कल्पना कीजिए, एक ऐसा गठबंधन जो 76 साल से दुनिया की सबसे मजबूत सैन्य शक्ति माना जाता है, आज अपने ही सदस्य देशों के खिलाफ सजा के विकल्पों पर चर्चा कर रहा हो। अप्रैल 2026 में सामने आई एक आंतरिक पेंटागन ईमेल ने नाटो (NATO) के अंदर गहरी दरार को उजागर कर दिया है। इस ईमेल में उन नाटो सहयोगियों को दंडित करने के संभावित उपायों का जिक्र है, जिन्होंने ईरान के साथ अमेरिकी युद्ध के दौरान अमेरिका को पर्याप्त समर्थन नहीं दिया।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने गुमनाम रूप से बताया कि पेंटागन के शीर्ष नीति सलाहकार **एलब्रिज कोल्बी** (Elbridge Colby) द्वारा तैयार एक ज्ञापन (memo) में स्पेन को नाटो से निलंबित करने और ब्रिटेन के फॉकलैंड द्वीप समूह (Falkland Islands) पर अमेरिकी रुख का पुनर्मूल्यांकन जैसे कठोर विकल्प शामिल हैं।
यह ईमेल न सिर्फ अमेरिका-यूरोप संबंधों में तनाव को दर्शाता है, बल्कि नाटो की भविष्य की एकता पर भी सवाल खड़े करता है।
ईमेल में क्या है? प्रस्तावित दंड के विकल्प
पेंटागन के इस आंतरिक दस्तावेज़ में मुख्य रूप से ABO अधिकार (Access, Basing और Overflight rights) की कमी पर नाराजगी जताई गई है। ABO का मतलब है कि सहयोगी देश अमेरिकी सेना को अपने क्षेत्र में पहुंच, सैन्य अड्डों का इस्तेमाल और हवाई क्षेत्र से उड़ान भरने की अनुमति दें। कोल्बी ने लिखा कि यह “नाटो के लिए बुनियादी न्यूनतम अपेक्षा” (absolute baseline) है।
मुख्य प्रस्तावित उपाय:
- स्पेन को नाटो से निलंबित करना: स्पेन पर आरोप है कि उसने ईरान अभियानों के लिए अपने बेस और एयरस्पेस का इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया। ईमेल में “मुश्किल” देशों को नाटो की महत्वपूर्ण या प्रतिष्ठित पदों से हटाने का भी सुझाव है।
- ब्रिटेन के फॉकलैंड द्वीपों पर रुख बदलना: अमेरिका ब्रिटेन के फॉकलैंड (अर्जेंटीना के अनुसार माल्विनास) पर दावे के समर्थन की समीक्षा कर सकता है। यह “यूरोपीय साम्राज्यवादी संपत्तियों” के प्रति अमेरिकी समर्थन पर पुनर्विचार का हिस्सा है।
- अन्य विकल्पों में “कठिन” सहयोगियों की सेंस ऑफ एंटाइटलमेंट (entitlement) को कम करने के लिए विभिन्न कदम शामिल हैं।
यह ईमेल पेंटागन के उच्च स्तर पर घूम रहा था और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टीम को विकल्प प्रदान करने के लिए तैयार किया गया था।
पृष्ठभूमि: ईरान युद्ध और नाटो की “अनुपस्थिति”
ईरान के साथ हालिया संघर्ष (जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने का मुद्दा भी शामिल था) के दौरान अमेरिका ने यूरोपीय सहयोगियों से सक्रिय समर्थन की उम्मीद की थी। लेकिन कई देशों ने हिचकिचाहट दिखाई या सीधे इनकार कर दिया। अमेरिका का मानना है कि इससे उसके अभियान प्रभावित हुए।
ट्रंप प्रशासन लंबे समय से नाटो की आलोचना करता रहा है। ट्रंप ने इसे “पेपर टाइगर” (कागजी बाघ) कहा है और अमेरिका के योगदान की तुलना में यूरोपीय देशों के रक्षा खर्च पर सवाल उठाए हैं। कोल्बी, जो पहले भी ट्रंप प्रशासन में नीति विशेषज्ञ रहे हैं, ने इस ईमेल में इसी निराशा को व्यक्त किया।
पेंटागन के प्रेस सचिव ने भी पुष्टि की कि सहयोगी “हमारे साथ नहीं थे” और प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि नाटो अब “कागजी बाघ” न रहे।
स्पेन और ब्रिटेन पर क्यों निशाना?
