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Friday, 22 May 2026

दुनिया को नैतिकता का उपदेश देने वाला ब्रिटेन झुका! भारत से रूसी रिफाइंड ऑयल खरीदने को मजबूर, ईरान-अमेरिका युद्ध ने बदल दिए वैश्विक समीकरण

दुनिया को नैतिकता का उपदेश देने वाला ब्रिटेन झुका! भारत से रूसी रिफाइंड ऑयल खरीदने को मजबूर, ईरान-अमेरिका युद्ध ने बदल दिए वैश्विक समीकरण
-Friday World-22 May 2026

जब पश्चिम की 'सिद्धांतों' की दीवारें तेल के संकट में दरक गईं – भारत की ऊर्जा कूटनीति की ऐतिहासिक जीत

नई दिल्ली। दुनिया को लोकतंत्र, मानवाधिकार और नैतिक मूल्यों का पाठ पढ़ाने वाला ब्रिटेन आज जमीनी हकीकत के सामने घुटनों पर आ गया है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे भीषण युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को तहस-नहस कर दिया है। खाड़ी देशों से तेल और ईंधन की सप्लाई चेन पूरी तरह टूट चुकी है। इस संकट में ब्रिटेन ने अपना रुख बदल लिया और भारत से रूस का रिफाइंड ऑयल खरीदने का फैसला कर लिया है।

यह वह ब्रिटेन है जिसने रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूसी तेल पर सख्त प्रतिबंध लगाए थे। लेकिन आज वही ब्रिटेन 'जनरल लाइसेंस' जारी करके भारत और तुर्की की रिफाइनरियों में प्रोसेस हुए रूसी डीजल और जेट फ्यूल की अनलिमिटेड आयात की अनुमति दे रहा है। यह घटना न केवल ब्रिटेन की मजबूरी को उजागर करती है, बल्कि भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और दूरदर्शी ऊर्जा रणनीति की बड़ी जीत भी साबित होती है।

 ईरान-अमेरिका युद्ध: वैश्विक तेल बाजार का भयानक संकट

ईरान और अमेरिका के बीच छिड़े इस युद्ध ने पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को चुनौती दी है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ हरमुज जैसी महत्वपूर्ण जल मार्ग प्रभावित हुई है। दुनिया का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों (सऊदी अरब, UAE, कुवैत आदि) पर निर्भर था, लेकिन युद्ध ने सप्लाई पूरी तरह बाधित कर दी। 

नतीजा? 
- ICE Gasoil Futures (डीजल का मुख्य बेंचमार्क) 160 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है – जो ऐतिहासिक उच्चतम स्तर है।

- यूरोप और ब्रिटेन में डीजल और एविएशन फ्यूल (विमान ईंधन) की भारी कमी।

- परिवहन व्यवस्था ठप होने की कगार पर।

- महंगाई का नया दौर शुरू।

इस संकट ने पश्चिमी देशों को मजबूर किया कि वे अपने सिद्धांतों को थोड़ी देर के लिए अलमारी में रख दें और व्यावहारिक जरूरतों को प्राथमिकता दें।

 ब्रिटेन का यू-टर्न: जनरल लाइसेंस की घोषणा

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटिश सरकार ने 20 मई 2026 को रात में एक नया 'जनरल लाइसेंस' जारी किया। इस लाइसेंस के तहत:

- भारत और तुर्की की रिफाइनरियों में रूसी क्रूड ऑयल से बने डीजल और जेट फ्यूल की आयात पर कोई समय सीमा नहीं।

- प्रतिबंधों में बड़ा छूट।

- अनिश्चितकाल तक यह व्यवस्था लागू।

यह फैसला ब्रिटेन के लिए बहुत बड़ा यू-टर्न है। 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद ब्रिटेन ने रूस से तेल आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन आज मजबूरी ने उन्हें भारत की ओर हाथ फैलाने पर मजबूर कर दिया।

 भारत की विजय: जब पश्चिम ने 'नो' कहा, तब भारत ने 'हां' कहा

2022 में जब पश्चिमी देश रूस से दूरी बना रहे थे, भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने रूस से भारी छूट पर क्रूड ऑयल खरीदना जारी रखा। 

नतीजे:
- भारत दुनिया का सबसे बड़ा रूसी क्रूड ऑयल खरीदार बन गया।

- भारतीय रिफाइनरियां (जामनगर, कोचि, मंगलुरु आदि) रूसी तेल को प्रोसेस करके विश्व स्तर पर आपूर्ति करने लगीं।

