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Wednesday, 13 May 2026

डॉ. मनमोहन सिंह: शांत स्वभाव का वह महान अर्थशास्त्री, जिसने भारत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया

डॉ. मनमोहन सिंह: शांत स्वभाव का वह महान अर्थशास्त्री, जिसने भारत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया
-Friday World-14 May 2026
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह एक ऐसा व्यक्तित्व थे, जिन्होंने चुपचाप लेकिन दृढ़तापूर्वक देश की सेवा की। “मौन का महानायक” कहे जाने वाले इस महामानव ने 2004 से 2014 तक प्रधानमंत्री के रूप में न केवल आर्थिक सुधारों को गति दी, बल्कि आम आदमी को सीधे छूने वाली क्रांतिकारी योजनाओं को भी मूर्त रूप दिया। उनका योगदान सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के जीवन में बदलाव लाने वाली नीतियों में दर्ज है। आज जब हम उनके कार्यकाल को याद करते हैं, तो एक सच्चे देशभक्त और दूरदर्शी नेता की छवि उभरती है, जिसका ऋण हम कभी नहीं चुका सकते।

 आम आदमी की जेब को राहत: सब्सिडी वाली आवश्यक वस्तुएं

डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने आम नागरिकों को दैनिक जरूरतों पर भारी राहत दी। यूरिया मात्र 240 रुपये, अमोनिया 450 रुपये और डीएपी 600 रुपये प्रति बैग की दर पर उपलब्ध कराई गई। घरेलू गैस सिलेंडर 350 रुपये में मिलता था। पेट्रोल 60 रुपये और डीजल मात्र 55 रुपये प्रति लीटर पर आम आदमी की पहुंच में था। इन सब्सिडी वाली कीमतों ने किसानों, मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों को महंगाई के बोझ से काफी हद तक बचाया। 

विश्व बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं, फिर भी सरकार ने आम आदमी पर बोझ नहीं पड़ने दिया। ईंधन और उर्वरक सब्सिडी को प्राथमिकता दी गई, ताकि खेती-किसानी और परिवहन व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे। यह दृष्टिकोण दिखाता है कि डॉ. सिंह की सरकार विकास के साथ-साथ समावेशी विकास पर भी ध्यान दे रही थी।

अधिकार-आधारित क्रांतिकारी कानून: RTI, RTE, FRA और Food Security

डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि “अधिकार-आधारित” कानूनों की श्रृंखला है, जो आम आदमी को सशक्त बनाने वाली थीं:

- Right to Information (RTI) Act 2005: भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने वाला यह कानून नागरिकों को सरकार की जानकारी मांगने का अधिकार देता है। अपनी ही सरकार में भ्रष्टाचारियों को जेल भेजने में RTI ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पारदर्शिता और जवाबदेही की नई संस्कृति की नींव पड़ी।

- Right to Education (RTE) Act 2009: 6 से 14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार मिला। गरीब बच्चों के लिए निजी स्कूलों में 25% आरक्षण सुनिश्चित किया गया।

- Forest Rights Act (FRA) 2006: आदिवासी और वनवासी समुदायों को उनके पारंपरिक अधिकार दिए गए, जिससे लाखों परिवारों को वन भूमि पर अधिकार मिला।

- National Food Security Act 2013: करोड़ों गरीब परिवारों को सस्ता अनाज उपलब्ध कराने वाला यह कानून भुखमरी और कुपोषण से लड़ने का बड़ा हथियार बना।

- Aadhaar Card: डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) की नींव रखी, जिससे सब्सिडी लीकेज कम हुआ और पात्र लाभार्थियों तक सीधा पहुंच सुनिश्चित हुई।

- Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (MGNREGA): ग्रामीण क्षेत्रों में 100 दिनों का गारंटीड रोजगार। लाखों गरीब परिवारों की आय बढ़ी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिला।

इन योजनाओं को बिना किसी बड़े फर्जीवाड़े या भ्रष्टाचार के लागू करने पर जोर दिया गया। हालांकि कुछ घोटालों की चर्चा हुई, लेकिन RTI जैसे कानून ने स्वयं सरकार को जवाबदेह बनाया।

