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Sunday, 26 April 2026

मध्य पूर्व में तनाव के बीच ईरान की सक्रिय कूटनीति: पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका-इजरायल युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने का फ्रेमवर्क पेश

मध्य पूर्व में तनाव के बीच ईरान की सक्रिय कूटनीति: पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका-इजरायल युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने का फ्रेमवर्क पेश
-Friday World-April 27,2026
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की कूटनीति: इस्लामाबाद-मस्कट-मॉस्को का दौरा

तेहरान/इस्लामाबाद, 27 अप्रैल 2026 – ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इन दिनों क्षेत्रीय शांति स्थापना के लिए तीव्र कूटनीतिक गतिविधियों में जुटे हुए हैं। ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, ओमान की अपनी एक दिवसीय यात्रा समाप्त करने के बाद अराघची रविवार को इस्लामाबाद लौट आए हैं और वहां से मॉस्को के लिए रवाना होने वाले हैं। यह दौरा अमेरिका-इजरायल द्वारा थोपे गए युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के प्रयासों का हिस्सा है, जिसमें पाकिस्तान महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

अराघची पिछले दो दिनों में पाकिस्तानी उच्चाधिकारियों से विस्तृत चर्चा कर चुके हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार सहित शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की। इन बैठकों में ईरान ने अमेरिका-इजरायल युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने के लिए एक व्यावहारिक ढांचा (workable framework) प्रस्तुत किया। अराघची ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उन्होंने पाकिस्तान को ईरान की स्थिति स्पष्ट रूप से बताई है, लेकिन यह देखना बाकी है कि अमेरिका वास्तव में कूटनीति के प्रति कितना गंभीर है।

 यात्रा का क्रम और उद्देश्य
अराघची की यह त्रि-राष्ट्रीय यात्रा शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुंचने से शुरू हुई। उन्होंने पाकिस्तान में क्षेत्रीय स्थिति, द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और युद्ध समाप्ति के मुद्दों पर चर्चा की। इसके बाद शनिवार को वे मस्कट (ओमान) पहुंचे, जहां ओमानी सुल्तान हैथम बिन तारिक से मुलाकात हुई। ओमान ऐतिहासिक रूप से मध्य पूर्व में मध्यस्थता की भूमिका निभाता रहा है और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हरमुज जलडमरूमध्य के दूसरी ओर स्थित है।

ओमान यात्रा के दौरान अराघची ने क्षेत्रीय विकास, युद्ध की समाप्ति और हरमुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर चर्चा की। ओमान की यात्रा समाप्त करने के तुरंत बाद वे रविवार को इस्लामाबाद वापस लौट आए। आईआरएनए के मुताबिक, उनके प्रतिनिधिमंडल का एक हिस्सा परामर्श और आगे के निर्देशों के लिए तेहरान लौट चुका था, जो रविवार रात को इस्लामाबाद में उनसे मिलने वाला था।

इस्लामाबाद में छोटे ठहराव के बाद अराघची मॉस्को के लिए रवाना होंगे, जहां वे रूसी अधिकारियों और संभवतः राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करेंगे। यह दौरा ईरान-रूस के मजबूत संबंधों को और गहरा करने तथा क्षेत्रीय मुद्दों पर समन्वय स्थापित करने का हिस्सा है।

 पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका
पाकिस्तान इस पूरे प्रक्रिया में महत्वपूर्ण पुल की भूमिका निभा रहा है। इस्लामाबाद ने ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता को सुविधा प्रदान करने की कोशिश की है। अराघची की मुलाकातों में ईरान ने अपनी 'रेड लाइन्स' (लाल रेखाएं) स्पष्ट की हैं, जिनमें परमाणु मुद्दा, क्षेत्रीय सुरक्षा और हरमुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता शामिल है।

पाकिस्तानी मीडिया और सरकारी सूत्रों के अनुसार, अराघची की पहली यात्रा 'बहुत फलदायी' रही। उन्होंने पाकिस्तान के 'भाईचारे वाले प्रयासों' की सराहना की, जो क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए किए जा रहे हैं। हालांकि, अमेरिकी पक्ष की ओर से कुछ भ्रम की स्थिति बनी रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान में प्रस्तावित अपनी दूतों की यात्रा रद्द कर दी, जिससे वार्ता की प्रगति पर सवाल उठे।

ईरान का स्पष्ट संदेश है कि वह युद्ध की समाप्ति चाहता है, लेकिन किसी भी समझौते में अपनी संप्रभुता और सुरक्षा हितों से समझौता नहीं करेगा। अराघची ने कहा कि अमेरिका-इजरायल 'आक्रामक' हैं और युद्ध के परिणामों की जिम्मेदारी उन्हें उठानी होगी।

 क्षेत्रीय संदर्भ और प्रभाव
यह कूटनीतिक दौरा मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच हो रहा है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच आठ सप्ताह से अधिक का युद्ध क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर रहा है। हरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल निर्यात पर खतरा मंडरा रहा है, जिसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

ईरान ओमान और पाकिस्तान जैसे देशों के माध्यम से अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। रूस के साथ निकट संबंध ईरान को अतिरिक्त कूटनीतिक समर्थन प्रदान कर सकते हैं। मॉस्को यात्रा में द्विपक्षीय संबंधों के अलावा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

पाकिस्तान की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इस्लामाबाद ईरान के साथ अच्छे संबंध रखता है और अमेरिका के साथ भी संतुलित नीति अपनाता है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की बैठकें दर्शाती हैं कि पाकिस्तान युद्ध समाप्ति में सक्रिय योगदान देना चाहता है।

आगे की संभावनाएं
अराघची की मॉस्को यात्रा के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। यदि अमेरिका कूटनीति के प्रति गंभीर साबित होता है, तो अप्रत्यक्ष वार्ता आगे बढ़ सकती है। लेकिन दोनों पक्षों की 'रेड लाइन्स' को देखते हुए प्रक्रिया जटिल हो सकती है।

ईरान का जोर है कि कोई भी समझौता स्थायी होना चाहिए और युद्ध की पुनरावृत्ति को रोके। पाकिस्तान ने भरोसा दिलाया है कि वह क्षेत्रीय शांति के लिए हर संभव प्रयास करेगा।

यह दौरा दर्शाता है कि कूटनीति अभी भी युद्ध का विकल्प है। मध्य पूर्व की शांति न केवल क्षेत्रीय देशों बल्कि पूरी दुनिया के हित में है। तेल की आपूर्ति, नौवहन सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता जैसे मुद्दे इससे जुड़े हैं।

अराघची की यह यात्रा ईरान की सक्रिय विदेश नीति का प्रतीक है, जो चुनौतियों के बीच भी संवाद का रास्ता तलाश रही है। पाकिस्तान, ओमान और रूस जैसे साझेदारों के साथ समन्वय बढ़ाना तेहरान की प्राथमिकता है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-April 27,2026