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Tuesday, 12 May 2026

तमिलनाडु में महाराष्ट्र जैसा ड्रामा! AIADMK में बड़ा विद्रोह, 30 बागी विधायकों ने CM विजय की TVK सरकार को दिया समर्थन

तमिलनाडु में महाराष्ट्र जैसा ड्रामा! AIADMK में बड़ा विद्रोह, 30 बागी विधायकों ने CM विजय की TVK सरकार को दिया समर्थन
-Friday World-12 May 2026
तमिलनाडु का राजनीतिक परिदृश्य इन दिनों उबाल पर है। एक के बाद एक चौंकाने वाले घटनाक्रमों ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के बाद AIADMK में जो अस्थिरता की आशंका जताई जा रही थी, वह आज हकीकत बन चुकी है। पार्टी में गहरा विभाजन हो गया है और वरिष्ठ नेता एस.पी. वेलुमणि तथा सी.वी. शणमुगम के नेतृत्व में एक बड़ा गुट मुख्यमंत्री थलपति विजय की TVK (तमिलागा वेट्री कझगम) के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने जा रहा है।

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह सब तब हो रहा है जब AIADMK के प्रमुख एडप्पडी के. पलानीस्वामी (EPS) अपना 72वां जन्मदिन मना रहे हैं। जन्मदिन की खुशी की जगह पार्टी में विद्रोह की आग ने सब कुछ बदल दिया है।

 AIADMK का दो टुकड़ों में विभाजन: बागी गुट ने विजय को थाम लिया

AIADMK के कुल 47 विधायकों में से लगभग 30 विधायक शणमुगम-वेलुमणि गुट के साथ हैं। इन नेताओं ने मंगलवार को स्पष्ट घोषणा कर दी कि वे मुख्यमंत्री विजय की सरकार को बिना शर्त समर्थन देंगे। शणमुगम ने कहा, “हमारा इरादा पार्टी तोड़ने का नहीं है, बल्कि जनता के जनादेश का सम्मान करने का है।”

विपक्षी गुट का दावा है कि धीरे-धीरे बाकी विधायक भी उनके साथ आ जाएंगे। वहीं EPS के पास अब मात्र 17 विधायकों का समर्थन बचा है। उनके साथ आर.बी. उदयकुमार, ओ.एस. मणियन और के.पी. मुन्नुसामी जैसे कुछ वरिष्ठ नेता ही खड़े दिख रहे हैं।

 लॉटरी किंग की पत्नी लीमा रोज मार्टिन की भूमिका

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक दिलचस्प नाम है – लीमा रोज मार्टिन। लॉटरी किंग सेंटियागो मार्टिन की पत्नी लीमा रोज पहले से ही राजनीतिक गलियारों में सक्रिय रहीं हैं। उनके दामाद आदव अर्जुन पहले ही विजय की कैबिनेट में मंत्री हैं। सूत्रों के अनुसार लीमा रोज ने ही AIADMK और TVK के बीच गुप्त वार्ता का सूत्रपात किया था, जो अब खुलकर सामने आ गया है।

यह समर्थन TVK सरकार के लिए बड़ी राहत है। चुनाव में TVK को 108 सीटें मिली थीं, जो बहुमत (118) से कम थीं। अब AIADMK के 30 विधायकों के समर्थन से विजय सरकार मजबूत हो गई है और फ्लोर टेस्ट में आसानी से पास हो सकती है।

 क्यों हुआ यह विद्रोह? सत्ता की भागीदारी या EPS की गलतियाँ?

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस बार विभाजन जाति समीकरणों पर नहीं, बल्कि सत्ता में हिस्सेदारी की मांग पर हुआ है। AIADMK के कई नेता EPS की लगातार चुनावी हारों (लोकसभा और विधानसभा दोनों) से नाराज थे। EPS पर आरोप है कि उन्होंने DMK के साथ गुप्त समझौते की कोशिश की, जिससे पार्टी की 53 साल पुरानी एंटी-DMK छवि को नुकसान पहुंचा।

शणमुगम ने खुलकर कहा कि EPS DMK के सहारे मुख्यमंत्री बनना चाहते थे, जो पार्टी की विचारधारा के खिलाफ है। बागी नेताओं का कहना है कि वे “जनता के चुने हुए मुख्यमंत्री” विजय के साथ खड़े हैं।

EPS के सामने चुनौतियाँ

- पार्टी पर नियंत्रण: EPS अब पार्टी के जनरल सेक्रेटरी हैं, लेकिन विधानसभा में बहुमत उनके पास नहीं।
- भविष्य की अनिश्चितता: अगर विद्रोह बढ़ा तो AIADMK का औपचारिक विभाजन हो सकता है, जैसा पहले भी कई बार हुआ है।
- BJP गठबंधन: EPS का NDA के साथ रिश्ता भी अब कमजोर पड़ गया है क्योंकि बागी गुट ने NDA से दूरी बना ली है।

TVK और विजय के लिए अवसर और खतरे

थलपति विजय के लिए यह बड़ी जीत है। अभिनेता से सीधे मुख्यमंत्री बनने वाले विजय ने कम समय में तमिलनाडु की राजनीति का स्वरूप बदल दिया। TVK अब मजबूत गठबंधन के साथ सरकार चला रही है।

लेकिन खतरा भी है। अगर TVK अपने अंदर अनुशासन नहीं रख सकी तो भविष्य में उसके अपने विधायकों में भी बगावत हो सकती है। एक विधायक वाली पार्टी बिना मेहनत के सत्ता का स्वाद चख रही है, लेकिन लंबे समय तक स्थिरता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा।

 तमिलनाडु राजनीति का नया अध्याय

यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की तरह है जहां Shiv Sena, NCP जैसे दलों में बार-बार विभाजन हुआ। AIADMK भी जयललिता के बाद कई बार टूटने-जुड़ने का शिकार रही है। लेकिन इस बार स्थिति अलग है क्योंकि TVK जैसे नए खिलाड़ी ने मैदान संभाल लिया है।

DMK के लिए भी यह सबक है। स्टालिन परिवार को अब विजय की बढ़ती लोकप्रियता और AIADMK के आंतरिक कलह दोनों से निपटना होगा।

 क्या होगा आगे?

1. फ्लोर टेस्ट में TVK सरकार का विश्वास मत।
2. AIADMK में औपचारिक विभाजन या समझौता।
3. EPS का भविष्य – इस्तीफा या पार्टी पर कब्जा?
4. विजय सरकार के पहले बजट और नीतियों पर असर।

तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से ड्रामे, भावुकता और अप्रत्याशित मोड़ों के लिए जानी जाती है। AIADMK का यह विद्रोह सिर्फ एक पार्टी का आंतरिक मामला नहीं, बल्कि पूरे द्रविड़ राजनीति के भविष्य को आकार देने वाला घटनाक्रम है।

“सत्ता का खेल कभी नहीं रुकता। जो कल तक साथ थे, आज विरोधी बन गए। जो कल विरोधी थे, आज समर्थक।” तमिलनाडु इस बार फिर साबित कर रहा है कि राजनीति यहां सिर्फ सिद्धांतों की नहीं, बल्कि अवसरों और रणनीतियों की भी होती है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-12 May 2026