उजागर करती है और सवाल उठाती है कि क्या वास्तव में ईरान की मिसाइल प्रणाली को पूरी तरह कमजोर किया जा सका है।

 फाइनेंशियल टाइम्स रिपोर्ट का मुख्य खुलासा

फाइनेंशियल टाइम्स की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान इजरायल और खाड़ी देशों (Gulf states) पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का अभियान चला रहा है, जबकि हालात ऐसे हैं जो सामान्य रूप से किसी आधुनिक सेना की क्षमता को पूरी तरह ठप कर देते। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बावजूद ईरान के हमले जारी हैं।

रिपोर्ट के अनुसार:
- ईरान ने कब्जे वाले फिलिस्तीनी इलाकों (occupied Palestinian territories) और फारस की खाड़ी के देशों में अमेरिकी ठिकानों पर लगातार मिसाइल हमले किए।
- ज़ायोनी (इजरायली) और अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ईरान की मिसाइल क्षमताएं लगभग पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं।
- लेकिन वास्तविकता इससे उलट है। तेहरान के हमले जारी हैं, जो दर्शाता है कि ईरान के पास युद्ध के समय में टूट-फूट और निरंतर हमलों का सामना करने के लिए डिज़ाइन की गई एक मजबूत प्रणाली मौजूद है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह ईरान की "attrition-resistant" (टूट-फूट सहने वाली) मिसाइल प्रणाली का प्रमाण है। ईरान ने भूमिगत सुविधाओं, मोबाइल लॉन्चरों और विकेंद्रीकृत कमांड स्ट्रक्चर का इस्तेमाल कर अपनी क्षमता को बचाए रखा है।

2026 का ईरान संघर्ष: पृष्ठभूमि

फरवरी-मार्च 2026 में अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए। इन हमलों का लक्ष्य ईरान की परमाणु सुविधाएं, मिसाइल उत्पादन इकाइयां, एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य कमांड सेंटर थे। हजारों लक्ष्यों पर हमले किए गए, जिनमें रक्षा औद्योगिक साइट्स भी शामिल थीं।

ईरान ने जवाबी कार्रवाई में:
- इजरायल के शहरों जैसे तेल अवीव और हाइफा पर मिसाइल दागे।
- खाड़ी देशों (बहरीन, कतर, कुवैत, यूएई, सऊदी अरब) में अमेरिकी ठिकानों – जैसे अल उदैद एयर बेस (कतर), पांचवीं फ्लीट हेडक्वार्टर (बहरीन) आदि – पर हमले किए।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजरानी को प्रभावित किया, जिससे तेल की कीमतें बढ़ीं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई।

फाइनेंशियल टाइम्स रिपोर्ट में उल्लेख है कि ईरान ने ऐसे हालात में हमले जारी रखे जहां उसके कई लॉन्च साइट्स, उत्पादन प्लांट्स और कम्यूनिकेशन सिस्टम पर हमले हो चुके थे। फिर भी मिसाइल सैल्वो (salvos) जारी रहे, हालांकि शुरुआती बड़े हमलों के बाद उनकी संख्या और तीव्रता कम हुई।

 ईरान की मिसाइल रणनीति की ताकत

ईरान की मिसाइल क्षमता लंबे समय से उसकी रक्षा नीति का आधार रही है। विशेषज्ञों के अनुसार:
- भूमिगत और मोबाइल सिस्टम: ईरान ने कई मिसाइल बेस भूमिगत बनाए हैं, जो हवाई हमलों से बच सकते हैं। मोबाइल लॉन्चर तेजी से स्थान बदलते हैं, जिससे उन्हें निशाना बनाना मुश्किल होता है।
- विकेंद्रीकृत संरचना: कमांड और कंट्रोल को इतना फैलाया गया है कि एक जगह का नुकसान पूरे सिस्टम को लकवाग्रस्त नहीं करता।
- attrition warfare: ईरान की रणनीति लंबे युद्ध और निरंतर टूट-फूट को सहने की है। फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, यही प्रणाली ईरान को उन हालात में भी सक्रिय रखे हुए है जो किसी आधुनिक सेना को पंगु बना दें।
- सॉलिड-फ्यूल vs लिक्विड-फ्यूल: कुछ मिसाइलें (जैसे फतह-1, खैबर शेकन) सॉलिड फ्यूल वाली हैं, जो तेज लॉन्चिंग की अनुमति देती हैं और जल्दी पता लगाने से बचाती हैं।

