-Friday World-April 7,2026
दिल्ली की शांत निजामुद्दीन ईस्ट कॉलोनी में मंगलवार सुबह अचानक हलचल मच गई। असम पुलिस की चार सदस्यीय टीम, दिल्ली पुलिस की मदद से, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मीडिया विभाग प्रमुख पवन खेड़ा के आवास पर पहुंची। मकसद? पूछताछ और तलाशी। लेकिन जब टीम ने दरवाजा खटखटाया, तो पवन खेड़ा घर पर नहीं मिले। पुलिस ने कुछ संदिग्ध दस्तावेज जब्त किए और वापस लौट गई। यह घटना मात्र एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि असम विधानसभा चुनाव (9 अप्रैल 2026) से ठीक दो दिन पहले राजनीतिक घमासान का ताजा किस्सा बन गई है।
क्या है पूरा मामला? आरोप और पलटवार
सब कुछ शुरू हुआ पिछले रविवार को, जब पवन खेड़ा ने दिल्ली और गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भuyan सरमा पर गंभीर आरोप लगाए। खेड़ा का दावा था कि रिनिकी के पास तीन देशों के पासपोर्ट हैं – भारत, यूएई और मिस्र (कुछ रिपोर्ट्स में एंटीगुआ और बारबुडा का भी जिक्र)। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सरमा परिवार के पास दुबई में लग्जरी प्रॉपर्टी और अमेरिका के व्योमिंग में करोड़ों की कंपनियां हैं। कांग्रेस ने कुछ दस्तावेज भी दिखाए, जिन्हें वे “सबूत” बता रहे थे।
कांग्रेस का कहना था कि ये खुलासा “जनता के सामने सच्चाई लाने” का प्रयास है। लेकिन हिमंता सरमा ने इसे तुरंत “फर्जी, पाकिस्तान प्रेरित मिसइनफॉर्मेशन कैंपेन” करार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विदेशी ताकतों से प्रभावित होकर उनके परिवार को बदनाम कर रही है। रिनिकी भuyan सरमा ने सोमवार को गुवाहाटी पुलिस कमिश्नरेट के क्राइम ब्रांच में पवन खेड़ा और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज कराई। FIR में धोखाधड़ी, मानहानि और फर्जी दस्तावेजों से संबंधित धाराएं लगाई गईं।
मंगलवार को असम पुलिस की टीम दिल्ली पहुंच गई। दिल्ली पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत सहयोग किया। टीम ने खेड़ा के घर तलाशी ली, लेकिन वे वहां नहीं थे। असम पुलिस के डीसीपी डॉ. देबजित नाथ ने बताया कि कुछ “इंक्रिमिनेटिंग डॉक्यूमेंट्स” बरामद हुए हैं, हालांकि उनके डिटेल्स अभी सार्वजनिक नहीं किए गए।
हिमंता सरमा का तंज: “भाग गए पवन खेड़ा”
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस घटना पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा, “कल गुwahाटी से भाग गए, आज दिल्ली से हैदराबाद भाग गए। कानून अपना कोर्स चलेगा।” सरमा ने यह भी दावा किया कि यूएई, मिस्र और अमेरिका की ओर से कांग्रेस के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “पवन खेड़ा अब पावन पेड़ा बन जाएंगे।”
सरमा का आरोप है कि ये आरोप असम चुनाव में उन्हें और भाजपा को नुकसान पहुंचाने के लिए रचा गया साजिश है। उन्होंने कांग्रेस पर “विदेशी प्रभावित” होने का आरोप भी लगाया।
कांग्रेस का बचाव: “विच हंट और दमन”
कांग्रेस ने इस कार्रवाई को “राजनीतिक प्रतिशोध” और “विच हंट” बताया। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि हिमंता सरमा “घबराए हुए, बौखलाए हुए और हताश” हैं। उनके अनुसार, असम पुलिस का इस्तेमाल विपक्षी आवाज को दबाने के लिए किया जा रहा है। कांग्रेस ने मांग की कि पहले रिनिकी सरमा के पासपोर्ट और संपत्तियों की जांच हो, फिर पवन खेड़ा से पूछताछ की जाए।
