-Friday World-April 7,2026
पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में चल रहे ईरान-अमेरिका-इजराइल तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में उत्पन्न अस्थिरता ने भारत की ऊर्जा आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस भू-राजनीतिक संकट के कारण एलपीजी (Liquefied Petroleum Gas) और पीएनजी (Piped Natural Gas) की आपूर्ति में गंभीर कमी आ गई है, जिसकी सीधी मार एल्युमिनियम एक्सट्रूजन उद्योग पर पड़ी है। देशभर में सैकड़ों एक्सट्रूजन यूनिट्स या तो पूरी तरह बंद हो गई हैं या बेहद कम क्षमता पर चल रही हैं।
यह उद्योग एल्युमिनियम को पिघलाने, गर्म करने और एक्सट्रूड करने के लिए निरंतर उच्च तापमान वाले भट्टियों पर निर्भर है, जिसमें एलपीजी और पीएनजी मुख्य ईंधन के रूप में इस्तेमाल होते हैं। आपूर्ति में व्यवधान के कारण उत्पादन में भारी गिरावट आई है, जिससे कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है और मजदूर बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं।
दिल्ली स्थित कंपनी के सूत्रों का खुलासा
दिल्ली में स्थित एक प्रमुख एल्युमिनियम एक्सट्रूजन कंपनी के सूत्रों ने बताया कि एलपीजी की पूरी आपूर्ति बंद होने के कारण उनकी फैक्टरी पिछले सात दिनों से पूरी तरह बंद पड़ी है। कर्मचारी बिना काम के बैठे हैं और उत्पादन शून्य हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो कई छोटी-मध्यम कंपनियां स्थायी रूप से बंद हो सकती हैं।
एल्युमिनियम एक्सट्रूजन मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ALEMA) की चेतावनी
एल्युमिनियम एक्सट्रूजन मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ALEMA) ने सरकार से तत्काल राहत की मांग की है। एसोसिएशन के अनुसार:
- कम से कम 25 से ज्यादा एक्सट्रूजन यूनिट्स पूरी तरह बंद हो चुकी हैं।
- लगभग 200 अन्य यूनिट्स बहुत कम क्षमता (30-70% कम) पर चल रही हैं।
- देशभर में औसतन 450-500 यूनिट्स हैं, जिनका सालाना उत्पादन 8-10 लाख टन है और अनुमानित वार्षिक कारोबार ₹32,000 करोड़ के आसपास है।
- मासिक उत्पादन पहले 70,000 टन के करीब था, जो अब घटकर 45,000 टन रह गया है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा, “कई क्षेत्रों में औद्योगिक यूनिट्स को एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी गई है, जबकि पीएनजी की उपलब्धता 50-80% तक घट गई है। यह उद्योग के लिए अस्तित्व का संकट है।”
ईंधन की कमी और कीमतों में उछाल क्यों?
पश्चिम एशिया संकट के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आने वाले एलपीजी आयात (भारत की लगभग 60% जरूरत) में भारी व्यवधान आया है। सरकार ने घरेलू खपत को प्राथमिकता देते हुए औद्योगिक एलपीजी को 80% तक कम कर दिया है। पीएनजी की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है, जिसके दाम आसमान छू रहे हैं।
- उद्योग में इस्तेमाल होने वाले गैस के दाम लगभग दोगुने हो गए हैं।
- प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (SCM) पीएनजी की कीमत पहले ₹52 के आसपास थी, जो अब ₹90 तक पहुंच गई है।
- सीमित उपलब्धता के कारण कई फैक्टरियां महंगे विकल्पों की ओर मुड़ रही हैं, लेकिन इससे उत्पादन लागत और बढ़ रही है।
सिर्फ ईंधन नहीं, पूरी चेन प्रभावित
यह संकट केवल ईंधन तक सीमित नहीं है। मध्य पूर्व संकट ने एल्युमिनियम के कच्चे माल (स्क्रैप और इंगॉट) की उपलब्धता और कीमतों को भी प्रभावित किया है। वैश्विक स्तर पर एल्युमिनियम की कीमतें चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। इससे कंपनियों की आय घट रही है, जबकि बैंक लोन, मजदूरों के वेतन और अन्य फिक्स्ड खर्चे चुकाने में दिक्कत हो रही है।
कई एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) लोन चुकाने में डिफॉल्ट का खतरा झेल रहे हैं। एसोसिएशन ने कोविड काल जैसी राहत — जैसे लोन मोरेटोरियम, ब्याज सब्सिडी और बिजली बिल में छूट — की मांग की है।
देशव्यापी प्रभाव और मजदूरों पर असर
यह समस्या केवल एक-दो राज्यों तक सीमित नहीं है। गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में फैक्टरियां प्रभावित हैं। जहां यूनिट्स बंद हुई हैं, वहां मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। कई प्रवासी मजदूर काम की तलाश में वापस गांवों की ओर लौट रहे हैं।
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह संकट लंबा खिंचा तो एल्युमिनियम उत्पादों (जैसे विंडो-डोर फ्रेम, ऑटो पार्ट्स, इलेक्ट्रिकल कंडक्टर आदि) की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका असर निर्माण, ऑटोमोबाइल और विद्युत क्षेत्र पर पड़ेगा।
सरकार क्या कर रही है?
सरकार ने घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं और पीएनजी इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से बढ़ावा दे रही है। जहां पीएनजी उपलब्ध है, वहां एलपीजी कनेक्शन बंद करने की समयसीमा तय की जा रही है। लेकिन औद्योगिक क्षेत्रों में राहत अभी नहीं मिल पाई है। ALEMA सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की अपील कर रही है ताकि यूनिट्स फिर से चालू हो सकें और रोजगार बचाया जा सके।
आगे क्या?
- अल्पकालिक समाधान: औद्योगिक एलपीजी/पीएनजी को प्राथमिकता देना, वैकल्पिक ईंधन (जैसे कोयला या फर्नेस ऑयल) पर सब्सिडी।
- दीर्घकालिक: पीएनजी नेटवर्क का तेज विस्तार, आयात स्रोतों में विविधता और ऊर्जा दक्षता बढ़ाना।
- निवेशकों और उद्योगपतियों को सलाह: मजबूत कंपनियां इस संकट को पार कर लेंगी, लेकिन छोटी यूनिट्स को सहायता की जरूरत है।
यह संकट एक बार फिर याद दिलाता है कि वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाएं भारत की स्थानीय अर्थव्यवस्था और छोटे उद्योगों को कितनी तेजी से प्रभावित कर सकती हैं। एल्युमिनियम एक्सट्रूजन उद्योग भारत की निर्माण और विनिर्माण महत्वाकांक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार और उद्योग को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा, वरना हजारों रोजगार और अरबों का कारोबार खतरे में पड़ सकता है।
: पश्चिम एशिया संकट ने एलपीजी-पीएनजी की कमी के रूप में एल्युमिनियम उद्योग को झटका दिया है। 25+ फैक्टरियां बंद, उत्पादन 35% तक घटा और मजदूर बेरोजगार। ALEMA सरकार से तत्काल राहत चाहती है। आने वाले दिनों में स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। अगर आप इस उद्योग से जुड़े हैं तो सतर्क रहें और वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार करें।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 7,2026
नोट: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार स्रोतों पर आधारित है। यह निवेश या व्यावसायिक सलाह नहीं है। नवीनतम अपडेट के लिए सरकारी सूचनाएं और उद्योग संगठनों से संपर्क करें।