अमेरिकी-इजरायली दावों के बावजूद कि ईरान की 80% से ज्यादा एयर डिफेंस और मिसाइल उत्पादन क्षमता नष्ट हो गई, ईरान के हमले जारी रहना इस दावे पर सवाल उठाता है। कुछ विश्लेषक मानते हैं कि ईरान ने अपनी कुछ क्षमता को छिपाकर रखा है या तेजी से रिपेयर/रिप्लेसमेंट किया है।

 वैश्विक और क्षेत्रीय प्रभाव

इस संघर्ष के कारण:
- तेल बाजार अस्थिर: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की अनिश्चितता से तेल की कीमतें $90 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं।
- खाड़ी देश प्रभावित: अमेरिकी ठिकानों पर हमलों से बहरीन, कतर, कुवैत जैसे देशों में हताहत हुए और इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा।
- वैश्विक अर्थव्यवस्था: उड़ानें प्रभावित हुईं, बीमा लागत बढ़ी और मुद्रास्फीति का खतरा मंडराया।
- कूटनीतिक दबाव: UNSC में चर्चाएं हुईं, लेकिन स्थायी सदस्यों में विभाजन साफ दिखा।

भारत जैसे देशों पर भी असर पड़ा है। भारत मध्य पूर्व से तेल आयात करता है और क्षेत्रीय स्थिरता उसकी ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी है। भारत ने संतुलित रुख अपनाते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।

 विशेषज्ञों की राय

फाइनेंशियल टाइम्स और अन्य विश्लेषकों का कहना है कि ईरान की यह क्षमता "economy of resistance" और लंबे समय की तैयारी का नतीजा है। ईरान ने दशकों से असममित युद्ध (asymmetric warfare) की रणनीति अपनाई है – जहां कम संसाधनों से ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा सके।

कुछ विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अगर ईरान की मिसाइल क्षमता इतनी आसानी से नष्ट नहीं हो रही, तो लंबा युद्ध क्षेत्र को और अस्थिर कर सकता है। दूसरी ओर, अमेरिकी पक्ष दावा करता है कि निरंतर हमलों से ईरान की क्षमता धीरे-धीरे कम हो रही है।

 आगे क्या?

संघर्ष अभी जारी है। ईरान ने नए हमलों की घोषणा की है, जबकि अमेरिका-इजरायल अपनी कार्रवाइयों को तेज करने की बात कर रहे हैं। फाइनेंशियल टाइम्स रिपोर्ट याद दिलाती है कि युद्ध केवल हथियारों की संख्या से नहीं, बल्कि लचीलापन और रणनीति से भी जीता या हारा जाता है।

ईरान की यह प्रतिरोध क्षमता मध्य पूर्व की शक्ति संतुलन को नए सिरे से परिभाषित कर सकती है। क्या यह ईरान के लिए रणनीतिक जीत है या सिर्फ अस्थायी टिकाव? समय बताएगा। लेकिन फिलहाल, फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि ईरान को कम आंकना खतरनाक गलती हो सकती है।

यह घटनाक्रम वैश्विक कूटनीति, ऊर्जा सुरक्षा और बहुपक्षीय संस्थाओं की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। भारत को अपनी ऊर्जा विविधीकरण और क्षेत्रीय कूटनीति को और मजबूत करने की जरूरत है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 7,2026