- स्पेन: स्पेनिश प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज़ ने रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “हम ईमेल पर काम नहीं करते”। स्पेन ने ईरान संबंधी अभियानों के लिए अपने सैन्य ठिकानों और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं करने दिया, जिसे अमेरिका ने असहयोग माना।
- ब्रिटेन: फॉकलैंड द्वीप 1982 के युद्ध के बाद ब्रिटेन के नियंत्रण में हैं, लेकिन अर्जेंटीना इसे अपना क्षेत्र मानता है। अमेरिका का पारंपरिक रूप से ब्रिटेन का समर्थन रहा है, लेकिन अब इस रुख की समीक्षा को ब्रिटेन पर दबाव बनाने के रूप में देखा जा रहा है।
ये प्रस्ताव नाटो चार्टर के अनुसार व्यावहारिक रूप से कितने संभव हैं, यह अलग मुद्दा है। नाटो का कहना है कि किसी सदस्य देश को निलंबित या निकालने का कोई प्रावधान नहीं है। फिर भी, यह ईमेल गठबंधन के अंदर राजनीतिक दबाव की नई रणनीति का संकेत देता है।
नाटो की एकता पर असर: यूरोप की प्रतिक्रिया
यूरोपीय देशों ने इस रिपोर्ट पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कई देशों ने इसे “अप्रत्याशित” और “खतरनाक” बताया। यूरोप में इस बात की चिंता है कि अगर अमेरिका नाटो से दूरी बनाता है या दंडात्मक कदम उठाता है, तो रूस और चीन जैसे विरोधी शक्तियों के सामने यूरोपीय सुरक्षा कमजोर हो सकती है।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह ईमेल ट्रंप प्रशासन की “अमेरिका फर्स्ट” नीति का विस्तार है, जिसमें सहयोगियों से ज्यादा योगदान की मांग की जा रही है। एलब्रिज कोल्बी जैसे सलाहकार लंबे समय से नाटो को “मुफ्त सवारी” देने वाले देशों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की वकालत करते रहे हैं।
दूसरी ओर, कुछ विशेषज्ञ चेतावते हैं कि ऐसे कदम नाटो की सामूहिक रक्षा (Article 5) की भावना को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ और भविष्य के निहितार्थ
नाटो 1949 में सोवियत संघ के खिलाफ बनाया गया था। ठंडे युद्ध के बाद यह वैश्विक सुरक्षा का प्रमुख स्तंभ बना रहा। लेकिन ट्रंप युग में “नाटो पर खर्च” और “सहयोगियों की जिम्मेदारी” का मुद्दा बार-बार उठा।
ईरान युद्ध ने इस तनाव को नया रूप दिया। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे सामरिक महत्व के क्षेत्रों में अमेरिकी अभियानों के लिए यूरोपीय समर्थन की कमी ने वाशिंगटन में गुस्सा पैदा किया।
संभावित परिणाम:
- नाटो के अंदर राजनीतिक बहस तेज होना।
- कुछ देशों का रक्षा खर्च बढ़ाना या ABO नीतियों में बदलाव।
- अमेरिका-यूरोप संबंधों में नई दरार, जिसका फायदा रूस, चीन या ईरान उठा सकते हैं।
- फॉकलैंड जैसे विवादित मुद्दों पर कूटनीतिक बदलाव।
पेंटागन ने पुष्टि की है कि ईमेल मौजूद है और यह राष्ट्रपति को विकल्प सुझाने के लिए तैयार किया गया था। हालांकि, ये अभी सिर्फ प्रस्ताव हैं – अंतिम फैसला ट्रंप प्रशासन पर निर्भर करेगा।
निष्कर्ष: गठबंधन का परीक्षण का समय
यह पेंटागन ईमेल नाटो के लिए एक चेतावनी है। 76 साल पुराना यह गठबंधन आज अपने सदस्यों के बीच विश्वास की कमी का सामना कर रहा है। अमेरिका का कहना है कि सहयोगी “अब मुफ्त में सुरक्षा नहीं पा सकते”। वहीं यूरोप इसे एकतरफा दबाव मान रहा है।
भविष्य में नाटो की मजबूती इसी बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष कितना समझौता करते हैं। क्या ट्रंप प्रशासन वाकई सख्त कदम उठाएगा, या यह सिर्फ दबाव बनाने की रणनीति है? समय बताएगा।
लेकिन एक बात साफ है — ईरान युद्ध ने न केवल मध्य पूर्व, बल्कि अटलांटिक गठबंधन को भी नए सिरे से परिभाषित करने की चुनौती दे दी है।
“नाटो अब पेपर टाइगर नहीं रहेगा” — पेंटागन की यह चेतावनी गठबंधन की नई वास्तविकता को रेखांकित करती है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 25,2026