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पवन खेड़ा असम में चुनाव प्रचार के लिए थे और दिल्ली में नहीं थे। कुछ रिपोर्ट्स में उनका हैदराबाद में होना बताया गया। पार्टी ने जोर देकर कहा कि उनके पास “दस्तावेजी सबूत” हैं और वे कानूनी लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।
राजनीतिक संदर्भ: चुनावी माहौल में तनाव
यह विवाद असम विधानसभा चुनाव से महज दो दिन पहले सामने आया है, जब मतदान 9 अप्रैल को होना है। असम में भाजपा गठबंधन और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर है। हिमंता सरमा पिछले कई सालों से कांग्रेस पर हमलावर रहे हैं, जबकि कांग्रेस उन्हें “तानाशाही” का आरोप लगाती रही है।
पासपोर्ट और विदेशी संपत्ति जैसे मुद्दे भारतीय राजनीति में हमेशा से संवेदनशील रहे हैं। भारतीय कानून के अनुसार, भारतीय नागरिक सामान्यतः एक ही पासपोर्ट रख सकते हैं। ड्यूल सिटीजनशिप की अनुमति नहीं है, हालांकि कुछ विशेष मामलों में OCI या PIO कार्ड होते हैं। अगर कोई व्यक्ति विदेशी पासपोर्ट रखता है तो यह गंभीर कानूनी उल्लंघन माना जा सकता है।
पवन खेड़ा ने जो दस्तावेज दिखाए, वे अगर सही साबित होते हैं तो बड़ा बवाल खड़ा हो सकता है। लेकिन अगर वे फर्जी निकले तो कांग्रेस और खेड़ा पर मानहानि का केस मजबूत हो जाएगा। पुलिस ने अभी तक दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ और जनता?
राजनीतिक विश्लेषक इस घटना को “चुनावी ड्रामा” का हिस्सा बता रहे हैं। एक ओर जहां विपक्ष सरकार पर “पुलिस का दुरुपयोग” का आरोप लगा रहा है, वहीं सत्ताधारी पक्ष इसे “कानून का राज” बता रहा है। सोशल मीडिया पर भी बहस तेज है – कुछ यूजर्स इसे “सीनाजोरी” कह रहे हैं, तो कुछ “जांच का स्वागत” कर रहे हैं।
पवन खेड़ा कांग्रेस के आक्रामक चेहरे माने जाते हैं। वे अक्सर प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया के जरिए विपक्षी हमले करते रहे हैं। लेकिन इस बार मामला व्यक्तिगत परिवार तक पहुंच गया है, जो राजनीति को और व्यक्तिगत बना रहा है।
आगे क्या?
अभी पुलिस जांच जारी है। असम पुलिस पवन खेड़ा को नोटिस भेज सकती है या उन्हें पूछताछ के लिए बुला सकती है। अगर दस्तावेज फर्जी साबित हुए तो केस मजबूत होगा। कांग्रेस ने भी अपना बचाव तैयार रखा है और कहा है कि वे सबूतों को कोर्ट में पेश करेंगे।
यह घटना भारतीय लोकतंत्र की एक बड़ी सच्चाई को उजागर करती है – चुनाव के समय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप कितने तेजी से व्यक्तिगत और कानूनी स्तर पर पहुंच जाते हैं। “चोरी ऊपर से सीनाजोरी” वाली कहावत यहां फिट बैठती है – आरोप लगाने वाले पर जब कार्रवाई होती है, तो वो खुद को शिकार बताने लगते हैं।
चाहे जो भी हो, अंत में सच्चाई सामने आएगी। कानून और जांच एजेंसियां अपना काम करेंगी। जनता को फैसला करना है कि कौन सच्चा है और कौन राजनीतिक फायदे के लिए सब कुछ कर रहा है। असम चुनाव के नतीजे भी इस घमासान का असर दिखाएंगे।
राजनीति में आरोप आसान हैं, लेकिन सबूत और कानूनी जवाबदेही मुश्किल। यह मामला सिर्फ पवन खेड़ा या हिमंता सरमा का नहीं, बल्कि लोकतंत्र में विपक्ष और सत्ता के बीच संतुलन का सवाल है। जनता देख रही है – कौन सच्चाई की लड़ाई लड़ रहा है और कौन सिर्फ सीनाजोरी।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 7,2026