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Wednesday, 13 May 2026

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का भारत आगमन: BRICS में नई कूटनीतिक ऊर्जा और भारत-ईरान की मजबूत दोस्ती का प्रतीक

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का भारत आगमन: BRICS में नई कूटनीतिक ऊर्जा और भारत-ईरान की मजबूत दोस्ती का प्रतीक
-Friday World-14 May 2026
नई दिल्ली। आज इंडिया गेट्स इंटरनेशनल (IGI) हवाई अड्डे पर ईरान के विदेश मंत्री डॉ. सैयद अब्बास अराघची का गर्मजोशी भरा स्वागत किया गया। भारत सरकार की ओर से उनके स्वागत में जो उत्साह और सम्मान दिखाया गया, वह न केवल द्विपक्षीय संबंधों की गहराई को दर्शाता है बल्कि BRICS जैसे महत्वपूर्ण मंच पर बहुपक्षीय सहयोग की नई संभावनाओं को भी रेखांकित करता है।

अराघची साहब BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं। यह बैठक 14 और 15 मई 2026 को भारत की अध्यक्षता में हो रही है, जिसमें वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता और बहुपक्षीय संस्थाओं के सुधार जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने वाली है।

स्वागत का भावपूर्ण क्षण
हवाई अड्डे पर ईरानी विदेश मंत्री का स्वागत विदेश मंत्रालय के अधिकारियों, ईरान के राजदूत और भारतीय गणमान्य व्यक्तियों ने किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा, “ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए नई दिल्ली पहुंचने पर बहुत गर्मजोशी से स्वागत।” यह स्वागत शब्दों से कहीं ज्यादा प्रतीकात्मक है – यह भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना और पड़ोसी क्षेत्र के साथ मजबूत कूटनीतिक संबंधों का जीवंत उदाहरण है।

अराघची साहब का विमान ‘मिनाब168’ नाम से आया, जो हाल की घटनाओं में मिनाब शहर में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना का प्रतीक बन गया है। इस नाम ने ईरान में राष्ट्रीय भावनाओं को छुआ है और वैश्विक मंच पर शांति की अपील को मजबूत किया है।

 अब्बास अराघची: अनुभवी कूटनीतिज्ञ की जीवनी
सैयद अब्बास अराघची ईरान के अनुभवी राजनयिक हैं। 5 दिसंबर 1962 को तेहरान में जन्मे अराघची ने ईरान-इराक युद्ध में स्वेच्छा से सेवा की, जिसने उनकी विश्वदृष्टि को आकार दिया। उन्होंने ईरान के विदेश मंत्रालय के इंटरनेशनल रिलेशंस स्कूल से स्नातक किया, इस्लामिक आजाद यूनिवर्सिटी से राजनीति विज्ञान में मास्टर डिग्री हासिल की और यूनिवर्सिटी ऑफ केंट (इंग्लैंड) से राजनीतिक विचारधारा पर पीएचडी पूरी की।

उनकी थीसिस “20वीं सदी में इस्लामी राजनीतिक विचार में राजनीतिक भागीदारी की अवधारणा का विकास” ने इस्लामी मूल्यों और पश्चिमी लोकतंत्र के बीच सामंजस्य की संभावनाओं पर गहराई से चर्चा की। अराघची JCPOA (2015 का न्यूक्लियर डील) के प्रमुख वार्ताकारों में शामिल रहे और बाद में भी परमाणु मुद्दों पर ईरान की आवाज बने। अगस्त 2024 में वे ईरान के विदेश मंत्री बने। उनकी कूटनीति ‘रिवोल्यूशनरी’ जड़ों और व्यावहारिक संवाद दोनों को संतुलित करती है।

 भारत-ईरान संबंध: ऐतिहासिक गहराई और वर्तमान प्रासंगिकता
भारत और ईरान के बीच संबंध सदियों पुराने हैं। सभ्यतागत, सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों की यह यात्रा आज भू-राजनीतिक महत्व भी रखती है। चाबहार बंदरगाह परियोजना दोनों देशों के बीच कनेक्टिविटी का प्रतीक है, जो मध्य एशिया तक पहुंच प्रदान करती है और अफगानिस्तान को बाईपास करने का विकल्प देती है।

हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग, व्यापार और रक्षा क्षेत्र में चर्चाएं बढ़ी हैं। ईरान भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण स्रोत रहा है, जबकि भारत ईरान के लिए प्रौद्योगिकी, दवा और कृषि क्षेत्र में भागीदार है। BRICS में ईरान की पूर्ण सदस्यता (2024 से) ने इन संबंधों को नया आयाम दिया है।

वर्तमान में पश्चिम एशिया में तनाव के बीच यह यात्रा खास महत्व रखती है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय जहाजों की सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे स्वाभाविक रूप से चर्चा में रहेंगे। भारत ने हमेशा संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है – दोस्ती निभाते हुए शांति और संवाद की वकालत की है।

 BRICS 2026: भारत की अध्यक्षता में नई दिशा
भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” (BRICS@20) वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने पर केंद्रित है। इस बैठक में रूस के सर्गेई लावरोव समेत कई प्रमुख विदेश मंत्री शामिल होंगे। चीन के वांग यी इस बार नहीं आ रहे, लेकिन अन्य सदस्य देश सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं।

BRICS अब विस्तारित रूप में 11 सदस्यों वाला मंच है – ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान आदि। यह मंच बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की दिशा में काम कर रहा है। अराघची की यात्रा BRICS की एकता को परखेगी, खासकर जब क्षेत्रीय संकट चर्चा का केंद्र हैं।

भारत वैश्विक मुद्दों पर ‘ग्लोबल साउथ’ का नेतृत्व करते हुए सभी पक्षों के बीच पुल का काम कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से BRICS मंत्रियों की मुलाकात इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।

 वैश्विक संदर्भ: चुनौतियां और अवसर
वर्तमान समय में BRICS की बैठक कई चुनौतियों के बीच हो रही है – पश्चिम एशिया का तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव, बहुपक्षीय संस्थाओं (UN, WTO आदि) में सुधार की मांग और आर्थिक सहयोग। ईरान BRICS से मजबूत समर्थन की उम्मीद रखता है, जबकि भारत संतुलन और संवाद पर जोर दे रहा है।

भारत ने होर्मुज से LPG टैंकरों की सुरक्षित निकासी में भी सफलता हासिल की है, जो कूटनीतिक परिपक्वता का प्रमाण है। अराघची की यात्रा इन मुद्दों पर गहन चर्चा का अवसर प्रदान करेगी।

 सांस्कृतिक और जन-जन संबंध
केवल सरकारी स्तर पर ही नहीं, भारत और ईरान के बीच लोग-लोग संबंध भी मजबूत हैं। फारसी भाषा, सूफी परंपरा, कला, साहित्य और सिनेमा दोनों समाजों को जोड़ते हैं। हजारों ईरानी छात्र भारत के विश्वविद्यालयों में पढ़ते हैं और भारतीय पर्यटक ईरान की ऐतिहासिक जगहों को देखने जाते हैं।

 भविष्य की दिशा
अराघची साहब की इस यात्रा से उम्मीद है कि भारत-ईरान द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे। चाबहार परियोजना को नई गति मिलेगी, व्यापार बढ़ेगा और BRICS के माध्यम से क्षेत्रीय स्थिरता के प्रयास तेज होंगे।

भारत की विदेश नीति ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ पर आधारित है। ईरान जैसे महत्वपूर्ण देश के साथ यह साझेदारी न केवल द्विपक्षीय बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए फायदेमंद साबित होगी।


सैयद अब्बास अराघची का भारत आगमन महज एक कूटनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि सभ्यतागत दोस्ती, रणनीतिक साझेदारी और बहुपक्षीय सहयोग की नई शुरुआत है। BRICS मंच पर भारत की अध्यक्षता में हो रही यह बैठक विश्व को यह संदेश देगी कि उभरती शक्तियां साथ मिलकर चुनौतियों का सामना कर सकती हैं और शांतिपूर्ण, समृद्ध विश्व का निर्माण कर सकती हैं।

दोनों देशों के बीच यह यात्रा नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी। शांति, समृद्धि और सहयोग की इस यात्रा में भारत और ईरान साथ-साथ आगे बढ़ें – यही पूरे क्षेत्र और विश्व के लिए शुभ है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-14 May 2026