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Wednesday, 1 April 2026

इरान के राष्ट्रपति का अमेरिकी नागरिकों को खुला पत्र: क्या यह युद्ध सच में "अमेरिका फर्स्ट" है?

इरान के राष्ट्रपति का अमेरिकी नागरिकों को खुला पत्र: क्या यह युद्ध सच में "अमेरिका फर्स्ट" है?
-Friday World-April 2,2026 
दुनिया के सबसे जटिल और संवेदनशील क्षेत्र मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने एक नया मोड़ ले लिया है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई से शुरू हुए युद्ध के एक महीने से अधिक समय बाद, इरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिकी जनता को संबोधित करते हुए एक खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने सीधे सवाल किया है – क्या यह युद्ध वाकई अमेरिका के हितों को प्राथमिकता दे रहा है? क्या ट्रंप प्रशासन की नीतियां "अमेरिका फर्स्ट" के नारे को साकार कर रही हैं, या फिर इजराइल के प्रभाव में अमेरिका अपने नागरिकों की कीमत पर दूसरे के एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है?

 यह पत्र ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्ध पर राष्ट्र को संबोधित करने वाले थे। ट्रंप ने दावा किया कि इरान युद्धविराम चाहता है, लेकिन तेहरान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। पेजेश्कियन के पत्र ने वैश्विक ध्यान खींच लिया है, क्योंकि इसमें इरान ने अमेरिकी लोगों को दुश्मन नहीं मानते हुए सीधा संवाद स्थापित करने की कोशिश की है। 

 युद्ध की पृष्ठभूमि: 28 फरवरी का हमला और उसके बाद 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" के तहत इरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए। इन हमलों में इरान के सैन्य ठिकानों, मिसाइल सुविधाओं, वायु रक्षा प्रणालियों और ऊर्जा व औद्योगिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन हमलों में इरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई सहित कई उच्च अधिकारी मारे गए। इरान ने इसे आक्रामकता बताया और जवाबी कार्रवाई की, जिसमें इजराइल और क्षेत्रीय अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शामिल थे। 

युद्ध के परिणामस्वरूप मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ गई है। होर्मुज की खाड़ी में इरान ने तेल परिवहन प्रभावित किया, जिससे वैश्विक तेल की कीमतें प्रभावित हुईं और अर्थव्यवस्था में अशांति फैली। हवाई यात्रा पर अतिरिक्त सुरक्षा शुल्क लगे, कई देशों में ईंधन संकट की आशंका बढ़ी। हजारों लोग मारे गए, लाखों विस्थापित हुए। इरान का कहना है कि इन हमलों ने उसके लोगों को सीधे निशाना बनाया है। 

पेजेश्कियन के पत्र में इस पर जोर दिया गया: "इरान की महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधाओं – ऊर्जा और औद्योगिक सुविधाओं – पर हमला सीधे तौर पर इरानी लोगों को निशाना बनाता है। यह न केवल युद्ध अपराध है, बल्कि इसके परिणाम इरान की सीमाओं से कहीं आगे तक फैलते हैं।" 

पत्र का मुख्य संदेश: अमेरिकी लोगों से सीधा अपील पेजेश्कियन ने अपने पत्र में अमेरिकी नागरिकों से अपील की कि वे मीडिया और सरकारी "गलत सूचना की मशीनरी" से परे जाकर सोचें। उन्होंने पूछा:

 - क्या यह युद्ध सच में "अमेरिका फर्स्ट" नीति को मजबूत कर रहा है? 

- अमेरिकी लोगों के कौन से हित इस युद्ध से पूरे हो रहे हैं? 

- क्या अमेरिका इजराइल का "प्रॉक्सी" बनकर लड़ रहा है, जहां इजराइल "आखिरी अमेरिकी सैनिक और आखिरी अमेरिकी टैक्सपेयर के डॉलर" तक लड़ना चाहता है? 

राष्ट्रपति ने जोर दिया कि इरानी लोग किसी भी राष्ट्र से, चाहे वह अमेरिका हो, यूरोप हो या पड़ोसी देश, दुश्मनी नहीं रखते। उन्होंने कहा, "इरानी लोग बार-बार विदेशी हस्तक्षेप और दबावों के बावजूद अमेरिकी लोगों को अपना दुश्मन नहीं मानते।" 

पत्र में इजराइल की भूमिका पर तीखा हमला किया गया। पेजेश्कियन ने आरोप लगाया कि इजराइल "ईरानी खतरे" को गढ़कर फिलिस्तीनियों के खिलाफ अपने अपराधों से विश्व का ध्यान भटका रहा है। उन्होंने लिखा कि इजराइल अपनी "भ्रमित महत्वाकांक्षाओं" का बोझ इरान, क्षेत्र और अमेरिका पर डाल रहा है। 

