-Friday World-April 5,2026
यमन के ईरान समर्थित अंसारुल्लाह (Ansarullah) ने इजरायल की ओर बैलिस्टिक मिसाइल दागकर एक बार फिर क्षेत्रीय तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। यमन से लॉन्च की गई यह मिसाइल इजरायल की सीमा की ओर बढ़ रही थी, जिसे इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) की एयर डिफेंस सिस्टम ने बीच में ही रोक लिया। हमले के कुछ मिनट बाद इजरायली सेना ने घोषणा की कि अब लोगों के लिए शेल्टर से बाहर निकलना सुरक्षित है।
यह हमला ईरान के साथ चल रहे अमेरिका-इजरायल युद्ध के दौरान अंसारुल्लाह का पहला प्रत्यक्ष हस्तक्षेप माना जा रहा है। इससे पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध के विस्तार की आशंका बढ़ गई है।
अंसारुल्लाह का दावा और हमले का विवरण
अंसारुल्लाह के सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने आधिकारिक बयान जारी कर जिम्मेदारी ली। उन्होंने कहा कि उनके बलों ने इजरायल के “संवेदनशील सैन्य और रणनीतिक ठिकानों” को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। अंसारुल्लाह ने यह हमला ईरान, लेबनान के हिजबुल्लाह और अन्य प्रतिरोधी मोर्चों के साथ पूर्ण समन्वय में किया है।
अंसारुल्लाह ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक इजरायल और अमेरिका द्वारा “प्रतिरोध की धुरी” (Axis of Resistance) पर आक्रामकता जारी रहेगी, तब तक ऐसे हमले लगातार जारी रहेंगे। यह हमला 28 मार्च 2026 को हुआ, जिसमें दक्षिणी इजरायल (बीयरशेबा क्षेत्र के आसपास) को मुख्य निशाना बनाया गया।
इजरायली सेना ने पुष्टि की कि यमन से एक बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च की गई थी। IDF की मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम (संभवतः एरो या डेविड स्लिंग) ने इसे सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर लिया। हमले के दौरान सायरन बजाए गए और लोगों को शेल्टर में जाने की सलाह दी गई थी, लेकिन कोई हताहत या भारी क्षति की खबर नहीं आई।
युद्ध में अंसारुल्लाह का प्रवेश: ईरान का विस्तारित मोर्चा
यह हमला ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल संघर्ष शुरू होने के बाद अंसारुल्लाह का पहला बड़ा कदम है। इससे पहले 2023-2025 के दौरान अंसारुल्लाह ने लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर हमले किए थे, लेकिन गाजा युद्धविराम के बाद हमले काफी कम हो गए थे।
2026 के ईरान युद्ध में अंसारुल्लाह के सक्रिय होने से “एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस” (प्रतिरोध की धुरी) की एकजुटता स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। अंसारुल्लाह नेता बार-बार कह रहे हैं कि वे ईरान पर हमले का जवाब देने के लिए तैयार हैं और इजरायल पर दबाव बनाए रखेंगे।
इजरायली अधिकारियों ने इस हमले को “ईरान समर्थित प्रॉक्सी युद्ध” का विस्तार बताया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अंसारुल्लाह के हमले जारी रहे तो यमन में उनके ठिकानों पर भी बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई की जाएगी।
क्षेत्रीय प्रभाव और लाल सागर की बढ़ती चिंता
अंसारुल्लाह के इस हमले से दो बड़े खतरे उभरे हैं:
1. इजरायल की सुरक्षा: हालांकि मिसाइल को रोक लिया गया, लेकिन बार-बार होने वाले हमले इजरायली एयर डिफेंस सिस्टम पर दबाव बढ़ा रहे हैं।
2. लाल सागर और वैश्विक शिपिंग: अंसारुल्लाह ने पहले भी लाल सागर में जहाजों पर हमले किए थे, जिससे वैश्विक व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ था। अब फिर से Red Sea shipping routes पर खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर हमले बढ़े तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं तथा वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हो सकती है।
ईरान-इजरायल युद्ध में अंसारुल्लाह की भूमिका
ईरान लंबे समय से अंसारुल्लाह को हथियार, प्रशिक्षण, खुफिया जानकारी और तकनीकी सहायता मुहैया कराता रहा है। इस हमले को ईरान के “प्रॉक्सी वॉरफेयर” का हिस्सा माना जा रहा है। इजरायल और अमेरिका दोनों अंसारुल्लाह को ईरान का विस्तारित हाथ मानते हैं।
अंसारुल्लाह का बयान साफ है — “हम ईरान पर हमले का जवाब देंगे और इजरायल पर दबाव बनाए रखेंगे।” इससे युद्ध के चार मोर्चे (ईरान, लेबनान-हिजबुल्लाह, यमन-अंसारुल्लाह और इराकी मिलिशिया) सक्रिय हो गए हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों का विश्लेषण
सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि अंसारुल्लाह के पास लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें (जैसे बुरकान सीरीज) हैं, जो इजरायल तक पहुंच सकती हैं। हालांकि इजरायल की मल्टी-लेयर एयर डिफेंस (आयरन डोम, डेविड स्लिंग, एरो) अभी तक प्रभावी साबित हो रही है।
फिर भी, बार-बार होने वाले हमले इजरायल को दो मोर्चों (ईरान और यमन) पर ध्यान केंद्रित करने को मजबूर कर रहे हैं। अगर अंसारुल्लाह के हमले बढ़े तो इजरायल को यमन में सैन्य कार्रवाई करनी पड़ सकती है, जो युद्ध को और विस्तार देगी।
वैश्विक प्रभाव और चिंता
यह हमला वैश्विक स्तर पर भी चिंता बढ़ा रहा है।
- लाल सागर में शिपिंग रूट प्रभावित होने से यूरोप और एशिया के बीच व्यापार बाधित हो सकता है।
- तेल की कीमतों में उछाल आ रहा है।
- संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय युद्ध के विस्तार को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर रहे हैं।
: युद्ध का विस्तार और भविष्य की चुनौती
यमन के अंसारुल्लाह द्वारा इजरायल पर मिसाइल हमला ईरान-इजरायल संघर्ष को एक नया आयाम दे रहा है। यमन से इजरायल पर हमला न सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा को चुनौती दे रहा है, बल्कि लाल सागर के माध्यम से होने वाले वैश्विक व्यापार को भी खतरे में डाल रहा है।
दुनिया इस वक्त मिडिल ईस्ट की ओर सांस रोककर देख रही है। क्या अंसारुल्लाह के हमले बढ़ेंगे? क्या इजरायल यमन में जवाबी कार्रवाई करेगा? और सबसे महत्वपूर्ण — क्या ईरान और उसके समर्थित समूह पूरे क्षेत्र को बड़े युद्ध में झोंक देंगे?
एक बात तय है — अंसारुल्लाह का यह हमला 2026 के मिडिल ईस्ट युद्ध को और जटिल और खतरनाक बना रहा है। शांति की कोई किरण दिखाई नहीं दे रही और हर नया हमला स्थिति को और बिगाड़ रहा है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 5,2026