- भारत को सस्ता तेल मिला, महंगाई पर काबू रहा और विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हुआ।

जब ब्रिटेन और यूरोप रूसी तेल से दूर भाग रहे थे, भारत ने उसे संसाधित करके विश्व बाजार में पहुंचाया। आज वही ब्रिटेन भारत से यह तेल खरीद रहा है। यह भारत की 'मल्टी-अलाइनमेंट' विदेश नीति की सफलता का प्रतीक है।

 भू-राजनीतिक महत्व: सिद्धांत बनाम वास्तविकता

यह घटना कई सबक सिखाती है:

1. राष्ट्रीय हित सर्वोपरि: कोई भी देश हमेशा नैतिकता के उच्च आसन पर नहीं बैठ सकता। जब पेट्रोल पंप सूखने लगते हैं और अर्थव्यवस्था ठप होने लगती है, तो सिद्धांत पीछे छूट जाते हैं।

2. भारत की स्वायत्तता: भारत ने न तो रूस को पूरी तरह नजरअंदाज किया और न ही पश्चिम के दबाव में आया। इस संतुलित नीति ने आज उसे मजबूत स्थिति में रखा है।

3. ऊर्जा सुरक्षा का महत्व: दुनिया को समझ आ रहा है कि ऊर्जा सुरक्षा बिना किसी भी देश की अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं रह सकती।

4. नई विश्व व्यवस्था: एकध्रुवीय दुनिया का दौर समाप्त हो चुका है। अब बहुध्रुवीय दुनिया में हर देश अपने हित देख रहा है।

 आर्थिक प्रभाव: ब्रिटेन और यूरोप पर क्या पड़ेगा असर?

ब्रिटेन में पहले से ही महंगाई और आर्थिक मंदी का दबाव था। इस नए संकट ने स्थिति और बिगाड़ दी है। 

- विमानन उद्योग पर भारी असर (जेट फ्यूल की कमी)।

- ट्रक ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स ठप होने का खतरा।

- आम नागरिकों पर महंगे ईंधन का बोझ।

दूसरी ओर, भारत के लिए यह सुनहरा अवसर है। भारतीय रिफाइनरी कंपनियां (रिलायंस, आईओसी, बीपीसीएल आदि) अतिरिक्त निर्यात से अच्छा मुनाफा कमा सकती हैं।

रूस-भारत संबंध: विश्वसनीय साझेदारी

भारत और रूस के बीच दशकों पुरानी दोस्ती आज भी मजबूत है। रूस ने भारत को सस्ता तेल देकर संकट के समय मदद की। बदले में भारत ने रूस को आर्थिक अलगाव से बचाया। यह 'विन-विन' साझेदारी आज पूरी दुनिया देख रही है।

भविष्य की चुनौतियां और अवसर

यह संकट हमें याद दिलाता है कि:

- विविध ऊर्जा स्रोतों (सौर, पवन, हाइड्रोजन, न्यूक्लियर) पर जोर देना जरूरी है।

- आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाना चाहिए।

- भू-राजनीतिक जोखिमों का आकलन पहले से करना चाहिए।

भारत के पास आज बड़ा अवसर है कि वह न सिर्फ तेल निर्यातक बने, बल्कि विश्व ऊर्जा सुरक्षा में अहम भूमिका निभाए।
 
 सिद्धांतों की हार, हकीकत की जीत

ब्रिटेन का यह कदम साबित करता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नैतिकता अक्सर हितों के सामने झुक जाती है। जो देश कल रूस को 'दुष्ट' बता रहे थे, आज उसी रूस के तेल पर निर्भर हो गए हैं – वह भी भारत के माध्यम से।

यह घटना भारत के लिए गर्व का विषय है। हमारी विदेश नीति ने साबित कर दिया कि 'राष्ट्र प्रथम' का सिद्धांत जब सही तरीके से लागू किया जाए, तो दुनिया खुद हमारे पास आती है।

भारत की यह जीत सिर्फ आर्थिक नहीं, रणनीतिक और कूटनीतिक भी है।
जब पश्चिमी देश 'नैतिकता' का ढोंग रच रहे थे, तब भारत ने व्यावहारिक बुद्धिमत्ता दिखाई। आज परिणाम सबके सामने है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-22 May 2026