इसके अलावा, उन्होंने इरान की सकारात्मक छवि पेश की – इरानी आप्रवासी जो विश्व की बेहतरीन यूनिवर्सिटीज में पढ़ाते हैं, रिसर्च करते हैं या टेक्नोलॉजी कंपनियों में योगदान देते हैं। उन्होंने अमेरिकियों से कहा कि वे इरान आए लोगों या इरानी मूल के सफल व्यक्तियों से बात करें, न कि सिर्फ विकृत कथाओं पर विश्वास करें।

 ट्रंप के युद्धविराम वाले दावे का सीधा जिक्र नहीं किया गया, लेकिन पत्र में युद्ध को "अधिक महंगा और व्यर्थ" बताया गया। इरान ने बार-बार कहा कि उसकी कार्रवाई आत्मरक्षा पर आधारित है। 

वैश्विक प्रभाव और आर्थिक उथल-पुथल यह युद्ध सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक स्तर पर भी दुनिया को प्रभावित कर रहा है। तेल आपूर्ति प्रभावित होने से कीमतें बढ़ीं, हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में बाद में गिरावट भी दर्ज की गई। हवाई यात्रा महंगी हुई, क्षेत्रीय हवाई अड्डों पर हमलों के बाद सुरक्षा बढ़ाई गई। कई देशों ने मिसाइलों को रोकने की कोशिश की, जिसमें कुवैत, बहरीन, यूएई और सऊदी अरब शामिल हैं।

 इरान ने होर्मुज स्ट्रेट में नियंत्रण का दावा किया और तेल परिवहन पर चीनी युआन में टोल लेना शुरू किया, जो वैश्विक ऊर्जा व्यापार को नया आयाम दे रहा है। यूरोपीय देशों ने साइप्रस में सैन्य संपत्तियां तैनात कीं। लेबनान में संघर्ष बढ़ा, फिलिस्तीन मुद्दा फिर चर्चा में आया। 

पेजेश्कियन ने चेतावनी दी कि इरान की बुनियादी सुविधाओं पर हमले के दूरगामी परिणाम होंगे, जो सिर्फ इरान तक सीमित नहीं रहेंगे। वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता सब प्रभावित हो रहे हैं। 

क्या कहते हैं विश्लेषक? यह पत्र युद्ध के "नैरेटिव वॉर" का हिस्सा माना जा रहा है। इरान अमेरिकी जनमत को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है, जबकि ट्रंप प्रशासन इरान को "आतंकवाद का प्रायोजक" बताकर अपनी कार्रवाई को न्यायोचित ठहरा रहा है। कुछ विश्लेषक इसे इरान की कूटनीतिक रणनीति मानते हैं, जिसमें सीधे अमेरिकी लोगों से बात कर सरकार और मीडिया के बीच दरार डालने की कोशिश है।

 ट्रंप के संबोधन से पहले यह पत्र जारी होना महत्वपूर्ण है। अमेरिका में युद्ध की लोकप्रियता घट रही है, आर्थिक चिंताएं बढ़ रही हैं। पेजेश्कियन ने इरान के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि इरान कई आक्रमणकारियों का सामना कर चुका है और आगे भी टिकेगा। 

 आगे का रास्ता: संवाद या संघर्ष? पेजेश्कियन के पत्र में शांति की गुंजाइश छोड़ी गई लगती है, लेकिन साथ ही दृढ़ता भी दिखाई गई। इरान का कहना है कि वह बातचीत के लिए तैयार था, समझौते का पालन किया, लेकिन अमेरिका ने टेबल छोड़ दी। अब युद्ध जारी है, और दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति पर अड़े हुए हैं। 

यह पत्र अमेरिकी नागरिकों के लिए सोचने का विषय है – क्या विदेश नीति उनके हितों की रक्षा कर रही है, या बाहरी प्रभावों में फंसकर महंगे युद्धों में उन्हें झोंक रही है? इरान का संदेश साफ है: "आप हमारे दुश्मन नहीं हो।" 

युद्ध की जटिलता बढ़ती जा रही है। वैश्विक समुदाय को उम्मीद है कि कूटनीति से रास्ता निकले, लेकिन फिलहाल सैन्य कार्रवाइयां जारी हैं। पेजेश्कियन का यह खुला पत्र इतिहास में दर्ज हो सकता है – एक राष्ट्रपति द्वारा दूसरे देश की जनता से सीधा संवाद, जो युद्ध के बीच शांति और सत्य की अपील करता है। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-April 2,2026