 किसानों का सच्चा हितैषी: कर्ज माफी और रिकॉर्ड MSP

2008 में डॉ. मनमोहन सिंह सरकार ने ₹71,000 करोड़ का ऐतिहासिक किसान कर्ज माफी पैकेज घोषित किया, जो पूरे देश के करोड़ों किसानों को राहत पहुंचाने वाला था। कपास और मूंगफली जैसे नकदी फसलों पर रिकॉर्ड तोड़ समर्थन मूल्य (MSP) दिए गए। न्यूनतम समर्थन मूल्य नीति को मजबूत किया गया, ताकि किसान मेहनत का उचित दाम पा सकें। 

कृषि ऋण बढ़ाया गया, सिंचाई और ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर निवेश बढ़ा। यह सब दिखाता है कि उनकी सरकार कृषि और किसान को विकास की मुख्यधारा में लाना चाहती थी।

2008 की वैश्विक मंदी से भारत की रक्षा

जब पूरी दुनिया 2008 की वैश्विक वित्तीय संकट की चपेट में थी, तब डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने साहसिक कदम उठाए। बैंकों को मजबूत रखा, तरलता बढ़ाई, स्टिमुलस पैकेज दिए और घरेलू मांग को बढ़ावा दिया। नतीजा यह रहा कि भारत मंदी की गहरी खाई में नहीं गिरा। विकास दर अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर रही। 

उनके अर्थशास्त्री व्यक्तित्व ने संकट को अवसर में बदल दिया। विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत किए गए और नीतिगत स्थिरता बनाए रखी गई।

पारदर्शी और साहसी नेतृत्व: प्रेस और विदेश नीति

डॉ. सिंह “कम बोलने वाले” नेता थे, लेकिन जब बोलते थे तो सख्त और स्पष्ट बोलते थे। उन्होंने मीडिया के सामने सीधे संबोधन किए, प्रेस कॉन्फ्रेंस कीं और सवालों का सामना किया। अपने 10 वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने 100 से अधिक प्रेस कॉन्फ्रेंस कीं।

विदेश नीति में भी उन्होंने मजबूत स्टैंड लिया। भारत-अमेरिका परमाणु समझौता (Nuclear Deal) उनके कार्यकाल की बड़ी उपलब्धि थी, जिसने भारत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दी। पड़ोसी देशों और विश्व नेताओं के साथ संबंध मजबूत किए। किसी से डरे बिना राष्ट्रीय हितों की रक्षा की।

 विरासत जो कभी फीकी नहीं पड़ेगी

डॉ. मनमोहन सिंह का कार्यकाल चुनौतियों से भरा था – गठबंधन सरकार चलाना, वैश्विक संकट, घरेलू मुद्दे। फिर भी उन्होंने शांति, गरिमा और बौद्धिकता के साथ नेतृत्व किया। वे सादगी के प्रतीक थे। कोई दिखावा नहीं, सिर्फ काम।

उनकी नीतियों ने लाखों युवाओं, किसानों, महिलाओं और गरीबों के जीवन को छुआ। RTI ने लोकतंत्र को मजबूत किया, MGNREGA ने ग्रामीण भारत को सशक्त बनाया, Food Security ने भूख से लड़ाई लड़ी। 

आज जब हम पेपर लीक, महंगाई और युवा बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर चर्चा करते हैं, तब मनमोहन सिंह की विरासत हमें याद दिलाती है कि सच्चा नेतृत्व वह है जो आम आदमी के हित में चुपचाप काम करता है।

: सरदार मनमोहन सिंह एक महामानव थे। उनका योगदान सिर्फ योजनाओं या आंकड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि एक ऐसे भारत की नींव रखने में है जहां समावेशी विकास, पारदर्शिता और सामाजिक न्याय प्रमुख हों। हम उनका ऋण कभी नहीं चुका सकते। उनकी याद हमें प्रेरित करती रहेगी कि शांत और बौद्धिक नेतृत्व भी देश को नई दिशा दे सकता है। 

भारत माता के इस सपूत को सलाम। उनकी विरासत सदैव अमर रहेगी।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-14 May 2026